8वां वेतन आयोग: जानिए पहले से 7वें वेतन आयोग तक 'फिटमेंट फैक्टर' ने कैसे बदला देश का सैलरी स्ट्रक्चर

8वें वेतन आयोग के गठन के बीच केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी तय करने वाले 'फिटमेंट फैक्टर' को लेकर चर्चा तेज हो गई है. जानिए पहले से लेकर 7वें वेतन आयोग तक कैसे बदलता गया देश का पे-स्केल स्ट्रक्चर.

8वां वेतन आयोग (Photo Credits: File Image)

8th Pay Commission Latest News: देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट है. 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) के समक्ष अपनी मांगें और सुझाव सौंपने की समय-सीमा 15 जून को समाप्त हो गई है. इस औपचारिक विचार-विमर्श विंडो के बंद होने के बाद, अब सभी की नजरें आयोग की आगामी बैठकों और उसकी अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं. यह रिपोर्ट आने वाले समय में कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में होने वाले बदलावों की रूपरेखा तय करेगी.

वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम मूल वेतन (Basic Pay) 18,000 रुपये और अधिकतम 2,50,000 रुपये प्रति महीना तय है. अब कर्मचारी यूनियनें बढ़ती महंगाई के बीच अपनी क्रय शक्ति (Purchasing Power) को बनाए रखने के लिए फिटमेंट फैक्टर में बड़े इजाफे की मांग कर रही हैं.  यह भी पढ़े: 8th Pay Commission Update: 8वें वेतन आयोग को लेकर रेलवे पेंशनर्स की मांग, हर साल 5% वेतन वृद्धि, न्यूनतम वेतन बढ़ाने और बेहतर फिटमेंट फैक्टर पर जोर

8वें वेतन आयोग को लेकर क्या हैं अनुमान?

वेतन आयोग का अंतिम ढांचा केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही तय होगा, लेकिन शुरुआती चर्चाएं पूरी तरह से 'फिटमेंट फैक्टर' (सैलरी बढ़ाने का गणितीय फॉर्मूला) पर केंद्रित हैं. प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार एक रूढ़िवादी दृष्टिकोण अपनाते हुए 2.15 का बेसलाइन फिटमेंट फैक्टर दे सकती है, जबकि कुछ आर्थिक मॉडल 7वें वेतन आयोग के 2.57 के मानक को ही बनाए रखने का संकेत दे रहे हैं.

दूसरी ओर, केंद्रीय कर्मचारियों की प्रमुख यूनियनों और रक्षा क्षेत्र के महासंघों ने सरकार के सामने आक्रामक प्रस्ताव रखे हैं. उनकी मांग है कि बुनियादी न्यूनतम वेतन को नए सिरे से तय करने के लिए फिटमेंट फैक्टर को 3.00 से लेकर 3.83 के बीच रखा जाए. इस अंतिम निर्णय का सीधा असर देश के 1.1 करोड़ से अधिक सक्रिय कर्मचारियों और सेवानिवृत्त पेंशनभोगियों पर पड़ेगा.

ऐतिहासिक सफर: पहले से चौथे वेतन आयोग तक का बदलाव

भारत में सरकारी कर्मचारियों के वेतन में संशोधन की व्यवस्था लगभग हर 10 साल के चक्र पर काम करती है, ताकि आर्थिक बदलावों के अनुसार वेतन को संतुलित किया जा सके. शुरुआती दौर में ध्यान बुनियादी जीवन स्तर को स्थापित करने पर था:

आधुनिक युग: 5वें से 7वें वेतन आयोग में 'फिटमेंट फैक्टर' की एंट्री

पांचवें वेतन आयोग के बाद से सैलरी तय करने के तरीके में बड़ा बदलाव आया, जब एक निश्चित गुणक (Multiplier) या फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल शुरू किया गया:

आगे क्या होगी प्रक्रिया?

8वां वेतन आयोग विभिन्न हितधारकों और कर्मचारी यूनियनों के साथ लगातार बैठकें कर रहा है. गर्मियों के इन महीनों में देश की विभिन्न क्षेत्रीय राजधानियों में सीधे संवाद का दौर जारी रहेगा. उम्मीद जताई जा रही है कि सभी पक्षों से चर्चा और डेटा विश्लेषण के बाद आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट साल 2027 के मध्य तक पूरी कर सरकार को सौंप सकता है.

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