Mumbai BEST Bus Strike: मुंबई में थमे बेस्ट बसों के पहिए, धारावी डिपो बना आंदोलन का मुख्य केंद्र; इन इलाकों के यात्री सबसे ज्यादा परेशान
मुंबई में 12 कर्मचारी यूनियनों के गठबंधन द्वारा बुलाई गई अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण शुक्रवार सुबह से सार्वजनिक परिवहन सेवाएं चरमरा गई हैं. औद्योगिक अदालत के स्थगन आदेश और सख्त मेस्मा (MESMA) कानून के बावजूद हजारों कर्मचारी काम पर नहीं लौटे, जिससे बेस्ट के बड़े बेड़े की अधिकांश बसें डिपो में ही खड़ी रहीं.
Mumbai BEST Bus Strike: मुंबई की दूसरी सबसे बड़ी लाइफलाइन मानी जाने वाली 'बेस्ट' (BEST) बसों के कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण आज (शुक्रवार) सुबह से ही महानगर की सड़कों पर यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. औद्योगिक अदालत (Industrial Court) के रोक संबंधी आदेश और राज्य सरकार द्वारा सख्त 'मेस्मा' (MESMA) कानून लागू किए जाने के बावजूद, 12 कर्मचारी यूनियनों के संयुक्त मोर्चे के आह्वान पर हजारों कार्यकर्ता काम पर नहीं लौटे. इसके चलते बेस्ट के कुल 2,766 बसों के बेड़े में से अधिकांश गाड़ियां डिपो के अंदर ही फंसी रहीं और सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा. यह भी पढ़ें: Mumbai BEST Bus Strike: मुंबई में बेस्ट कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू; बस सेवा और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका, जानें क्या हैं प्रमुख मांगें
सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके और यात्रियों का हाल
बसें न चलने के कारण प्रमुख रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर यात्रियों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे ऑटो-रिक्शा और टैक्सियों के लिए लंबी कतारें लग गईं. हड़ताल का सबसे गंभीर असर इन प्रमुख व्यावसायिक और आवासीय केंद्रों पर देखा गया:
- बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC): मुंबई के इस सबसे बड़े बिजनेस डिस्ट्रिक्ट में दफ्तर जाने वालों को राहत देने के लिए बेस्ट प्रशासन ने कुर्ला वेस्ट, बांद्रा स्टेशन ईस्ट और बांद्रा टर्मिनस को जोड़ने वाले समर्पित मार्गों पर करीब एक दर्जन अतिरिक्त बसें तैनात की हैं.
- धारावी: धारावी बस डिपो इस हड़ताल का मुख्य केंद्र (Flashpoint) बनकर उभरा है. यहां सुबह से ही कर्मचारियों का बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी है, जिसे देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है.
- कुर्ला और बांद्रा: इन आवासीय क्षेत्रों को जोड़ने वाले फीडर रूट पूरी तरह ठप हो गए हैं। स्थानीय डिपो से परिचालन लगभग शून्य रहा.
- दक्षिण मुंबई और पूर्वी उपनगर: परिवहन के अलावा इस हड़ताल का साया बेस्ट के बिजली विभाग पर भी मंडरा रहा है, जो दक्षिण मुंबई के 10 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति करता है.
बीएमसी बजट में विलय और निजीकरण का विरोध
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे 'बेस्ट संयुक्त कामगार कृति समिति' के नेताओं का कहना है कि प्रशासन द्वारा उनकी वित्तीय और वैधानिक मांगों को लंबे समय से नजरअंदाज किए जाने के कारण यह कड़ा कदम उठाना पड़ा. कर्मचारियों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
- बजट का विलय: आर्थिक तंगी से जूझ रहे बेस्ट के बजट को बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के मुख्य बजट के साथ जोड़ा जाए.
- निजीकरण पर रोक: 99 साल की लीज पर पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत बस डिपो के पुनर्विकास की योजनाओं को तुरंत रोका जाए.
- वेतन आयोग और बकाया: साल 2016-2026 की अवधि के लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाए और 2022 से सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों के ग्रेच्युटी और पेंशन के बकाये का एकमुश्त भुगतान हो.
- स्थायी रोजगार: वेट-लीज (Wet-lease) पर काम कर रहे अनुबंधित ड्राइवरों को स्थायी कार्यबल में शामिल किया जाए. वर्तमान में 2,700 सक्रिय बसों में से केवल 243 बसें ही बेस्ट के स्वामित्व वाली हैं, बाकी निजी ऑपरेटरों की हैं.
कानूनी कार्रवाई की चेतावनी और यूनियनों में विभाजन
यह हड़ताल कानूनी बाधाओं के बावजूद आगे बढ़ी है। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि मेस्मा (MESMA) के नियमों का उल्लंघन कर हड़ताल पर अड़े रहने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी.
हालांकि, इस आंदोलन में कर्मचारी पूरी तरह एकजुट नहीं हैं. शशांक शरद राव के नेतृत्व वाली सबसे बड़ी व्यक्तिगत यूनियन ने खुद को इस विरोध प्रदर्शन से दूर रखा है. उनका कहना है कि प्रबंधन के साथ उनके स्तर पर बातचीत के रास्ते अभी खुले हैं. दूसरी तरफ, प्रदर्शनकारी नेताओं का आरोप है कि प्रबंधन ने हड़ताल की तय समयसीमा बीतने तक उन्हें बातचीत की मेज पर नहीं बुलाया, जिससे यह गतिरोध पैदा हुआ. फिलहाल पुलिस शहर के सभी 27 डिपो पर निगरानी रख रही है.