'एक थी कांग्रेस' बनाम 'एक था जोकर': पंजाब में आप-कांग्रेस का अपमान का 'गठबंधन'
पंजाब की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी द्वारा राज्य में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की आलोचना करने के बाद 'इंडिया' गठबंधन में और अधिक दरार दिखाई देने लगी है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चुनावी साल 2024 के पहले दिन व्यंग्यात्मक लहजे में कहा था, "एक थी कांग्रेस". मान ने यहां मीडिया से कहा: ''एक थी कांग्रेस'', दुनिया की सबसे छोटी कहानी है.
चंडीगढ़, 6 जनवरी : पंजाब की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी द्वारा राज्य में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की आलोचना करने के बाद 'इंडिया' गठबंधन में और अधिक दरार दिखाई देने लगी है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चुनावी साल 2024 के पहले दिन व्यंग्यात्मक लहजे में कहा था, "एक थी कांग्रेस". मान ने यहां मीडिया से कहा: ''एक थी कांग्रेस'', दुनिया की सबसे छोटी कहानी है. इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें "एक था जोकर" कहकर जवाब दिया.
कांग्रेस ने कहा कि 'कांग्रेस मुक्त भारत' की मांग को लेकर आप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच समान विचारधाराएं हैं. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने मान के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, " ‘आप’ के और मोदी जी के विचार कितने मिलते हैं!! दोनों का सपना कांग्रेस मुक्त भारत का है. दोनों मुँह की खाएँगे. "वैसे एक भोजपुरी पिक्चर का नाम है ‘एक था जोकर’. आपने तो देखी होगी?” इस बहस में शामिल होते हुए पंजाब कांग्रेस के नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि दिल्ली शराब घोटाले पर तथ्यों और आंकड़ों पर आधारित उनके प्रश्न 2022 में पंजाब चुनाव के बाद से अनुत्तरित हैं. यह भी पढ़ें : आपातकालीन लैंडिंग के बाद अलास्का एयरलाइंस ने सभी बोइंग 737-9 विमानों का परिचालन रोका
उन्होंने आप के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर तंज कसते हुए कहा, "आपकी चुप्पी उन सिद्धांतों के प्रति सरासर धोखा है, जिनकी आपने कभी वकालत की थी." सिद्धू ने कहा कि जवाबदेही की कभी मुखर वकालत करने वाले मूक हो गए हैं. उन्होंने कहा, “क्या यह असुविधाजनक सच्चाइयों की स्वीकारोक्ति है? स्व-घोषित आरटीआई योद्धा चोरी का मास्टर हो गया है... जवाबदेही और पारदर्शिता का समय आ गया है. कांग्रेस थी, है और हमेशा रहेगी.'' बठिंडा जिले में आप की 'विकास क्रांति रैली' की पृष्ठभूमि में, जिसमें मान और केजरीवाल मौजूद थे, उसी दिन 'जितेगा पंजाब, जीतेगी कांग्रेस' रैली में सिद्धू ने यह कहकर सरकार पर कटाक्ष किया कि जो रेत टिपर पहले तीन हजार रुपये में बिकता था, उसकी कीमत अब 21 हजार रुपये हो गयी है.
उन्होंने रेत खनन से 20 हजार करोड़ रुपये राजस्व का वादा करने के लिए मान और केजरीवाल की आलोचना की और कहा कि “सरकार केवल 125 करोड़ रुपये ही एकत्र कर सकी.” उन्होंने 18 वर्ष और उससे अधिक आयु की प्रत्येक महिला को प्रति माह एक हजार रुपये भत्ता देने के चुनाव पूर्व वादे को पूरा नहीं करने के लिए भी आप नेताओं पर कटाक्ष किया. हालाँकि, उनकी रैलियों को लेकर सिद्धू के खिलाफ पार्टी के भीतर तलवारें चल रही हैं, जिन्हें प्रतिद्वंद्वी "आत्म-महिमामंडन की घटनाएँ" बताते हैं. सिद्धू अपनी पार्टी के सहयोगियों की भी आलोचना करते रहे हैं, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी भी शामिल हैं, जो 2022 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार थे. नेताओं का मानना है कि सिद्धू के बयानों से 2022 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी को नुकसान हुआ.
