मणिपुर हाईकोर्ट ने मैतेई समुदाय के लिए विवादास्पद एसटी दर्जा आदेश के खिलाफ अपील की इजाजत दी
मणिपुर उच्च न्यायालय ने अपने 27 मार्च के विवादास्पद आदेश के खिलाफ अपील की अनुमति दे दी है, जिसमें राज्य सरकार को मैतेई समुदाय के लिए अनुसूचित जाति का दर्जा देने पर विचार करने के लिए केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्रालय को एक सिफारिश भेजने का निर्देश दिया गया था. अदालत के सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी.
इंफाल, 22 अक्टूबर : मणिपुर उच्च न्यायालय ने अपने 27 मार्च के विवादास्पद आदेश के खिलाफ अपील की अनुमति दे दी है, जिसमें राज्य सरकार को मैतेई समुदाय के लिए अनुसूचित जाति का दर्जा देने पर विचार करने के लिए केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्रालय को एक सिफारिश भेजने का निर्देश दिया गया था. अदालत के सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी. उच्च न्यायालय के एक अधिकारी ने कहा कि न्यायमूर्ति अहनथेम बिमोल और न्यायमूर्ति गुणेश्वर शर्मा की खंडपीठ ने अपने शुक्रवार के आदेश में चार आदिवासी निकायों को आदेश के खिलाफ अपील करने की अनुमति देते हुए कहा, "आवेदक द्वारा उठाई गई मुख्य शिकायतें यह हैं कि उन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. अगर उन्हें मैतेई समुदाय को एसटी का दर्जा देने के मामले में अपनी बात कहने या आपत्ति उठाने का मौका नहीं दिया गया तो प्रभावित होंगे."
जनजातीय निकायों में ऑल ट्राइबल स्टूडेंट यूनियन मणिपुर (एटीएसयूएम) और ऑल मणिपुर ट्राइबल यूनियन शामिल हैं. `न्यायमूर्ति एम.वी. मुरलीधरन, जो मणिपुर उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश थे और हाल ही में कलकत्ता उच्च न्यायालय में स्थानांतरित हुए थे, ने मैतेई समुदाय के सदस्यों द्वारा दायर एक याचिका पर आदेश पारित किया था, जिसमें मांग की गई थी कि राज्य सरकार को मैतेई समुदाय को एसटी सूची में शामिल करने का निर्देश दिया जाए. खंडपीठ ने कहा, ''पक्षकारों की ओर से पेश वकील की दलीलों की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए संबंधित रिट अपील और रिट याचिका में उपलब्ध सामग्री के आधार पर जांच और निर्णय लेने की जरूरत है और पक्षकारों द्वारा उठाई गई शिकायतों पर भी विचार किया जाना चाहिए." यह भी पढ़ें : Delhi Air Quality Index: दिल्ली में वायु गुणवत्ता पहुंची सबसे खराब श्रेणी 266 पर, देखें वीडियो
आदिवासी निकायों की ओर से पेश वकील कॉलिन गोंसाल्वेस ने तर्क दिया कि "यदि मैतेई समुदाय को गलत तरीके से एसटी का दर्जा दिया जाएगा, तो इससे रोजगार और शिक्षा में मौजूदा आदिवासी एसटी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जहां एसटी के लिए आरक्षण मौजूद है और मैतेई समुदाय के लोग राजनीतिक, आर्थिक और शैक्षिक रूप से उन्नत माने जाते हैं. ऐसे में ये एसटी आरक्षित सीटों में से अधिकांश पर कब्जा कर लेंगे.'' ३`उत्तरदाताओं की ओर से पेश वकील एम. हेमचंद्र ने कहा कि "मैतेई समुदाय का रिकॉर्ड मैतेई जनजाति के रूप में होने के बावजूद" उन्हें "भारत के संविधान के तहत एसटी सूची की तैयारी के समय छोड़ दिया गया था" और "मैतेई जनजातियों ने पिछले कई वर्षों से संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया है, लेकिन एसटी सूची में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू करने पर विचार करने में विफल रहे हैं."
उच्च न्यायालय ने 27 मार्च को राज्य सरकार को 29 मई तक मैतेई (मीतेई) समुदाय को एसटी सूची में शामिल करने पर विचार करने के लिए केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्रालय को सिफारिश सौंपने का निर्देश दिया था. इससे 3 मई को हजारों आदिवासियों के साथ एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया था. मैतेई समुदाय को एसटी श्रेणी में शामिल करने की मांग का विरोध करने के लिए मणिपुर के सभी दस पहाड़ी जिलों में एटीएसयूएम द्वारा बुलाए गए 'आदिवासी एकजुटता मार्च' में शामिल हुए, जिसके बाद बड़े पैमाने पर हिंसा हुई. मणिपुर पुलिस के अनुसार, 3 मई से शुरू हुए जातीय संघर्ष में अब तक कम से कम 175 लोग मारे गए और 1,108 घायल हुए, जबकि 32 लोग लापता हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Oct 22, 2023 09:09 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

