Indus Water Treaty: 'सिंधु जल संधि' खत्म करने से तिलमिलाया पाकिस्तान, भारत को पत्र लिखकर की फैसले पर पुनर्विचार की अपील

पहलगाम आतंकी हमले के बाद 'सिंधु जल संधि' को खत्म करने से पाकिस्तान बुरी तरह बौखला गया है. पाकिस्तान ने भारत से 'सिंधु जल संधि' को लेकर उठाए गए अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है. पाकिस्तान ने भावी संकट को देखते हुए भारत से मदद की गुहार लगाई है.

इस्लामाबाद, 15 मई : पहलगाम आतंकी हमले के बाद 'सिंधु जल संधि' को खत्म करने से पाकिस्तान बुरी तरह बौखला गया है. पाकिस्तान ने भारत से 'सिंधु जल संधि' को लेकर उठाए गए अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है. पाकिस्तान ने भावी संकट को देखते हुए भारत से मदद की गुहार लगाई है. पाकिस्तान के जल संसाधन मंत्रालय ने भारत के जल शक्ति मंत्रालय को इस संबंध में एक पत्र भी लिखा है. उन्होंने कहा कि इस फैसले से पाकिस्तान में संकट खड़ा हो जाएगा.

पाकिस्तान के समा टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, जल संसाधन सचिव सैयद अली मुर्तजा ने बुधवार को भारत के जल संसाधन सचिव को पत्र लिखकर कहा कि सिंधु जल संधि में कहीं भी इसे निलंबित करने की बात का समर्थन नहीं है. जल संसाधन मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि भारत द्वारा निलंबन को सही ठहराने के लिए इस्तेमाल की गई भाषा संधि में कहीं नहीं मिलती. पाकिस्तान ने कहा कि सिंधु जल संधि अपने मूल रूप में वैध है और इसमें एकतरफा बदलाव या निलंबन का कोई नियम नहीं है. यह भी पढ़ें :Sriganga Nagar: भारत-पाकिस्तान सीमा से 15 किमी दूर मिला ड्रोन, बीएसएफ ने शुरू की जांच

सूत्रों के अनुसार, नियम के मुताबिक पाकिस्तान द्वारा लिखा गया यह पत्र विदेश मंत्रालय भेज दिया गया है. उन्होंने भारत से फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की है. इससे पहले, पीएम मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा था कि खून और पानी साथ नहीं बह सकते हैं. बताया जा रहा है कि भारत अब तीनों नदियों के पानी का अपने लिए इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है. इस पर तुरंत काम शुरू कर दिया गया है. इसके अलावा, मध्यकालिक और दीर्घकालिक योजनाओं को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है.

प्रधानमंत्री ने आदमपुर एयरबेस पहुंचकर भारतीय जवानों की तारीफ की थी. उन्होंने कहा था, "आपके पराक्रम की वजह से आज ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की गूंज हर कोने में सुनाई दे रही है. इस पूरे ऑपरेशन के दौरान हर भारतीय आपके साथ खड़ा रहा. हर भारतीय की प्रार्थना आप सभी के साथ रही. आज हर देशवासी अपने सैनिकों, उनके परिवारों के प्रति कृतज्ञ है, उनका ऋणी है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ कोई सामान्य सैन्य अभियान नहीं है. ये भारत की नीति, नीयत और निर्णायक क्षमता की त्रिवेणी है."

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