Madras High Court: मद्रास हाईकोर्ट ने छात्राओं पर जानलेवा हमले के मामले में उम्रकैद की सजा रखी बरकरार, कोर्ट में मुकरने वाले छात्रों को कहा 'कागजी शेर'

मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने क्लासरूम के भीतर एक महिला इंजीनियरिंग छात्रा की बेरहमी से हत्या करने वाले दोषी उदयकुमार की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है. इसके साथ ही अदालत ने मामले के चश्मदीद छात्रों के कोर्ट में मुकर जाने (होस्टाइल होने) पर गहरी नाराजगी जताते हुए उन्हें वास्तविक जीवन में 'कागजी शेर' (Paper Tigers) करार दिया.

मद्रास हाईकोर्ट (Photo Credits: File Image)

मदुरै/चेन्नई, 16 जून: मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) की मदुरै बेंच (Madurai Bench) ने एक कॉलेज क्लासरूम के भीतर छात्रा की बेरहमी से हत्या करने के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने दोषी युवक की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए उसकी अपील खारिज कर दी है. यह मामला एक इंजीनियरिंग छात्रा द्वारा रिश्ते को आगे बढ़ाने से इनकार करने के बाद की गई हत्या से जुड़ा है. जस्टिस एन. आनंद वेंकटेश (N. Anand Venkatesh) और जस्टिस के. के. रामकृष्णन (K. K. Ramakrishnan) की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान समाज में रिजेक्शन (अस्वीकार्यता) को न संभाल पाने वाले युवाओं की हिंसक मानसिकता और गवाही से मुकरने वाले सहपाठियों के रवैये पर बेहद तीखी टिप्पणियां कीं. यह भी पढ़ें: Supreme Court Verdict: पति का पत्नी से 13 दिन बात न करना 'क्रूरता' नहीं; सुप्रीम कोर्ट ने आत्महत्या मामले में पति को किया बरी

रिजेक्शन के बाद हिंसा की बढ़ती प्रवृत्ति पर कोर्ट की चिंता

दोषी उदयकुमार की अपील को खारिज करते हुए उच्च न्यायालय ने समाज में युवाओं के व्यवहार में आ रहे खतरनाक बदलावों को रेखांकित किया. खंडपीठ ने कहा, "यह एक दुर्भाग्यपूर्ण मामला है जहां एक छात्रा ने कुछ कारणों से आरोपी से दूरी बनाने का फैसला किया, लेकिन आरोपी लड़की के इस रवैये को बर्दाश्त नहीं कर पाया."

अदालत ने आगे कहा, "हाल के दिनों में यह एक चलन बन गया है जहां किसी रिश्ते में रिजेक्ट होने के बाद लड़का यह सोचने लगता है कि लड़की उसके साथ रिश्ता जारी रखने के लिए बाध्य है. अगर वह ऐसा नहीं करती, तो लड़का उसे जान से मारना भी जायज समझने लगता है."

क्लासरूम के भीतर हुआ था जानलेवा हमला

अभियोजन पक्ष के अनुसार, करूर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में सिविल इंजीनियरिंग की तीसरी वर्ष की छात्रा सोनाली और आरोपी उदयकुमार के बीच पहले जान-पहचान थी. हालांकि, बाद में सोनाली ने उससे दूरी बना ली, जिससे उदयकुमार आक्रोशित हो गया. 30 अगस्त 2016 को सुबह करीब 10:30 बजे, उदयकुमार जबरन सोनाली के क्लासरूम में घुस गया. उसने लकड़ी के एक मोटे डंडे (लॉग) से सोनाली के सिर पर ताबड़तोड़ वार किए. बीच-बचाव करने आए एक असिस्टेंट प्रोफेसर पर भी आरोपी ने हमला कर उन्हें घायल कर दिया था. सिर पर गंभीर चोट लगने के कारण सोनाली ने मदुरै के अपोलो अस्पताल में दम तोड़ दिया था. करूर की एक निचली अदालत ने पूर्व में उदयकुमार को हत्या (IPC की धारा 302) समेत अन्य धाराओं में उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

पुलिस जांच की कमियों पर अदालत की फटकार

अपील की समीक्षा करते हुए उच्च न्यायालय ने स्थानीय पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और जांच के स्तर पर कड़ी नाराजगी जताई. अदालत ने बताया कि गवाहों के अनुसार हमलावर ने हथियार (लकड़ी का डंडा) क्लासरूम में ही छोड़ दिया था, जबकि जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में कहानी बनाई कि डंडे को बाहर झाड़ियों से बरामद किया गया था.

पीठ ने तीखे शब्दों में कहा, "हमेशा की तरह जांच अधिकारी, जिसे शायद जांच करने का बुनियादी ज्ञान भी नहीं है, यांत्रिक रूप से हथियार बरामदगी का एक मनगढ़ंत सिद्धांत लेकर सामने आ गया." हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस की इस लापरवाही से अभियोजन का पूरा मामला खारिज नहीं होता, क्योंकि घायल असिस्टेंट प्रोफेसर की गवाही और मेडिकल साक्ष्य आरोपी को दोषी ठहराने के लिए पूरी तरह पुख्ता हैं.

गवाही से मुकरने वाले छात्रों को कहा 'कागजी शेर'

खंडपीठ ने अपने फैसले का समापन मृतका के सहपाठियों (क्लासमेट्स) के रवैये पर गहरी निराशा व्यक्त करते हुए किया. दिनदहाड़े अपनी सहपाठी पर हुए इस क्रूर हमले को देखने के बावजूद, मुकदमे की सुनवाई के दौरान कई छात्र अदालत में अपनी गवाही से मुकर गए थे.

डिजिटल एक्टिविज्म की आलोचना करते हुए कोर्ट ने कहा, "सोशल मीडिया पर केवल असहमति और विचार व्यक्त करने का कोई फायदा नहीं है, जब तक कि इसे वास्तविक जीवन में कार्रवाई में न बदला जाए. अन्यथा, छात्र असल जिंदगी में सिर्फ 'कागजी शेर' (Paper Tigers) बनकर रह जाएंगे।" पीठ ने दुखी मन से कहा कि सच्चाई का साथ न देकर इन छात्रों ने अपनी मृत सहपाठी और नागरिक कर्तव्यों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को नहीं निभाया.

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