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14.6 करोड़ से अधिक महिलाओं की स्तन कैंसर और 9 करोड़ से अधिक महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर की जांच हुई: जे पी नड्डा

देशभर में अब तक 14.6 करोड़ से अधिक महिलाओं की स्तन कैंसर की जांच और 9 करोड़ से ज्यादा महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर की जांच की जा चुकी है. यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने लोकसभा में दी.

14.6 करोड़ से अधिक महिलाओं की स्तन कैंसर और 9 करोड़ से अधिक महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर की जांच हुई: जे पी नड्डा
JP Nadda (img: FB)

नई दिल्ली, 8 फरवरी : देशभर में अब तक 14.6 करोड़ से अधिक महिलाओं की स्तन कैंसर की जांच और 9 करोड़ से ज्यादा महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर की जांच की जा चुकी है. यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने लोकसभा में दी.

उन्होंने बताया कि 57,184 महिलाओं में स्तन कैंसर पाया गया, जिनमें से 50,612 महिलाएं इलाज करा रही हैं. इसी तरह, 96,747 महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की पुष्टि हुई, जिनमें से 86,196 महिलाएं इलाज के अधीन हैं. ये आंकड़े नेशनल नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज (एनसीडी) पोर्टल से लिए गए हैं. सरकार ने 2018 में नेशनल एनसीडी पोर्टल शुरू किया. इस पोर्टल का मकसद स्तन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर जैसी पांच प्रमुख एनसीडी के लिए निरंतर देखभाल सुनिश्चित करना है. यह भी पढ़ें : Saurabh Bhardwaj Lost From Greater Kailash: AAP को एक और बड़ा झटका, दिल्ली सरकार में मंत्री सौरभ भारद्वाज ग्रेटर कैलाश से हारे

इसके अलावा, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने 2010 में 'गैर-संचारी रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम' (एनपी-एनसीडी) भी शुरू किया था. इसका उद्देश्य उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मुंह का कैंसर, स्तन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर जैसे प्रमुख एनसीडी को रोकना और नियंत्रित करना है." इसका उद्देश्य आधारभूत संरचना को मजबूत करना, मानव संसाधन का विकास करना, स्वास्थ्य को प्रमोट करना, बीमारी की जल्द पहचान, प्रबंधन और सही हेल्थकेयर सुविधा में रेफरल है.

नड्डा ने बताया कि प्रोग्राम के तहत, देश भर में 770 जिला एनसीडी क्लीनिक, 233 कार्डियक केयर यूनिट (सीसीयू), 372 जिला डे केयर सेंटर और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 6,410 एनसीडी क्लीनिक स्थापित किए गए हैं. इस बीच, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत एनपी-एनसीडी के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करता है.

आशा कार्यकर्ता 30 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों की सेहत जांच के लिए कम्युनिटी बेस्ड असेसमेंट चेकलिस्ट (सीबीएसी) का इस्तेमाल करती हैं. यदि किसी व्यक्ति में बीमारी की आशंका होती है, तो उसे आगे की जांच और इलाज के लिए भेजा जाता है. नड्डा ने कहा कि एनसीडी के लिए जोखिम की जांच सीबीएसी और उच्च जोखिम व्यक्तियों को कॉमन एनसीडी की स्क्रीनिंग के लिए रेफर किया जाता है. यह एनएचएम के तहत अर्थपूर्ण प्राइमरी हेल्थ केयर का हिस्सा है.

(The above story first appeared on LatestLY on Feb 08, 2025 01:53 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).