Supreme Court Verdict: पति का पत्नी से 13 दिन बात न करना 'क्रूरता' नहीं; सुप्रीम कोर्ट ने आत्महत्या मामले में पति को किया बरी
देश की सर्वोच्च अदालत ने वैवाहिक जीवन और कानूनी मानकों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने एक व्यक्ति को अपनी पत्नी को क्रूरता का शिकार बनाने के आरोपों से बरी करते हुए कहा कि वैवाहिक जीवन में मतभेद होना एक आम बात है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल कुछ दिनों तक पत्नी से बातचीत न करने के आधार पर किसी पति को आईपीसी की धारा 498A के तहत क्रूरता का दोषी नहीं ठहराया जा सकता.
- Read in
- English
नई दिल्ली, 5 जून: देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने वैवाहिक संबंधों और आपराधिक दायित्वों को लेकर एक बेहद दूरगामी और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला की आत्महत्या (Suicide)के मामले में उसके पति को बरी करते हुए टिप्पणी की है कि वैवाहिक जीवन में आपसी मतभेद और अनबन होना स्वाभाविक हिस्सा है. अदालत ने स्पष्ट किया कि महज कुछ दिनों तक पत्नी से बातचीत न करने के आधार पर किसी पति को अपनी पत्नी के प्रति क्रूरता (Cruelty) बरतने का दोषी नहीं माना जा सकता. जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर (Justice J.K. Maheshwari and Justice Atul S. Chandurkar) की पीठ ने निचली अदालत द्वारा उस व्यक्ति को सुनाई गई तीन साल की जेल की सजा को पूरी तरह रद्द कर दिया है. यह भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अपनी मर्जी से सेक्स वर्क करने वाले वयस्कों पर पुलिस नहीं कर सकती कार्रवाई, 'जबरन पुनर्वास' पर भी लगाई रोक
'सिर्फ बातचीत न करना क्रूरता के दायरे में नहीं': सुप्रीम कोर्ट
इस मामले में निचली अदालत ने आरोपी पति को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A (विवाहित महिला के प्रति क्रूरता) के तहत तीन साल के कारावास की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में मद्रास हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा था. अभियोजन पक्ष का दावा था कि पति द्वारा लगातार 13 दिनों तक फोन पर बातचीत न किए जाने के कारण महिला गहरे मानसिक तनाव में आ गई थी, जिसके चलते उसने आत्मघाती कदम उठा लिया.
मामले की विस्तृत समीक्षा करते हुए शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा, "ठोस और पुख्ता सबूतों के अभाव में, मृतका के साथ केवल 13 दिनों तक बातचीत न होना, किसी भी तरह से क्रूरता के कानूनी दायरे में नहीं आता." पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है जो यह साबित करे कि घटना से ठीक पहले पति-पत्नी के बीच कोई गंभीर झगड़ा या विवाद हुआ था.
दहेज उत्पीड़न और प्रताड़ना के थे आरोप
अभियोजन पक्ष की कहानी के अनुसार, मृतका ने अपने मायके में फांसी लगाकर आत्महत्या की थी. महिला के माता-पिता का आरोप था कि विवाह के समय उन्होंने आरोपी को ₹3 लाख नकद, 20 तोला सोने के आभूषण और अन्य कीमती सामान उपहार स्वरूप दिए थे.
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया था कि विवाह के बाद पति और उसके ससुराल वाले लगातार अतिरिक्त दहेज की मांग कर रहे थे. महिला को बिना बताए मायके जाने पर प्रताड़ित किया जाता था। इसके अतिरिक्त, जब पति ने मस्कट (Muscat) जाने के बाद उससे फोन पर बात करना बंद कर दिया, तो वह मानसिक रूप से टूट गई. इन आरोपों के आधार पर पति, उसके माता-पिता और दो भाइयों के खिलाफ धारा 498A और 304B (दहेज मृत्यु) के तहत मामला दर्ज किया गया था.
अदालत ने समझाया सबूतों का कानूनी पैमाना
सु्रीम कोर्ट ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि वैवाहिक विवादों में आपराधिक मामला तय करते समय अदालतों को यह बारीकी से देखना चाहिए कि क्या पति का व्यवहार वाकई इतना गंभीर था जो किसी महिला को आत्महत्या के लिए मजबूर कर दे या उसके मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर खतरा पैदा करे.
अदालत ने कानूनी सिद्धांत को दोहराते हुए कहा कि किसी भी आपराधिक मामले में आरोपों को 'संदेह से परे' (Beyond Reasonable Doubt) साबित करने की पूरी जिम्मेदारी अभियोजन पक्ष की होती है, और आरोपी के लिए यह अनिवार्य नहीं है कि वह स्वयं को निर्दोष साबित करने के लिए साक्ष्य प्रस्तुत करे.
पासपोर्ट और वीजा की देरी का भी था मामला
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों के रिकॉर्ड में यह बात पहले से दर्ज थी कि महिला अपने पासपोर्ट और वीजा औपचारिकताओं (Visa Formalities) में हो रही देरी के कारण अपने पति के साथ विदेश (मस्कट) की यात्रा नहीं कर सकी थी.
सुप्रीम कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि इस तकनीकी दूरी और आपसी बातचीत के अभाव को बिना किसी अन्य ठोस साक्ष्य के उत्पीड़न या क्रूरता का रूप नहीं दिया जा सकता. इस ऐतिहासिक फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों में धारा 498A के दुरुपयोग को रोकने और साक्ष्यों की सत्यता को परखने के लिए एक स्पष्ट कानूनी मार्गदर्शिका स्थापित कर दी है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 05, 2026 02:34 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

