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Ganja Smuggling: स्पीड पोस्ट से गांजा तस्करी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश, हैदराबाद पुलिस ने पकड़ा 21 राज्यों में फैला करोड़ों का ड्रग सिंडिकेट

हैदराबाद पुलिस और नारकोटिक्स विंग ने इंडिया पोस्ट की स्पीड पोस्ट और निजी कूरियर सेवाओं के जरिए देश के 21 राज्यों में गांजे की होम-डिलीवरी करने वाले एक अंतर-राज्यीय ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने मुख्य सरगना को गिरफ्तार कर करोड़ों रुपये के वित्तीय लेन-देन का खुलासा किया है.

Ganja Smuggling: स्पीड पोस्ट से गांजा तस्करी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश, हैदराबाद पुलिस ने पकड़ा 21 राज्यों में फैला करोड़ों का ड्रग सिंडिकेट
प्रतीकात्मक तस्वीर (File Image)

हैदराबाद: हैदराबाद पुलिस ने हैदराबाद नारकोटिक्स एनफोर्समेंट विंग (Hyderabad Narcotics Enforcement Wing) (H-NEW) और गुडीमल्कापुर पुलिस (Gudimalkapur Police) के साथ मिलकर एक बेहद शातिर और बड़े अंतर-राज्यीय ड्रग तस्करी रैकेट (Drug Smuggling Syndicate) का भंडाफोड़ किया है. यह सिंडिकेट कानून प्रवर्तन एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए 'इंडिया पोस्ट' की स्पीड पोस्ट (Speed Post) और निजी कूरियर सेवाओं का दुरुपयोग कर देश के 21 राज्यों में प्रतिबंधित मादक पदार्थों की आपूर्ति कर रहा था. पुलिस ने एसआर नगर और गुडीमल्कापुर इलाकों से संदिग्ध पार्सल जब्त कर इस रैकेट के "डोर-डिलीवरी" नेटवर्क को ध्वस्त किया है, जो हर दिन 80 से 100 ड्रग ऑर्डर्स की डिलीवरी प्रोसेस कर रहा था. यह भी पढ़ें: Mumbai News: वर्ली NSCI डोम में म्यूजिक कंसर्ट के दौरान अत्यधिक शराब सेवन से 28 वर्षीय लॉ स्टूडेंट की मौत, पुलिस जांच में जुटी

झारखंड से संचालित हो रहा था नेटवर्क, पूर्व ड्राइवर है मास्टरमाइंड

पुलिस ने इस नेटवर्क के मुख्य मास्टरमाइंड सत्यम मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है, जो झारखंड का रहने वाला है. हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर सी.वी. सज्जनार के अनुसार, सत्यम मिश्रा पहले एक ड्राइवर था, जिसने साल 2018 में गांजे की अवैध खेती शुरू की थी. बाद में उसने अपने तीन साथियों—राहुल जय, सचिन मिश्रा और संतोष के साथ मिलकर एक मजबूत सिंडिकेट बनाया.

इस गुट ने झारखंड के स्थानीय ग्रामीणों को पैसे का लालच देकर बड़े पैमाने पर गांजे की खेती कराई.  वहां से तैयार माल को अवैध रूप से देश के प्रमुख महानगरों जैसे हैदराबाद, मुंबई, चेन्नई, दिल्ली और बेंगलुरु के बाजारों में भेजा जा रहा था.

'दवा' बताकर पार्सल और सोशल मीडिया से कोडिंग

पकड़े जाने के डर से यह सिंडिकेट पार्सल बुक करते समय शिपमेंट डिक्लेरेशन (दस्तावेजों) में हेरफेर करता था और पैकेटों पर 'औषधीय सामग्री' या 'दवाइयां' लिख देता था. ये पार्सल झारखंड के इसरी बाजार और फुसरो डाकघरों से बुक किए जाते थे, जिनमें प्रति पैकेट 50 से 250 ग्राम गांजा होता था.

ग्राहकों से संपर्क करने के लिए वे व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कूटबद्ध संदेशों (यूनिक कोड) का उपयोग करते थे. वजन और मांग के आधार पर प्रत्येक पैकेट 1,500 रुपये से लेकर 8,000 रुपये तक की प्रीमियम दरों पर बेचा जाता था. चूंकि घरेलू उड़ानों और ट्रेनों से आने वाले स्पीड पोस्ट पार्सल की हर स्तर पर अनिवार्य स्कैनिंग नहीं होती है, तस्करों ने इसी लूपहोल (खामी) का फायदा उठाया.

सालाना टर्नओवर 4 से 5 करोड़ रुपये, UPI से मनी लॉन्ड्रिंग

पुलिस की वित्तीय जांच (Financial Tracking) में सामने आया है कि यह सिंडिकेट रोजाना लगभग 1 लाख रुपये का राजस्व उत्पन्न कर रहा था, जिससे उनकी मासिक कमाई 30 लाख से 35 लाख रुपये के बीच थी. इस नेटवर्क का सालाना टर्नओवर 4 से 5 करोड़ रुपये आंका गया है.

अवैध कमाई को छुपाने के लिए आरोपियों ने ऑनलाइन यूपीआई (UPI) प्लेटफॉर्म और कई फर्जी बैंक खातों का सहारा लिया. कूटनीतिक और वित्तीय जांच से बचने के लिए इस पैसे से सोने की संपत्ति और लग्जरी गाड़ियां खरीदी जा रही थीं.

कूरियर कंपनियों के लिए सख्त निर्देश

इस गंभीर सुरक्षा चूक को देखते हुए हैदराबाद पुलिस ने केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालयों को पत्र लिखने का फैसला किया है, ताकि राष्ट्रीय डाक पार्सल के लिए अनिवार्य स्कैनिंग प्रोटोकॉल लागू किया जा सके.

इसके साथ ही, हैदराबाद में काम करने वाली सभी निजी कूरियर सेवाओं को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं कि वे हर आने-जाने वाले पार्सल की अनिवार्य डिजिटल स्कैनिंग सुनिश्चित करें और किसी भी संदिग्ध खेप की सूचना तुरंत पुलिस को दें. मामले में संलिप्त चार अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की छापेमारी जारी है.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 02, 2026 07:06 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).