Kanpur CO Controversial Video: कानपुर देहात के सीओ का वीडियो, 'जनता को बवाल करने दो, तुम सिर्फ दूर से देखो' बयान पर मचा बवाल; विरोध शुरू

वायरल वीडियो में अधिकारी केवल बवाल देखने की बात ही नहीं कर रहे, बल्कि वे अपने मातहतों को विभागीय जांच से बचाने का भरोसा भी दे रहे हैं. उन्हें वीडियो में आगे यह कहते सुना जा सकता है, "अमुल वाले जांच में बचाया था, आगे भी बचा लूंगा.

(Photo Credits Twitter)

 Kanpur CO Controversial Video:  उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले में तैनात एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का विवादित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है. वायरल वीडियो में सर्किल ऑफिसर (CO) संजय सिंह कथित तौर पर पीस कमेटी की बैठक के दौरान अपने अधीनस्थ पुलिसकर्मियों को अजीबोगरीब निर्देश देते सुनाई दे रहे हैं. अधिकारी वीडियो में कह रहे हैं कि "पब्लिक को बवाल करने दो, तुम सिर्फ देखो..." इस बयान के सामने आने के बाद राज्य की कानून व्यवस्था और संकट प्रबंधन की रणनीति पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं.

'दूर से खड़े होकर देखो' वाले बयान पर बढ़ा विवाद

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर प्रसारित हो रहे इस वीडियो में सीओ संजय सिंह पुलिस अधिकारियों को ज्ञान देते नजर आ रहे हैं. वीडियो के अनुसार उन्होंने कहा, "पब्लिक को बवाल करने दो, पुलिस मत पहुंचाना. पब्लिक को जो करना है करे, दूर से खड़े होकर देखो तभी सुधरेगी. कुछ होगा तो हम बचा लेंगे." उनके इस बयान को पुलिस की निष्क्रियता को बढ़ावा देने वाला और गैर-जिम्मेदाराना रवैया माना जा रहा है. यह भी पढ़े: Nitesh Rane’s Controversial Statement: नीतेश राणे का केरल को लेकर भड़काऊ बयान, बताया मिनी पाकिस्तान है, कांग्रेस ने जताया विरोध; VIDEO

CO का बयान

पुराने मामलों का दिया हवाला

वायरल वीडियो में अधिकारी केवल बवाल देखने की बात ही नहीं कर रहे, बल्कि वे अपने मातहतों को विभागीय जांच से बचाने का भरोसा भी दे रहे हैं. उन्हें वीडियो में आगे यह कहते सुना जा सकता है, "अमुल वाले जांच में बचाया था, आगे भी बचा लूंगा." इस लाइन से यह साफ संकेत मिलता है कि अधिकारी पहले भी किसी विवादित मामले में पुलिसकर्मियों का बचाव कर चुके हैं, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है.

पुलिस विभाग में हलचल और जांच के आदेश

वीडियो के एक्स पर वायरल होने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस और कानपुर देहात प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया है. हालांकि अभी तक इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रेस नोट जारी नहीं हुआ है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक वरिष्ठ अधिकारियों ने वीडियो का संज्ञान लेते हुए इसकी सत्यता और पूरे संदर्भ की जांच शुरू कर दी है. विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि यह बैठक किस तारीख को आयोजित की गई थी और किन परिस्थितियों में ये बातें कही गईं.

कानून-व्यवस्था और पुलिस की भूमिका पर सवाल

यह पूरी घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर पुलिस बल हमेशा मुस्तैद रहने का दावा करता है. पुलिस का प्राथमिक कार्य किसी भी अप्रिय घटना या बवाल को रोकना होता है. ऐसे में एक जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी द्वारा 'बवाल होने देने' और 'पुलिस न भेजने' का निर्देश देना पुलिस नियमावली के विपरीत माना जा रहा है. विपक्ष और आम जनता अब इस मामले पर पुलिस महानिदेशक (DGP) कार्यालय से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

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