EPFO का बड़ा फैसला: 15 जुलाई तक खातों में आ जाएगा पीएफ का ब्याज; केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने की घोषणा
ईपीएफओ (Photo Credits: File Image)

नई दिल्ली: देश के करोड़ों नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है. केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री (Union Minister of Labour and Employment) मनसुख मांडविया (Mansukh Mandaviya) ने बुधवार, 8 जुलाई 2026 को घोषणा की है कि कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) खातों में इस साल का वार्षिक ब्याज 15 जुलाई तक क्रेडिट कर दिया जाएगा.  कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के डेटाबेस को आधुनिक बनाने वाले 'केंद्रीकृत आईटी सक्षम सेवा' (CITES) प्रोजेक्ट की समीक्षा के दौरान केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस बार 34 करोड़ सदस्यों के खातों में कुल 1.44 लाख करोड़ रुपये से अधिक की ब्याज राशि ट्रांसफर की जाएगी. गौरतलब है कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने हाल ही में ईपीएफओ के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज द्वारा अनुशंसित 8.25 प्रतिशत की ब्याज दर को मंजूरी दी थी. यह भी पढ़ें: EPF Scheme 2026: क्या अब PF पर मिलेगा 8.25% से ज्यादा ब्याज? जानिए नए EPFO नियमों में क्या बदला और क्या रहेगा पहले जैसा

ऑटो-प्रोसेसिंग प्रणाली से समय की होगी बड़ी बचत

केंद्रीय मंत्री मांडविया ने बताया कि तकनीकी सुधारों के तहत अब एक नई प्रणाली लागू की गई है. इसके तहत ब्याज की गणना और उसे खातों में भेजने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑटो-प्रोसेस्ड (स्वचालित) होगी, जिसके बाद क्षेत्रीय अधिकारी (फील्ड अथॉरिटीज) इसका सत्यापन करेंगे.

श्रम मंत्री ने कहा, "सदस्य 15 जुलाई 2026 तक अपनी पीएफ पासबुक में क्रेडिट हुई ब्याज राशि को देख सकेंगे. इससे पहले, ब्याज दर घोषित होने के बाद भी कर्मचारियों के खातों में पैसा आने में अमूमन अक्टूबर या नवंबर तक का समय लग जाता था, लेकिन नई व्यवस्था से इसमें महीनों की बचत होगी."

सीआईटीईएस (CITES) प्रोजेक्ट से आसान हुआ काम

ईपीएफओ के कामकाज में पारदर्शिता और तेजी लाने के लिए पूरे देश के मेंबर रिकॉर्ड्स को एक नए केंद्रीकृत डेटाबेस (सेंट्रलाइज्ड डेटाबेस) पर माइग्रेट (स्थानांतरित) कर दिया गया है. इस तकनीकी अपग्रेडेशन के बाद अब किसी भी पीएफ सदस्य के सर्विस रिक्वेस्ट या क्लेम को देश के किसी भी अधिकृत ईपीएफओ कार्यालय से प्रोसेस किया जा सकेगा. इसके लिए सदस्य का उसी विशेष क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकार क्षेत्र में होना जरूरी नहीं रह गया है.

क्लेम रिजेक्शन में आएगी भारी कमी

सत्र के दौरान मंत्री ने स्पष्ट किया कि अब भविष्य निधि से जुड़े सभी दावों (क्लेम्स) की ईपीएफओ कार्यालयों में प्रोसेसिंग से पहले एक ऑटोमेटेड प्री-वैलिडेशन (स्वचालित पूर्व-सत्यापन) जांच होगी.

इस व्यवस्था के निम्नलिखित फायदे होंगे:

  • कमियों की तुरंत पहचान: फॉर्म या विवरण में किसी भी प्रकार की विसंगति या कमी होने पर उसकी पहचान शुरुआत में ही हो जाएगी.
  • तत्काल मार्गदर्शन: कमी मिलने पर सदस्यों को उसे सुधारने के लिए तुरंत ऑनलाइन गाइडेंस दिया जाएगा.
  • रिजेक्शन रेट में कमी: इस शुरुआती सुधार से दावों के खारिज (रिजेक्ट) होने की दर में भारी कमी आएगी और पहली बार में ही क्लेम पास होने की संभावना बढ़ जाएगी.

इसके अलावा, सदस्य अब यह भी जान सकेंगे कि वे विभिन्न श्रेणियों के तहत अपने खाते से कितनी अधिकतम राशि निकालने (विड्रॉल) के पात्र हैं.

पीएफ निकालने के नियम हुए बेहद सरल

अंशधारकों की सुविधा के लिए ईपीएफओ ने आंशिक निकासी (पार्शियल विड्रॉल) के जटिल नियमों को सरल बनाते हुए केवल तीन स्पष्ट श्रेणियों में विभाजित कर दिया है. ये श्रेणियां हैं:

  1. आवश्यक जरूरतें: जैसे गंभीर बीमारी का इलाज, उच्च शिक्षा और विवाह.
  2. आवास की आवश्यकताएं: घर खरीदने या निर्माण कार्य के लिए.
  3. विशेष परिस्थितियां: अन्य आपातकालीन स्थितियां.

इन आसान श्रेणियों के तहत अब पीएफ खाताधारक अपनी कुल जमा राशि (टोटल पीएफ बैलेंस) का 75 प्रतिशत तक हिस्सा एडवांस के रूप में निकाल सकेंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया बेहद सुगम और पारदर्शी हो जाएगी.