Maharashtra: वंदे मातरम के आह्वान पर राजनीतिक विवाद की चिंगारी
महाराष्ट्र सरकार के प्रस्ताव (जीआर) में राज्य के सभी कर्मचारियों को 'हैलो' के बजाय 'वंदे मातरम' बोलने का निर्देश दिया गया है. जिसके बाद रविवार को इस पर सियासी घमासान शुरू हो गया. आजादी का अमृत महोत्सव के रूप में, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 153 वीं जयंती के अवसर पर ये आदेश जारी किया गया है.
मुंबई, 3 अक्टूबर : महाराष्ट्र सरकार के प्रस्ताव (जीआर) में राज्य के सभी कर्मचारियों को 'हैलो' के बजाय 'वंदे मातरम' बोलने का निर्देश दिया गया है. जिसके बाद रविवार को इस पर सियासी घमासान शुरू हो गया. आजादी का अमृत महोत्सव के रूप में, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 153 वीं जयंती के अवसर पर ये आदेश जारी किया गया है. हालांकि अगस्त में ही इसकी तैयारी की गई थी. मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अध्यक्षता में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा अध्यादेश (जीआर) जारी किया गया. जो सरकारी, अर्ध-सरकारी, स्थानीय नागरिक निकायों, सहायता प्राप्त स्कूलों, कॉलेजों और अन्य संस्थानों के कर्मचारियों पर लागू होता है. सभी कर्मचारियों को 'वंदे मातरम' के साथ फोन कॉल का जवाब देने और कर्मचारियों को संबोधित करने, नागरिकों से बात करने या सार्वजनिक घोषणा करने के लिए 'हैलो' के बजाय 'वंदे मातरम' अनिवार्य है.
इसके लिए अभियान औपचारिक रूप से वर्धा में उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और सांस्कृतिक मामलों के मंत्री सुधीर मुनगंटीवार द्वारा शुरू किया गया था. मीडिया के सवालों के जवाब में, मुनगंटीवार ने कहा, यह गांधी जयंती के अवसर पर शुरू किया गया एक अभियान है. वास्तव में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा लिखित 'जन गण मन' राष्ट्रगान है और बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा लिखित 'वंदे मातरम' राष्ट्रीय गीत है. फडणवीस ने कहा, वंदे मातरम के नारे ने हमारे स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई..शहीद भगत सिंह के अंतिम शब्द 'वंदे मातरम' थे. हमें इसे फिर से अपनी दिनचर्या में वापस लाना होगा..आज से, हम शुरू करते हैं 'वंदे मातरम' संचलन. यह भी पढ़ें : UP: SIT करेगी भदोही दुर्गा पंडाल अग्निकांड की जांच, हादसे में दो बच्चों समेत 3 की मौत, 64 झुलसे
हालांकि, कई राजनीतिक दलों ने इस फैसले का विरोध शुरु कर दिया. विपक्ष महा विकास अघाड़ी ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी. महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अबू आसिम आजमी ने कहा कि यह कदम स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने कहा, हम 'सारे जहां से अच्छा' की बधाई देना चाहते हैं न कि 'वंदे मातरम' की. मुसलमान 'वंदे मातरम' नहीं बोल सकते क्योंकि यह उनकी आस्था के खिलाफ है. आजमी ने यह जानने की भी मांग की कि क्या शिंदे ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दबाव में 'जय महाराष्ट्र' को त्यागकर 'वंदे मातरम' अपनाया था. मैं बालासाहेब ठाकरे से कई बार मिला था.. वह हमेशा 'जय महाराष्ट्र' कहते थे और शिव सैनिक उसी के साथ जवाब देते थे.
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि वह 'वंदे मातरम' अभिवादन के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन किसानों के निर्माण को ध्यान में रखते हुए, कांग्रेस 'जय किसान' या 'राम राम' को प्राथमिकता देगी. शिवसेना के राष्ट्रीय प्रवक्ता और किसान नेता किशोर तिवारी ने कहा, वंदे मातरम कहना एक स्वागत योग्य है. लेकिन किसानों का सम्मान करने के लिए 'जय किसान' कहने और भ्रष्टाचार मुक्त सरकार 'जय सेवा' कहने का अभियान होना चाहिए.
एनसीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रैस्टो का मानना है कि 'वंदे मातरम' भारतीयों में गर्व की भावना और देशभक्ति की भावना का अह्वान करता है. लेकिन लोगों को ऐसा कहने के लिए मजबूर करना सही नहीं है. यह उनके बोलने की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है और लोगों पर एक विशेष मानसिकता भी थोपना है, उन्हें गर्व के साथ वंदे मातरम कहने दें, उन्हें ऐसा कहने के लिए मजबूर न करें. मुंबई कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष चरण सिंह सपरा ने कहा, यह चिंता के प्रमुख मुद्दों..महंगाई, बेरोजगारी, रुपये की गिरावट से ध्यान हटाने की एक और चाल है. यह भी ध्रुवीकरण की कोशिश है! गांधी जयंती पर बापू के आदशरें के बिल्कुल विपरीत है.
(The above story first appeared on LatestLY on Oct 03, 2022 08:45 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

