Tarun Tejpal Convicted: 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व तहलका संपादक तरुण तेजपाल दोषी करार; बॉम्बे हाईकोर्ट ने रद्द किया बरी करने का आदेश

बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व तहलका संपादक तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया है. अदालत ने 2021 में निचली अदालत द्वारा तेजपाल को बरी किए जाने के फैसले को पलटते हुए गोवा सरकार की याचिका स्वीकार कर ली है.

पणजी / नई दिल्ली: 'तहलका' पत्रिका के पूर्व मुख्य संपादक तरुण तेजपाल को वर्ष 2013 के चर्चित यौन उत्पीड़न और बलात्कार मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने दोषी करार दिया है.  अदालत ने 2021 में मापुसा (गोवा) की सेशंस कोर्ट द्वारा तेजपाल को बरी किए जाने के आदेश को निरस्त कर दिया.

यह फैसला गोवा सरकार द्वारा निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दायर की गई अपील पर सुनवाई करते हुए सुनाया गया है. यह भी पढ़ें: Delhi Minor Rape Case: दिल्ली की नाबालिग से गुरुग्राम के होटल में कई बार दुष्कर्म का आरोप, गर्भवती होने पर सामने आया मामला

हाईकोर्ट की पीठ और फैसला

बॉम्बे हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जमसांडेकर की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया.

अदालत ने तेजपाल को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(2)(f) (भरोसेमंद व्यक्ति या पद पर रहते हुए दुष्कर्म), 376(2)(k), 354A (यौन उत्पीड़न) और 354B (महिला को विवस्त्र करने के इरादे से हमला) के तहत दोषी ठहराया है. दोषी ठहराए जाने के बाद अब सजा की अवधि (Quantum of Sentence) पर बहस होगी.

क्या था पूरा मामला?

यह मामला नवंबर 2013 का है, जब गोवा में 'तहलका' द्वारा आयोजित 'थिंकफेस्ट' (ThinkFest) कार्यक्रम के दौरान एक 5-स्टार होटल के लिफ्ट के भीतर तरुण तेजपाल पर अपनी एक जूनियर महिला सहकर्मी का यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगा था.

गोवा पुलिस ने तेजपाल के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें नवंबर 2013 में गिरफ्तार किया था, जिसके बाद जुलाई 2014 में उन्हें जमानत मिली थी. 2017 में मामले का ट्रायल शुरू हुआ और मई 2021 में मापुसा सेशंस कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव और पीड़िता के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए तेजपाल को बरी कर दिया था.

तरुण तेजपाल 2013 के रेप केस में दोषी करार

सुनवाई के दौरान अदालत में दी गई दलीलें

हाईकोर्ट में राज्य सरकार की ओर से भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और गोवा के एडवोकेट जनरल देविदास पंगम ने दलीलें पेश कीं.

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की दलीलों को स्वीकार करते हुए सेशंस कोर्ट के बरी करने के आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया और तेजपाल को दोषी पाया.

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