पति ने कामकाजी पत्नी से मांगा गुजारा भत्ता, कर्नाटक हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अपनी पत्नी से स्थायी गुजारा भत्ता की मांग करने वाली एक व्यक्ति की याचिका खारिज कर दी है. अदालत ने अपने आदेश में कहा, "नौकरी कर रहे व्यक्ति को अपनी पत्नी से स्थायी गुजारा भत्ता मांगने का कोई अधिकार नहीं है."
बेंगलुरु, 13 जुलाई : कर्नाटक उच्च न्यायालय (Karnataka High Court) ने अपनी पत्नी से स्थायी गुजारा भत्ता की मांग करने वाली एक व्यक्ति की याचिका खारिज कर दी है. अदालत ने अपने आदेश में कहा, "नौकरी कर रहे व्यक्ति को अपनी पत्नी से स्थायी गुजारा भत्ता मांगने का कोई अधिकार नहीं है." जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस जेएम खाजी की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ ने मंगलवार को उडुपी जिले के निवासी की याचिका पर सुनवाई करते हुए हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 के तहत पत्नी से गुजारा भत्ता की मांग की. जब स्थायी गुजारा भत्ता मांगा जाता है, तो दोनों पक्षों की संपत्तियों और वित्तीय स्थितियों पर विचार किया जाना चाहिए. पति की जरूरतों और याचिकाकर्ताओं की आय और संपत्ति पर विचार करने की जरूरत है. इस मामले में, याचिकाकर्ता ने सहमति व्यक्त की है कि उसे विरासत में जमीन मिली है और जिस घर में वह इस समय रह रहा है, उसमें उसका भी हिस्सा है.
पत्नी सहकारी समिति में कार्यरत है और अपने 15 वर्षीय बेटे की पढ़ाई का जिम्मा संभाल रही है. पीठ ने कहा कि उसे बेटे की शिक्षा के लिए पर्याप्त धन की जरूरत है और अकेले ही जिम्मेदारी उठा रही है. पीठ ने कहा, हालांकि, उसके पति में कमाने की क्षमता है और पति द्वारा गुजारा भत्ता को खारिज करने के परिवार अदालत के फैसले को बरकरार रखा गया है. पति के वकील ने तर्क दिया कि पत्नी एक सहकारी समिति में सहायक प्रबंधक के पद पर कार्यरत है. सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करने वाले याचिकाकर्ता की नौकरी चली गई और वह आजीविका के लिए संघर्ष कर रहा था. महिला के वकील ने कहा कि गुजारा भत्ता देना संभव नहीं है, क्योंकि उसे वेतन के रूप में केवल 8,000 रुपये मिलते हैं. यह भी पढ़ें : Uttarakhand: भारी बारिश के बाद चमोली जिले में विभिन्न स्थानों पर लैंडस्लाइड, बद्रीनाथ हाईवे बंद
इस जोड़े की शादी 25 मार्च 1993 को हुई थी. पत्नी अपने बच्चे को जन्म देने से पहले अपने पति को छोड़ चुकी थी. पुत्र के जन्म के बाद भी वह कई वर्षो तक उसके पास नहीं लौटी. पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक के लिए अर्जी दी थी. उन्होंने स्थायी गुजारा भत्ता के लिए भी आवेदन किया था. फैमिली कोर्ट ने 19 अगस्त 2015 को तलाक का आदेश दिया था और गुजारा भत्ता की मांग को खारिज कर दिया था.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 13, 2022 10:44 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

