लातूर (महाराष्ट्र) में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां एक सरकारी डॉक्टर ने कोरोना महामारी के दौरान एक मरीज को मारने की बात कही थी. इस घटना का ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है.
यह मामला 2021 का है, जब कोरोना महामारी अपने चरम पर थी. उस वक्त डॉ. शशिकांत देशपांडे लातूर के उदगीर सरकारी अस्पताल में अतिरिक्त सर्जन के पद पर तैनात थे और डॉ. शशिकांत डांगे एक कोविड केयर सेंटर में मरीजों का इलाज कर रहे थे.
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता अजीमद्दीन गौसद्दीन ने बताया कि अप्रैल 2021 में उनकी पत्नी कौसर फातिमा कोरोना संक्रमित हो गई थीं. उन्हें उदगीर के कोविड सेंटर में भर्ती किया गया था. इलाज के सातवें दिन जब वह डॉक्टर डांगे के पास बैठे थे, तभी डॉक्टर डांगे को डॉक्टर देशपांडे का फोन आया. डांगे ने फोन को स्पीकर पर रख दिया और बातचीत चालू रही.
इस बातचीत में डॉक्टर देशपांडे ने कहा – "कोई अंदर न जाए, उस 'दयामी' औरत को मार दो." जवाब में डॉक्टर डांगे ने कहा कि ऑक्सीजन पहले ही कम कर दी गई है. इस बातचीत के दौरान कथित तौर पर एक जातिगत टिप्पणी भी की गई थी.
बच गई महिला की जान
शुक्र है कि कौसर फातिमा की जान बच गई और कुछ दिनों के इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई. लेकिन यह मामला दोबारा तब सुर्खियों में आया जब 2 मई 2025 को यह ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.
धार्मिक भावनाएं आहत, पुलिस में शिकायत
ऑडियो सुनने के बाद शिकायतकर्ता ने कहा कि उनकी धार्मिक भावनाएं और आत्मसम्मान दोनों को गहरी ठेस पहुंची है, खासकर जब उन्होंने उसमें जाति को लेकर की गई अपमानजनक टिप्पणी दोबारा सुनी. इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.
क्या कर रही है पुलिस?
उदगीर शहर पुलिस ने डॉक्टर देशपांडे के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. उन पर जानबूझकर धार्मिक भावनाएं भड़काने और जातिगत टिप्पणी करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं. पुलिस ने उनका बयान दर्ज कर लिया है और उनका मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया है. इंस्पेक्टर दिलीप गाडे के मुताबिक, देशपांडे फिलहाल जिले से बाहर हैं और उनके लौटने के बाद जांच और आगे बढ़ेगी.













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