नई दिल्ली: विदेश मंत्रालय (MEA) ने गुरुवार को पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व द्वारा भारत के खिलाफ दिए जा रहे “लापरवाह, युद्ध-भड़काऊ और नफरत फैलाने वाले” बयानों की कड़ी आलोचना की. मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि किसी भी तरह की “गलत हरकत” का अंजाम बेहद दर्दनाक होगा. MEA प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "पाकिस्तानी नेतृत्व का यह जाना-पहचाना तरीका है कि वे बार-बार भारत विरोधी बयान देकर अपनी नाकामियों से ध्यान भटकाने की कोशिश करते हैं."
पाकिस्तान के हालिया बयानों का एक बड़ा कारण सिंधु जल संधि का भारत द्वारा निलंबन है. जायसवाल ने कहा कि भारत ने कभी भी तथाकथित ‘कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ की वैधता या अधिकार को स्वीकार नहीं किया. उन्होंने साफ किया इसके सभी फैसले कानूनी रूप से निरर्थक हैं. पाकिस्तान के चुनिंदा और भ्रामक बयानों को भारत पूरी तरह खारिज करता है. सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला भारत का संप्रभु निर्णय है.
पाकिस्तानी नेताओं के भड़काऊ बयान
प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने धमकी देते हुए कहा, “अगर आपने हमारा पानी रोका तो एक बूंद भी नहीं छीन पाओगे, वरना ऐसा सबक सिखाएंगे कि कान पकड़ लोगे.” पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा, “IWT को निलंबित करना सिंधु घाटी सभ्यता पर हमला है, अगर युद्ध की नौबत आई तो पीछे नहीं हटेंगे.”
वहीं पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर ने कहा, “अगर भारत ने बांध बनाया तो हम उसे तोड़ देंगे. सिंधु नदी भारत की पारिवारिक संपत्ति नहीं है.” उन्होंने तो यहां तक कहा कि परमाणु युद्ध की स्थिति में पाकिस्तान “दुनिया का आधा हिस्सा” खत्म कर सकता है.
भारत का साफ संदेश
MEA की चेतावनी का लहजा साफ है कि पाकिस्तान अगर युद्ध भड़काने वाली भाषा इस्तेमाल करेगा, तो भारत चुप नहीं बैठेगा. किसी भी सैन्य या रणनीतिक “मिसएडवेंचर” का जवाब दर्दनाक अंजाम के साथ दिया जाएगा.













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