Income Tax Rules 2026: 1 अप्रैल से बदल रहे हैं इनकम टैक्स के नियम; नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी राहत, जानें PAN और HRA से जुड़े नए बदलाव

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने 1 अप्रैल से प्रभावी होने वाले 'आयकर नियम, 2026' जारी कर दिए हैं। इन नियमों के तहत बच्चों की शिक्षा के भत्ते में बढ़ोतरी, पैन कार्ड की अनिवार्यता की सीमा में ढील और नई टैक्स व्यवस्था को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: Wikimedia Commons)

Income Tax Rules 2026: केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (Central Board of Direct Taxes)  यानी सीबीडीटी (CBDT) ने आयकर नियम 2026 को लागू करने की घोषणा कर दी है, जो 1 अप्रैल से प्रभावी होंगे. आयकर अधिनियम 2025 (Income Tax Act, 2025) के अनुरूप तैयार किए गए इन नए सुधारों का मुख्य उद्देश्य कर अनुपालन को सरल बनाना, कागजी कार्रवाई को कम करना और नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) को बढ़ावा देना है. हालांकि, नियमों के कार्यान्वयन के लिए कम समय मिलने के कारण व्यापारिक जगत (Business World) और करदाताओं (Taxpayers) के बीच कुछ चिंताएं भी देखी जा रही हैं. यह भी पढ़ें: Income Tax 2026: 1 अप्रैल से नया कानून लागू, लेकिन इस साल पुराने नियमों के तहत ही भरना होगा रिटर्न

पैन (PAN) कार्ड की अनिवार्यता में बड़ी ढील

नए नियमों के तहत उच्च मूल्य वाले लेनदेन के लिए पैन (PAN) की जानकारी देने की शर्तों को काफी उदार बनाया गया है. अब नकद जमा या निकासी के लिए पैन तभी अनिवार्य होगा जब यह राशि एक वित्तीय वर्ष में 10 लाख रुपये से अधिक हो (पहले यह सीमा 50,000 रुपये प्रतिदिन थी).

नौकरीपेशा लोगों के लिए भत्तों में भारी बढ़ोतरी

सैलरीड क्लास को उन भत्तों में बड़ी राहत दी गई है जो वर्षों से अपरिवर्तित थे. बच्चों की शिक्षा का भत्ता (Children’s Education Allowance) 100 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर अब 3,000 रुपये प्रति माह (अधिकतम दो बच्चों के लिए) कर दिया गया है. इसी तरह, हॉस्टल भत्ता भी 300 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है.

इसके अलावा, अब बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद जैसे शहरों को भी 'मेट्रो सिटी' की श्रेणी में शामिल किया गया है, जिससे यहाँ रहने वाले कर्मचारी अब 50 प्रतिशत हाउस रेंट अलाउंस (HRA) छूट के पात्र होंगे.

नई टैक्स व्यवस्था में अतिरिक्त लाभ

सरकार ने नई टैक्स व्यवस्था को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए कुछ नए प्रावधान जोड़े हैं। कर्मचारी अब प्रति भोजन 200 रुपये तक के टैक्स-फ्री मील वाउचर (Meal Vouchers) का दावा कर सकते हैं, जो मासिक रूप से लगभग 8,800 रुपये तक हो सकता है. पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए, नियोक्ताओं द्वारा प्रदान किए गए इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) पर लगने वाले टैक्स मूल्यांकन को भी कम किया गया है. यह भी पढ़ें: Union Budget 2026: बजट 2026 से पहले जानें इनकम टैक्स स्लैब, नई और पुरानी टैक्स व्यवस्था में क्या है आपके लिए बेहतर?

डिजिटल ट्रैकिंग और सख्त अनुपालन

जहाँ एक तरफ सीमाओं में ढील दी गई है, वहीं निगरानी को और सख्त किया गया है. अब सैलरीड टैक्सपेयर्स को टीडीएस (TDS) प्रक्रिया के दौरान फॉर्म 124 (Form 124) के माध्यम से एचआरए जैसे दावों के लिए सबूत जमा करने होंगे. इसके अलावा, यदि बीमा प्रीमियम सालाना 5 लाख रुपये से अधिक है, तो बीमा कंपनियों को इसकी रिपोर्ट देनी होगी. यह डेटा करदाता के वार्षिक सूचना विवरण (AIS) में दिखाई देगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी.

व्यवसायों के सामने चुनौतियां

नियमों के सरलीकरण के बावजूद, इनके तत्काल कार्यान्वयन ने परिचालन संबंधी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. कंपनियों के पास पेरोल सिस्टम को अपडेट करने और टीडीएस गणनाओं को समायोजित करने के लिए बहुत कम समय बचा है. विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि नई व्यवस्था अब डिफॉल्ट विकल्प बनती जा रही है, लेकिन करदाताओं को स्विच करने से पहले अपनी आय संरचना का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना चाहिए.

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