पूर्व बीजेपी विधायक नरेंद्र पवार और बर्खास्त पुलिसकर्मी पर गैंगरेप का केस दर्ज, बंदूक की नोक पर दुष्कर्म का आरोप
शिकायत के मुताबिक, पीड़िता कल्याण की रहने वाली है और वह अपने पति के साथ चल रहे घरेलू विवाद को सुलझाने के लिए पूर्व विधायक नरेंद्र पवार से मदद मांगने गई थी. आरोप है कि 13 सितंबर को नरेंद्र पवार ने उसे अपने कल्याण स्थित कार्यालय बुलाया और बाद में भिवंडी तालुका के बापगांव गांव स्थित एक फार्महाउस ले गए.
Narendra Pawar Gang Rape Case: महाराष्ट्र के ठाणे जिले के पड़घा पुलिस स्टेशन में पूर्व बीजेपी विधायक नरेंद्र पवार और बर्खास्त पुलिसकर्मी शैलेश पाटिल के खिलाफ 22 वर्षीय विवाहित महिला से कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया है. पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (DGP) सदानंद दाते के निर्देश के बाद की गई. मामले में गैंगरेप और आपराधिक धमकी सहित विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है. Mumbai Rape Case: तकनीकी जांच से मिले सुराग के बाद मुंबई पुलिस की बड़ी कार्रवाई, रेप के मामलों में 30 साल से फरार दो आरोपी गिरफ्तार
शिकायत के मुताबिक, पीड़िता कल्याण की रहने वाली है और वह अपने पति के साथ चल रहे घरेलू विवाद को सुलझाने के लिए पूर्व विधायक नरेंद्र पवार से मदद मांगने गई थी. आरोप है कि 13 सितंबर को नरेंद्र पवार ने उसे अपने कल्याण स्थित कार्यालय बुलाया और बाद में भिवंडी तालुका के बापगांव गांव स्थित एक फार्महाउस ले गए.
महिला ने आरोप लगाया है कि वहां मौजूद बर्खास्त पुलिसकर्मी शैलेश पाटिल ने बंदूक दिखाकर उसे धमकाया और जबरन शराब पीने के लिए मजबूर किया. इसके बाद नरेंद्र पवार और शैलेश पाटिल ने उसके साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किया. शिकायत के अनुसार, घटना के बाद तड़के करीब 4 बजे शैलेश पाटिल के घरेलू कर्मचारी ने पीड़िता को उसके घर छोड़ा.
बताया जा रहा है कि स्थानीय कांग्रेस पार्षद कंचन कुलकर्णी ने पीड़िता के साथ मौजूद डिजिटल साक्ष्यों की समीक्षा की और 16 सितंबर की देर रात उसे लेकर पड़घा पुलिस स्टेशन पहुंचीं. इसके बाद 17 सितंबर की सुबह पुलिस ने गैंगरेप और आपराधिक धमकी की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की.
कंचन कुलकर्णी ने दावा किया कि शैलेश पाटिल के खिलाफ पहले से भी आपराधिक मामले दर्ज हैं. उन्होंने पुलिस से आरोपियों को 48 घंटे के भीतर गिरफ्तार करने की मांग की है. वहीं, पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है.
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस अब फोरेंसिक साक्ष्य जुटाने, गवाहों के बयान दर्ज करने और आरोपियों का पता लगाने की प्रक्रिया में जुटी है. मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जांच, चार्जशीट और अदालत की सुनवाई के आधार पर तय होगी. फिलहाल आरोपों की जांच जारी है और अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोपियों को कानूनन दोषी नहीं माना जाता.