Pahalgam Terror Attack Probe: पहलगाम आतंकी हमले की जांच, NIA ने आतंकियों के मोबाइल फोन की खेप का संबंध कराची के फैसल बैंक से जोड़ा
एनआईए (Photo Credits: File Image)

श्रीनगर/नई दिल्ली, 1 जून: जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के पहलगाम (Pahalgam) में हुए विनाशकारी आतंकवादी हमले (Terrorist Attack) की जांच कर रही राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (National Investigation Agency) (NIA) और स्थानीय पुलिस ने आतंकियों के तकनीकी नेटवर्क को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है. सुरक्षा एजेंसियों ने मारे गए आतंकवादियों के पास से बरामद दो मोबाइल फोन में से एक का संबंध सीधे कराची (Karachi) स्थित एक वित्तीय संस्थान से जोड़ा है. एनआईए (NIA) की तफ्तीश में सामने आया है कि बरामद किया गया एक फोन वर्ष 2021 में पाकिस्तान आयात की गई एक बड़ी व्यावसायिक खेप का हिस्सा था, जिसकी रसद और वित्तीय व्यवस्था में कराची का 'फैसल बैंक' शामिल था. यह भी पढ़ें: Pahalgam Terror Attack Anniversary: पहलगाम आतंकी हमले की बरसी पर Razdan Pass पर उमड़ी पर्यटकों की भीड़, जान गंवाने वाले पीड़ितों को दी श्रद्धांजलि; VIDEO

आतंकवादियों के संचार उपकरणों के स्रोतों का खुलासा

सुरक्षा बलों ने 28 जुलाई 2025 को दाचीगाम के जंगलों में चलाए गए एक विशेष अभियान के दौरान तीन आतंकवादियों—फैसल जट्ट, हबीब ताहिर और हम्ज़ा अफगानी—को ढेर किया था. इन मारे गए आतंकियों के पास से शाओमी (Xiaomi) कंपनी के दो उपकरण, जिनमें एक रेडमी 9टी (Redmi 9T) और दूसरा रेडमी नोट 12 (Redmi Note 12) था, बरामद किए गए थे.

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, रेडमी 9टी मोबाइल फोन 1 जनवरी 2021 को 'टेक सीरत प्राइवेट लिमिटेड' द्वारा पाकिस्तान आयात की गई खेप के तहत वहां पहुंचाया गया था. इस खेप के वितरण से जुड़े दस्तावेजों में कराची के फैसल बैंक को रसद (Logistics) इकाई के रूप में सूचीबद्ध किया गया था.

आतंकी संगठनों से बैंक के पुराने संबंधों पर नजर

हालांकि, जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम हमले में इस बैंक की सीधे तौर पर संलिप्तता का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला है. इसके बावजूद, अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में इस वित्तीय संस्थान का नाम पहले भी लश्कर-ए-तैयबा (LeT) जैसे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों के बैंक खातों को संचालित करने के संदर्भ में सामने आता रहा है.

जांचकर्ताओं का मानना है कि यह डिवाइस वर्ष 2021 में आयात होने के बाद से लेकर हमले के ठीक पहले तक पूरी तरह निष्क्रिय (Inactive) रखी गई थी. इससे यह अंदेशा मजबूत होता है कि इस फोन को विशेष रूप से आतंकवादियों के इसी ऑपरेशनल इस्तेमाल के लिए सुरक्षित रखा गया था.

तकनीकी रेकी और हमले की रणनीतिक योजना

एनआईए की फॉरेंसिक और डिजिटल जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों मोबाइल फोन का उपयोग सामान्य सेल्युलर संचार या बातचीत के लिए नहीं, बल्कि मुख्य रूप से रणनीतिक रेकी (Tactical Reconnaissance) के लिए किया जा रहा था. पारंपरिक नेटवर्क निगरानी और सर्विलांस से बचने के लिए इन आतंकवादियों ने आपस में तालमेल बिठाने के लिए लंबी दूरी की रेडियो तकनीक (Long-range radio technology) का सहारा लिया था.

भले ही फोन में पारंपरिक कॉलिंग डेटा मौजूद नहीं था, लेकिन फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने डिवाइस से कई महत्वपूर्ण नक्शे और फोटोग्राफिक साक्ष्य सफलतापूर्वक बरामद कर लिए हैं. इसमें 30 मार्च 2025 को बैसरन मीडोज के पास स्थापित आतंकियों के गुप्त कैंप की तस्वीरें भी शामिल हैं, जो कि 26 लोगों की जान लेने वाले इस आत्मघाती हमले से ठीक कुछ सप्ताह पहले की हैं.

लाहौर से जुड़ा दूसरे मोबाइल फोन का लिंक

मामले में बरामद दूसरा उपकरण, रेडमी नोट 12, लाहौर स्थित 'एयर लिंक कम्युनिकेशंस लिमिटेड' द्वारा किए गए एक अलग आयात से जुड़ा हुआ पाया गया है. पहले फोन की तरह ही यह डिवाइस भी हमले की तैयारियों के अंतिम दौर तक पूरी तरह सुप्त (Dormant) रखी गई थी. सुरक्षा अधिकारी अब इन बरामद डिजिटल साक्ष्यों और डेटा का गहराई से विश्लेषण कर रहे हैं ताकि उस सीमा पार नेटवर्क और स्थानीय मददगारों का पूरी तरह पता लगाया जा सके, जिन्होंने इस सशस्त्र समूह की घुसपैठ और हमले की इस खूनी साजिश को अंजाम देने में मदद की थी.