Maharashtra Politics: 'सोते समय हमारे सिर पर पत्थर मार दिया', सचिन अहिर के पाला बदलने पर भड़के संजय राउत; आत्ममंथन की वकालत की
उद्धव ठाकरे गुट के सांसद संजय राउत ने विधायक और पार्टी के उपनेता सचिन अहिर के पाला बदलकर शिंदे गुट में शामिल होने पर तीखा हमला बोला है. राउत ने इस कदम को पीठ में छुरा घोंपने जैसा बताया.
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. शिवसेना (Shiv Sena UBT) के विधायक और प्रमुख नेता सचिन अहिर (Sachin Ahir) के पाला बदलकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के नेतृत्व वाले गुट में शामिल होने पर पार्टी सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) ने तीखा हमला बोला है. बुधवार, 1 जुलाई 2026 को मीडिया से बात करते हुए राउत ने कहा कि अहिर ने उन्हें पूरी तरह अंधेरे में रखा और यह कदम वैसा ही है जैसे किसी ने सोते समय हमारे सिर पर पत्थर मार दिया हो. यह भी पढ़ें: Sachin Ahir Joins Shinde Sena: उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका, शिवसेना UBT के MLC सचिन अहिर शिंदे गुट में शामिल, उपसभापति पद के लिए भरा नामांकन; VIDEO
"यह राजनीतिक यात्रा नहीं, कलंकित इतिहास है"
संजय राउत ने सचिन अहिर पर लालच में आकर पार्टी छोड़ने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "भले ही आप इसे अपनी राजनीतिक यात्रा कहें, लेकिन इतिहास इसे एक कलंकित यात्रा के रूप में ही याद रखेगा. जब पार्टी ने आपको सब कुछ दिया, उसके बाद भी आप छोड़कर जा रहे हैं, तो इसका मतलब है कि राजनीतिक लालच आपको खत्म कर रहा है. राज्य में एक तरह का पतन और गिरावट चल रही है."
राऊत ने आगे कहा कि आज के दौर में ऐसे वफादार पार्टी कार्यकर्ता दुर्लभ हो गए हैं, जो हर अच्छे-बुरे समय में संगठन के साथ मजबूती से खड़े रहें. बता दें कि सचिन अहिर ने शिंदे गुट में शामिल होकर महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया है.
आदित्य ठाकरे ने संवारा था राजनीतिक भविष्य
अहिर के पुराने राजनीतिक सफर को याद दिलाते हुए राउत ने संवाददाताओं से कहा कि सुनील शिंदे से चुनाव हारने के बाद सचिन अहिर का करियर रुक सा गया था. इसके बाद आदित्य ठाकरे ने उन्हें विधान परिषद सदस्य (MLC) बनाकर, पार्टी का उपनेता नियुक्त कर और भारतीय कामगार सेना का कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर उनका राजनीतिक भविष्य फिर से संवारा. उन्हें पुणे जिले की पूरी जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी.
राउत ने दावा किया, "सचिन अहिर, आदित्य ठाकरे के बेहद करीबी सहयोगी थे. वह यह शिकायत कभी नहीं कर सकते कि उनसे कोई मिलता नहीं था या उनकी बात नहीं सुनी जाती थी, क्योंकि आदित्य ठाकरे और उद्धव साहब उनसे रोजाना मुलाकात करते थे."
रावण की हंसी से की एकनाथ शिंदे की तुलना
पार्टी की इस मौजूदा स्थिति और लगातार लग रहे झटकों पर बात करते हुए राउत ने खुलकर स्वीकार किया, "हमारे राजनीतिक भविष्य के लिए, हम सभी को आत्ममंथन (Introspection) करने की बेहद जरूरत है." उन्होंने याद दिलाया कि अहिर ने इससे पहले अपने करियर के लिए एनसीपी प्रमुख शरद पवार को भी इसी तरह मझधार में छोड़ा था.
राउत ने कहा, "पवार साहब ने उन्हें फर्श से उठाकर अर्श पर पहुंचाया, म्हाडा (MHADA) का प्रमुख बनाया, सालों तक मंत्री रखा और मुंबई एनसीपी का अध्यक्ष बनाया. फिर भी वह शरद पवार को छोड़कर शिवसेना में आ गए थे. जो शरद पवार के प्रति वफादार नहीं रह सका, वह हमारे प्रति क्या वफादार रहता."
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर तंज कसते हुए राउत ने अंत में कहा, "जब कोई सब कुछ मिलने के बाद भी बगावत करता है, तो एकनाथ शिंदे की हंसी रावण जैसी दुष्टता से भरी दिखाई देती है." उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पार्टी से अलग होने वाले 6 सांसदों में से 5 मूल रूप से कांग्रेस पृष्ठभूमि के थे.