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FIR Against Anil Ambani: अनिल अंबानी के खिलाफ CBI ने क्यों दर्ज की FIR? जानें पूरा मामला

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने रिलायंस कैपिटल के पूर्व चेयरमैन अनिल अंबानी और अन्य के खिलाफ EPFO निवेश में 1,816.22 करोड़ रुपये के नुकसान और धोखाधड़ी के आरोप में नया मामला दर्ज किया है.

FIR Against Anil Ambani: अनिल अंबानी के खिलाफ CBI ने क्यों दर्ज की FIR? जानें पूरा मामला

FIR Against Anil Ambani:  केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 1 अगस्त को रिलायंस कैपिटल के पूर्व चेयरमैन अनिल अंबानी, कंपनी और कुछ अज्ञात लोक सेवकों व व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया है. एजेंसी का आरोप है कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वासघात और आपराधिक कदाचार के जरिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) को ₹1,007.55 करोड़ का प्रत्यक्ष नुकसान और ₹808.67 करोड़ का ब्याज नुकसान पहुंचाया है. इस प्रकार कुल ₹1,816.22 करोड़ के नुकसान का दावा किया गया है.

EPFO की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला

यह प्राथमिकी श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन कार्यरत कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) द्वारा दर्ज कराई गई लिखित शिकायत के आधार पर बनाई गई है. शिकायत के अनुसार, वर्ष 2013 और 2014 के दौरान रिलायंस कैपिटल लिमिटेड (RCL) ने सिक्योर्ड नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) जारी किए थे.

EPFO ने चार पोर्टफोलियो प्रबंधकों (जिसमें रिलायंस कैपिटल एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड भी शामिल थी) के माध्यम से इन डिबेंचर्स में ₹2,500 करोड़ का निवेश किया था. इन डिबेंचर्स की परिपक्वता (Maturity) वर्ष 2023 और 2024 में तय थी.

फंड की हेराफेरी और मैच्योरिटी डिफ़ॉल्ट का आरोप

जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने कपटपूर्ण लेनदेन किए और धन को दूसरी जगह डायवर्ट किया. इसके परिणामस्वरूप, रिलायंस कैपिटल निर्धारित समय पर एनसीडी का भुगतान (Redemption) करने में विफल रही. इस डिफ़ॉल्ट के कारण EPFO को कुल ₹1,816.22 करोड़ का भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा.

CBI ने बताया कि निवेश किए गए पैसों के अंतिम उपयोग (End Use) का पता लगाने, साजिश की गहराई जांचने और इसमें शामिल सरकारी व निजी अधिकारियों की भूमिका निर्धारित करने के लिए जांच शुरू कर दी गई है.

अनिल अंबानी का पक्ष और पुरानी जांच का संदर्भ

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने कहा कि यह FIR रिलायंस कैपिटल लिमिटेड से संबंधित है. प्रवक्ता के मुताबिक, अनिल अंबानी ने 2005 से नवंबर 2021 तक रिलायंस कैपिटल के बोर्ड में नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर/चेयरमैन के रूप में काम किया था, जिसके बाद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कंपनी के बोर्ड को भंग कर प्रशासक नियुक्त कर दिया था. प्रवक्ता ने किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से इनकार करते हुए कहा कि अनिल अंबानी कानून के तहत उपलब्ध सभी अधिकारों का उपयोग करेंगे.

यह कार्रवाई रिलायंस एडा (ADA) समूह की कंपनियों के खिलाफ चल रही व्यापक जांच का हिस्सा है. इससे पहले CBI सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और एलआईसी (LIC) की शिकायतों पर रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस टेलीकॉम जैसी कंपनियों के खिलाफ 7 FIR दर्ज कर चुकी है. इन मामलों की निगरानी सुप्रीम कोर्ट द्वारा की जा रही है, जिसमें एजेंसी अब तक 4 चार्जशीट दाखिल कर चुकी है.

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 02, 2026 09:26 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).