लोकल से ग्लोबल की ओर चल पड़ा खादी मास्क
कोरोना वायरस ने जब भरत में दस्तक दी, तब एन95 मास्क की कमी सी पड़ने लगी. तभी एक तरफ जहां कंपनियों ने एन95 मास्क का उत्पादन बढ़ाना शुरू कर दिया, वहीं देश के लगभग हर राज्य में कॉटन कपड़े के मास्क बनने शुरू हो गए.
कोरोना वायरस ने जब भरत में दस्तक दी, तब एन95 मास्क की कमी सी पड़ने लगी. तभी एक तरफ जहां कंपनियों ने एन95 मास्क का उत्पादन बढ़ाना शुरू कर दिया, वहीं देश के लगभग हर राज्य में कॉटन कपड़े के मास्क बनने शुरू हो गए. इसी बीच कई राज्यों में खादी के मास्क बनाने का काम भी शुरू हुआ. देखते ही देखते खादी मास्क का चलन पूरे देश में बढ़ गया। अब यही खादी मास्क लोकल से ग्लोबल की ओर चल पड़ा है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा सभी प्रकार के गैर-चिकित्सा/ गैर-सर्जिकल मास्क के निर्यात पर प्रतिबंध हटा लिए जाने के बाद, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) अब विदेशों में खादी कॉटन और रेशम फेस मास्क के निर्यात की संभावनाओं का पता लगा रहा है. विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की ओर से इस संदर्भ में 16 मई को अधिसूचना जारी कर दी गई है.
यह कदम, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के "आत्मनिर्भर भारत अभियान" को ध्यान में रखते हुए "स्थानीय से वैश्विक" आह्वान के कुछ दिनों बाद उठाया गया है. कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान फेस मास्क की अत्यधिक मांग को ध्यान में रखते हुए, केवीआईसी ने क्रमशः दो स्तरीय और तीन स्तरीय कॉटन के साथ-साथ सिल्क फेस मास्क को विकसित किया है, जो पुरुषों के लिए दो रंगों में और महिलाओं के लिए कई रंगों में उपलब्ध है.
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क्यों खास है खादी मास्क:
खादी का फेस मास्क बनाने में डबल ट्विस्टेड खादी कपड़े का उपयोग किया जाता है. यह नमी की मात्रा को अंदर तक बनाए रखने में मददगार साबित होता है और हवा को अंदर जाने देने के लिए एक आसान मार्ग प्रदान करता है. यानी इसे पहनने पर सांस लेने में दिक्कत नहीं होती. इन मास्क को जो बात विशेष रूप से खास बनाती है वह हाथ से बुने हुए कॉटन और सिल्क के कपड़े हैं. कॉटन एक मैकेनिकल अवरोधक के रूप में जबकि रेशम एक इलेक्ट्रोस्टैटिक अवरोधक के रूप में काम करता है. ये मास्क लंबाई में 7 इंच और चौड़ाई में 9 इंच के होते हैं, जिनकी तीन लेयर होती हैं. यह 70 प्रतिशत तक नमी को अंदर रखता है और इसे बार-बार धुल कर पहन सकते हैं.
8 लाख फेस मास्क की आपूर्ति:
अब तक केवीआईसी को 8 लाख फेस मास्क की आपूर्ति के ऑर्डर प्राप्त हो चुके हैं और लॉकडाउन अवधि के दौरान 6 लाख से ज्यादा फेस मास्क की आपूर्ति की जा चुकी है. केवीआईसी को राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्र सरकार के मंत्रालयों, जम्मू-कश्मीर सरकार से ऑर्डर प्राप्त हुए हैं और आम नागरिकों द्वारा ईमेल के माध्यम से ऑर्डर मिले हैं. फेस मास्क की बिक्री करने के अलावा, पूरे देश में खादी संस्थानों द्वारा जिला प्राधिकरणों को 7.5 लाख से ज्यादा खादी के फेस मास्क मुफ्त में बांटे गए हैं. केवीआईसी के करीब 2400 खादी संस्थान हैं, जो देश भर में करीब 12 लाख मास्क की सप्लाई करेंगे. केवीआईसी की योजना दुबई, अमेरिका, मॉरीशस और कई यूरोपीय और मध्य पूर्व देशों में खादी फेस मास्क की आपूर्ति करने की है, जहां पर पिछले कुछ वर्षों में खादी की लोकप्रियता काफी बढ़ी है. केवीआईसी की योजना इन देशों में भारतीय दूतावासों के माध्यम से खादी फेस मास्क बिक्री करने की है.
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केवीआईसी के चेयरमैन, विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि खादी फेस मास्क का निर्यात, ‘स्थानीय से वैश्विक’ होने का सबसे बढ़िया उदाहरण है. सक्सेना ने कहा, “प्रधानमंत्री की अपील के बाद हाल के वर्षों में खादी के कपड़े और अन्य उत्पादों की लोकप्रियता पूरी दुनिया में काफी बढ़ी है. खादी फेस मास्क के निर्यात से उत्पादन में गतिशीलता आएगी और अंतत भारत में कारीगरों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे.” सक्सेना ने यह भी कहा कि, "फेस मास्क कोरोना महामारी से निपटने के लिए सबसे महत्वपूर्ण उपकरणों में से एक है. खादी फैब्रिक से तैयार ये डबल ट्विस्टेड मास्क न केवल गुणवत्ता और मांग के पैमाने पर खरे उतरते हैं बल्कि वे लागत प्रभावी, सांस लेने में उपयुक्त, धोने योग्य, पुन: उपयोग करने योग्य और बायो-डिग्रेडेबल हैं.”
और कहां-कहां बन रहे हैं खादी के मास्क:
बिहार के शहीद खुदीराम बोस सेंट्रल जेल में बंद कैदी खादी के मास्क बनाने का कार्य कर रहे हैं. वहीं बिहार के ही समस्तीपुर जेल में भी खादी के मास्क बनाये जा रहे हैं. अमृतसर जेल में 3 हजार कैदी इस काम में जुटे हुए हैं. वहीं उत्तर प्रदेश की लखनऊ, नोएडा, मुरादाबाद समेत कई जेलों में कैदी खादी के मास्क बना रहे हैं.
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कोविड महामारी फैलने पर जब मास्क की कमी पड़ी तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में खादी के मास्क बनाने का आदेश दिया. इसके लिए ग्रामीण विकास विभाग को सात लाख मीटर खादी कपड़ा मुहैया कराया गया. ये मास्क उत्तर प्रदेश के शहरी गरीबों और ग्रामीण इलाकों में मुफ्त बांटे जा रहे हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on May 21, 2020 08:17 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

