चंदौली में प्राचीन काली मंदिर के ध्वस्तीकरण के दौरान बड़ा हादसा: भारी लापरवाही के बीच गुंबद गिरने से PWD मजदूर की मौत, कई घायल

उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के मुगलसराय में जीटी रोड चौड़ीकरण के दौरान एक प्राचीन काली मंदिर को ढाहे जाने के समय गंभीर हादसा हो गया. सुरक्षा घेरा न बनाए जाने के कारण मंदिर का भारी-भरकम गुंबद अचानक ढहकर सड़क की तरफ गिर गया, जिसकी चपेट में आने से लोक निर्माण विभाग के 58 वर्षीय मजदूर बलदेव यादव की मौके पर ही मौत हो गई और कई अन्य लोग घायल हो गए.

यूपी में मंदिर गिराए जाने के दौरान PWD कर्मचारी की मौत (Photo Credits: X\@benarasiyaa)

चंदौली/मुगलसराय: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के चंदौली जिले (Chandauli District) के मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र से सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही का एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है. यहां जीटी रोड (GT Road) चौड़ीकरण परियोजना के तहत एक प्राचीन मां काली मंदिर (Maa Kali Mandir) के ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) के दौरान शनिवार, 11 जुलाई 2026 को बड़ा हादसा हो गया. निर्माण कार्य में लगी जेसीबी और फोकलेन मशीनों द्वारा जब मंदिर की संरचना को तोड़ा जा रहा था, तभी मंदिर का मुख्य गुंबद अचानक भरभराकर व्यस्त सड़क की तरफ गिर गया। इस भारी मलबे की चपेट में आने से वहां तैनात लोक निर्माण विभाग (PWD) के एक 58 वर्षीय मजदूर की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई राहगीर और अन्य लोग मलबे का शिकार होकर गंभीर रूप से घायल हो गए. यह भी पढ़ें: सीएम योगी का विपक्ष पर तीखा हमला: अयोध्या में बोले- 'क्या जामा मस्जिद के अंदर हनुमान चालीसा का पाठ हो सकता है?'

सुरक्षा घेरे के बिना चल रहा था ध्वस्तीकरण; मलबे में दबे मजदूर

हादसे में जान गंवाने वाले पीडब्ल्यूडी (PWD) के संविदा कर्मचारी की पहचान 58 वर्षीय बलदेव यादव के रूप में हुई है, जो विध्वंस अभियान के दौरान कार्यस्थल पर ही ड्यूटी पर तैनात थे. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पंडित दीनदयाल उपाध्याय (पीडीडीयू) नगर में रेलवे जंक्शन के वीआईपी गेट के समीप स्थित यह मां काली मंदिर लगभग दो सौ वर्ष पुराना था और राष्ट्रीय राजमार्ग के विस्तार के लिए इसे हटाया जाना अनिवार्य था.

शनिवार सुबह जब भारी मशीनरी से मंदिर के ऊपरी हिस्से को ढहाया जा रहा था, तब तकनीकी एहतियात और सुरक्षा मानकों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया. जैसे ही मशीनों ने धक्का दिया, मंदिर का भारी गुंबद अनियंत्रित होकर उस स्थान पर जा गिरा जहां कर्मचारी और राहगीर खड़े थे. बलदेव यादव सीधे तौर पर मलबे के नीचे पूरी तरह दब गए और गंभीर चोटों के कारण उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया.

यूपी में मंदिर गिराने के दौरान PWD कर्मचारी की मौत

बैरिकेडिंग की कमी पर फूटा स्थानीय लोगों का गुस्सा; कई अस्पताल में भर्ती

शुरुआती जांच और मौके पर मौजूद लोगों के बयानों से साफ हुआ है कि निर्माण एजेंसी और लोक निर्माण विभाग ने इतने बड़े और संवेदनशील ढांचे को गिराने से पहले पूरे प्रभावित क्षेत्र को उचित रूप से बैरिकेड (Cordoned off) नहीं किया था. सुरक्षा घेरा न होने के कारण राहगीर, स्थानीय दुकानदार और खुद मजदूर मलबे के बेहद करीब बने रहे, जो इस जानलेवा दुर्घटना का मुख्य कारण बना.

गुंबद गिरने से वहां मौजूद कई अन्य लोग भी छिटके मलबे और पत्थरों की चपेट में आकर घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने काफी मशक्कत के बाद मलबे को हटाकर बलदेव यादव और अन्य घायलों को बाहर निकाला. सभी घायलों को तुरंत नजदीकी जिला अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा है. हालांकि, प्रशासन द्वारा घायलों की सटीक संख्या और उनकी वर्तमान क्लिनिकल स्थिति की आधिकारिक घोषणा की जानी अभी बाकी है.

प्रशासन ने दिए जांच के आदेश; निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल

यह प्राचीन काली मंदिर स्थानीय निवासियों के बीच गहरी आस्था का केंद्र माना जाता था. चौड़ीकरण की आवश्यकता से लोग सहमत थे, लेकिन इस तरह बिना सुरक्षा मानकों के किए गए काम और एक बेकसूर मजदूर की मौत के बाद पूरे मुगलसराय इलाके में माहौल गमगीन और तनावपूर्ण हो गया है. घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया.

प्रशासन ने इस पूरे घटनाक्रम और जानलेवा चूक की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं. जांच दल इस बात की गहन समीक्षा करेगा कि क्या ध्वस्तीकरण के अनिवार्य प्रोटोकॉल का पालन किया गया था और इस बड़ी लापरवाही के लिए लोक निर्माण विभाग या निजी निर्माण एजेंसी के कौन से अधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं. अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ आपराधिक लापरवाही का मुकदमा दर्ज कर सख्त विधिक कार्रवाई की जाएगी.

Share Now