Maharashtra Politics: क्या शरद पवार की पार्टी में होने वाली है बड़ी बगावत? NCP (SP) के 5 सांसदों के NDA में जाने की अटकलें तेज
शरद पवार (Photo Credits: File Image)

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति (Maharashtra Politics) में उथल-पुथल का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है. शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के पाला बदलने के बाद अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) (शरदचंद्र पवार) में भी संभावित विभाजन को लेकर कयासबाजी तेज हो गई है. हालिया राजनीतिक गलियारों की रिपोर्टों के अनुसार, शरद पवार गुट के 8 लोकसभा सांसदों में से 5 सांसद भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने पर विचार कर रहे हैं. इन चर्चाओं ने राज्य के सियासी समीकरणों को गरमा दिया है और आगामी विधानसभा चुनावों से पहले दिग्गज नेता शरद पवार के संसदीय गुट को एकजुट रखने की क्षमताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (UBT) में हालिया फेरबदल के बाद अब सभी की नजरें एनसीपी (SP) पर टिकी हैं. यह भी पढ़ें: 'ऑपरेशन टाइगर' पर शिवसेना (UBT) का महायुति पर तीखा हमला: कहा-'किसानों के लिए पैसे नहीं, विधायकों को खरीदने के लिए असीमित फंड'

सुनेत्रा पवार और अमित शाह की मुलाकात से बढ़ी हलचल

राजनीतिक हलकों में इन अटकलों को तब और बल मिला जब अजीत पवार गुट की नेता सुनेत्रा पवार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच एक हालिया बैठक की खबरें सामने आईं. हालांकि इस बैठक को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है और न ही इसे सीधे किसी दलबदल से जोड़ा गया है, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति के मौजूदा मिजाज को देखते हुए विश्लेषक इसे बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं. पूर्व में पार्टी में हुए विभाजनों को झेल चुके शरद पवार के लिए यह नई चुनौती उनके राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक कद को प्रभावित कर सकती है.

संसद में दो-तिहाई बहुमत की जुगत में NDA

विशेषज्ञों का मानना है कि सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन संसद में अपनी संख्याबल को और मजबूत करने की रणनीतियों पर काम कर रहा है. सूत्रों के अनुसार, गठबंधन का लक्ष्य संसद में दो-तिहाई (Two-Thirds) बहुमत हासिल करना है, जो उसे समान नागरिक संहिता (UCC) और परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) जैसे बड़े विधायी और संवैधानिक सुधारों को बिना किसी गतिरोध के पारित कराने में मदद कर सके. हालांकि, इन कथित दलबदलों को लेकर अभी तक किसी भी सांसद की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या घोषणा नहीं की गई है.

बगावत रोकने के लिए शरद पवार ने बुलाई आपात बैठक

पार्टी के भीतर किसी भी संभावित टूट को रोकने और 'ऑपरेशन टाइगर' (विपक्ष द्वारा दलबदल के प्रयासों को दिया गया नाम) का मुकाबला करने के लिए शरद पवार ने कमान संभाल ली है. उन्होंने 19 जून को वरिष्ठ पार्टी नेताओं की एक आपात बैठक बुलाई थी, जिसमें संसदीय गुट को पूरी तरह एकजुट रखने की रणनीति पर चर्चा हुई.

इसके साथ ही, मुंबई में 24 जून 2026 को होने वाली महा विकास अघाड़ी (MVA) के विधायकों की बैठक में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठने की संभावना है, जहां तीनों सहयोगी दल मिलकर इन अफवाहों और राजनीतिक घेरेबंदी का मुकाबला करने के लिए एक साझा रणनीति तैयार करेंगे.

कांग्रेस के साथ रणनीतिक विलय की भी चर्चा

इन सब के बीच, विपक्ष को बिखरने से बचाने के लिए एक और समानांतर चर्चा ने जोर पकड़ा है.  रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस के शीर्ष नेता महाराष्ट्र में विपक्षी ब्लॉक को मजबूत करने के लिए एनसीपी (SP) के साथ एक रणनीतिक विलय (Merger) की संभावनाओं को तलाश रहे हैं. इस विचार का उद्देश्य भाजपा विरोधी ताकतों के वोटों के बिखराव को रोकना है. हालांकि, इस पर भी अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है.

इसी सिलसिले में शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने भी शरद पवार से अपील की है कि वे कांग्रेस की मूल विचारधारा से निकले सभी क्षेत्रीय दलों को एक मंच पर लाने की पहल करें. राज्यसभा सांसद राउत ने कहा कि यदि कांग्रेस की विचारधारा से जुड़े नेता एक साथ आते हैं, तो यह वर्तमान सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी. आने वाले कुछ सप्ताह शरद पवार और महाराष्ट्र की भविष्य की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं.