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गुलाम नबी आजाद: कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी की 'राजनीतिक चीन की दुकान में हाथी'

कांग्रेस के पूर्व वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के पार्टी से इस्तीफा देने के फैसले के बाद जम्मू और कश्मीर में सभी पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों के समीकरण बिगड़ गए हैं. 52 वर्षो तक कांग्रेस के साथ अडिग रहने के बाद आजाद जम्मू-कश्मीर में पार्टी के सामने सबसे गंभीर चुनौती बन गए हैं.

गुलाम नबी आजाद: कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी की 'राजनीतिक चीन की दुकान में हाथी'
गुलाम नबी आजाद (Photo: PTI)

श्रीनगर, 3 सितंबर : कांग्रेस के पूर्व वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के पार्टी से इस्तीफा देने के फैसले के बाद जम्मू और कश्मीर में सभी पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों के समीकरण बिगड़ गए हैं. 52 वर्षो तक कांग्रेस के साथ अडिग रहने के बाद आजाद जम्मू-कश्मीर में पार्टी के सामने सबसे गंभीर चुनौती बन गए हैं. आजाद में शामिल होने के लिए कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने पहले ही इस्तीफा दे दिया है. उनके जम्मू पहुंचने पर इस सप्ताह एक नए राजनीतिक दल की घोषणा किए जाने की संभावना है. कांग्रेस पर जो उथल-पुथल मची है, उससे नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के जम्मू संभाग में निश्चित रूप से राजनीतिक समीकरण बिगड़ने की संभावना है.

डोडा, किश्तवाड़ और रामबन के चिनाब घाटी जिलों में मुस्लिम वोट एक निर्णायक कारक बन जाएगा. आजाद का पुंछ, राजौरी, जम्मू, कठुआ, सांबा, उधमपुर और रियासी जिलों में भी व्यक्तिगत प्रभाव और सद्भावना है. यह व्यक्तिगत सद्भावना जरूरी नहीं है कि इन 7 जिलों में उनकी पार्टी की विधानसभा सीटों में तब्दील हो जाए, लेकिन यह तय कर सकती है कि उन जिलों में चुनाव कौन हार रहा है. भाजपा जम्मू, कठुआ, सांबा, उधमपुर और रियासी में अच्छी तरह से स्थापित है, जहां कल तक उसकी कट्टर प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस को अब कुछ चुनावी जीत दर्ज करने के लिए और कड़ी मेहनत करनी होगी. यह भी पढ़ें: देवघर एयरपोर्ट पर जबरन क्लीयरेंस लेने को लेकर भाजपा सांसदों निशिकांत, मनोज तिवारी सहित 9 पर एफआईआर

दिलचस्प बात यह है कि जम्मू संभाग में कांग्रेस को अब तक अज्ञात आम आदमी पार्टी (आप) से चुनावी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है, जिसने पड़ोसी पंजाब में अपनी जीत के बाद धीरे-धीरे जम्मू, सांबा और कठुआ में अपना प्रभाव फैला लिया है. जहां तक इन जिलों में भाजपा के जमीनी समर्थन पर आप के प्रभाव का सवाल है, यह संभावना नहीं है कि भाजपा आप को सीटें देने देगी. यह स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि कांग्रेस का नुकसान भाजपा या आप में से किसी का भी लाभ हो सकता है. इन सीटों पर भी आजाद अपने समर्थन के कारण पारंपरिक समीकरणों को बिगाड़ सकते हैं, हालांकि हिंदू और मुस्लिम दोनों मतदाताओं के बीच उनका समर्थन सीमित है.

डोडा, किश्तवाड़ और रामबन जिलों में आजाद की चुनावी मैदान में एंट्री चीन की एक दुकान में हाथी बनने की संभावना है. इन तीनों जिलों में उनके जीतने की संभावना है. उनकी पार्टी कितनी सीटें जीतेगी, इस पर बहस हो सकती है, लेकिन आजाद की मौजूदगी के कारण इन जिलों में एनसी और पीडीपी को कितनी हार का सामना करना पड़ेगा, अन्यथा घाटी केंद्रित दो क्षेत्रीय दलों को चिंता होनी चाहिए. पुंछ और राजौरी जिलों में नेकां अतीत में कम से कम 5 से 6 सीटें जीतती रही है. एक बार जब मुस्लिम वोट नेशनल कॉन्फ्रेंस और आजाद के बीच विभाजित हो जाते हैं, तो भाजपा इन दो जिलों में लाभ के लिए खड़ी होगी.

सज्जाद गनी लोन की अध्यक्षता वाली पीपल्स कॉन्फ्रेंस (पीसी) और सैयद अल्ताफ बुखारी के नेतृत्व वाली अपनी पार्टी के घाटी में विधानसभा क्षेत्रों में लगभग आधा दर्जन या अधिक सीटें जीतने की संभावना है. इन दोनों पार्टियों को अभी जम्मू संभाग में खुद को मजबूती से स्थापित करना है. संक्षेप में, आजाद कांग्रेस, नेकां और पीडीपी की राजनीतिक चीन की दुकान में विशेष रूप से जम्मू संभाग में एक हाथी हो सकते हैं, जिसमें 90 सदस्यीय यूटी विधानसभा में 43 सीटें हैं.

(The above story first appeared on LatestLY on Sep 03, 2022 01:37 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).