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Karnataka High Court: सहपाठी को इंस्टाग्राम पर 'Pretty' कहना अपराध नहीं; कर्नाटक हाई कोर्ट ने छात्र के खिलाफ दर्ज आपराधिक केस किया रद्द

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने इंस्टाग्राम पर अपनी सहपाठी को 'Pretty' कहने वाले 20 वर्षीय छात्र के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द कर दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि दो सहपाठियों के बीच निजी बातचीत में इस्तेमाल की गई भाषा अपराध की श्रेणी में नहीं आती और जांच जारी रखना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा.

Karnataka High Court: सहपाठी को इंस्टाग्राम पर 'Pretty' कहना अपराध नहीं; कर्नाटक हाई कोर्ट ने छात्र के खिलाफ दर्ज आपराधिक केस किया रद्द
कर्नाटक हाईकोर्ट (Photo Credits: Wikimedia Commons)

बेंगलुरु: कर्नाटक उच्च न्यायालय (Karnataka High Court) ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए लगभग दो साल पहले अपनी सहपाठी को इंस्टाग्राम डायरेक्ट मैसेज (DM) में 'Pretty' (सुंदर) कहने वाले एक कॉलेज छात्र के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है.

उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए टिप्पणी की कि दो सहपाठियों के बीच हुई यह बातचीत पूरी तरह से निजी थी और आज के छात्रों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली सामान्य भाषा (Gen Z Lingo) कोई अपराध नहीं बन सकती. अदालत ने कहा कि इस मामले में जांच जारी रखने की अनुमति देना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा. यह भी पढ़ें: Karnataka High Court Decision: कर्नाटक HC का बड़ा फैसला, पति सिर्फ शादी में 'रुचि खत्म होने' के आधार पर नहीं मांग सकता तलाक; याचिका ख़ारिज

मामला और दर्ज की गई धाराएं

यह मामला तब दर्ज किया गया था जब शिकायतकर्ता छात्रा ने यह मैसेज अपने पिता को दिखाया, जो एक भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं. पुलिस ने 20 वर्षीय छात्र के खिलाफ ताक-झांक (Voyeurism), पीछा करना (Stalking) और महिला की लज्जा भंग करने (Outraging the Modesty of a Woman) से संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी.

जांच के दौरान पुलिस ने याचिकाकर्ता का लैपटॉप और मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया था. याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि वह एक युवा क्रिकेटर है और तमिलनाडु क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है; ऐसे में यह झूठा मामला उसके करियर को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा था.

उच्च न्यायालय की मुख्य टिप्पणियां

मामले से जुड़े दस्तावेजों और संदेशों का अवलोकन करने के बाद न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने पाया कि छात्रा ने इंस्टाग्राम पर छात्र के मैसेज का जवाब 'Thanks' (धन्यवाद) कहकर दिया था.

अदालत ने स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से न तो पीछा करने और न ही ताक-झांक करने का कोई अपराध सिद्ध होता है. इसके अलावा, इस तरह की सामान्य बातचीत से महिला की लज्जा भंग होने का आरोप भी कानूनी रूप से टिक नहीं सकता.

उच्च न्यायालय ने पूर्व में इस मामले की कार्यवाही पर रोक लगाई थी और अब अंतिम सुनवाई के दौरान छात्र के खिलाफ दर्ज सभी शिकायतों व कार्यवाहियों को पूरी तरह से खारिज कर दिया.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 22, 2026 09:57 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).