आप ने पंजाब में 92 सीटें जीतीं जबकी 2017 में उसके 20 उम्मीदवार जीते थे. उसका वोट शेयर बढ़कर 42.4 प्रतिशत हो गया. पिछले महीने बठिंडा में एक सार्वजनिक बैठक में, केजरीवाल ने लोगों से लोकसभा चुनाव में सभी 13 सीटों पर सत्तारूढ़ आप को वोट देने की अपील की, और संकेत दिया कि 'इंडिया' गठबंधन में सहयोगी कांग्रेस के साथ सीटों के बंटवारे की कोई गुंजाइश नहीं है. उन्होंने जनता से यह भी पूछा, "मुझे एक काम बताओ जो अकाली दल-भाजपा सरकार और कांग्रेस सरकार ने 75 साल में किया हो?" कांग्रेस ने 2019 में राज्य में आठ लोकसभा सीटें जीती थीं, जबकि आप ने केवल एक सीट जीती थी. कांग्रेस की राज्य इकाई आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन के प्रस्ताव का विरोध कर रही है. अर्जुन पुरस्कार विजेता पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) दलबीर सिंह के जालंधर में रहस्यमय परिस्थितियों में मृत पाए जाने के बाद सरकार की आलोचना करते हुए विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि इस साल के पहले ही दिन यह स्थापित हो गया है कि सरकार कानून-व्यवस्था की स्थिति को सुव्यवस्थित करने में बिल्कुल अक्षम है. नए साल 2024 के मौके पर बाजवा ने कामना की कि सरकार में बेहतर समझ आएगी और वह राज्य की भलाई के लिए काम करना शुरू करेगी.
बाजवा ने मीडिया से कहा, "पंजाब में आप सरकार ने 2023 में जो किया वह 2022 में चुनाव से पहले किए गए वादे के बिल्कुल विपरीत था. सरकार ने पंजाब के लोगों की उम्मीदों से काफी कमतर प्रदर्शन किया." नशीली दवाओं के खतरे पर बाजवा ने कहा कि मान और केजरीवाल सहित आप के वरिष्ठ नेतृत्व ने सरकार बनने के चार महीने के भीतर नशीली दवाओं के खतरे को खत्म करने की कसम खाई थी. हालाँकि, 15 अगस्त, 2023 को पंजाब के मुख्यमंत्री ने राज्य में बढ़ती नशीली दवाओं के दुरुपयोग को समाप्त करने के लिए एक साल का समय और मांगा है. इस बीच, उन्हें एक और प्रतिज्ञा किए हुए चार महीने से अधिक समय हो गया है, और उन्होंने रोड शो और साइकिल रैलियां आयोजित करने के अलावा वस्तुतः कुछ भी नहीं किया है. बाजवा ने कहा, “इस वित्त वर्ष के अंत तक राज्य का कर्ज तीन लाख करोड़ रुपये को पार कर जाएगा. रेत खनन से 20 हजार करोड़ रुपये और भ्रष्टाचार को खत्म करके 34 हजार करोड़ रुपये जैसे विभिन्न स्रोतों से राज्य का राजस्व बढ़ाने की बजाय, आप सरकार भारतीय रिजर्व बैंक सहित कई वित्तीय एजेंसियों से उधार लेती रही.
विपक्षी नेता ने कहा कि 2023 में भी पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब रही. 2022 की तरह ही 2023 में भी भीषण अपराध हुए और आप सरकार महज मूकदर्शक बनी रही. बाजवा ने कहा, "मैं पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, जिनके पास गृह विभाग भी है, से आग्रह करता हूं कि वह कमर कस लें और राज्य में संगठित अपराधों और बढ़ती बंदूक हिंसा से निपटने के लिए एक प्रभावी रणनीति बनाएं." राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि जैसे-जैसे आप और कांग्रेस के बीच लड़ाई बढ़ती जा रही है, पंजाब में आगामी लोकसभा चुनाव में उनकी सामूहिक ताकत की उम्मीदें कम होती जा रही हैं. चूंकि 21 महीने पुरानी आप सरकार सभी प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त बनाए हुए है, मान के नेतृत्व वाली सरकार के सभी विपक्षी दलों - कांग्रेस, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) - के साथ तीव्र मतभेद हैं.
मुख्यमंत्री मान कोई मौका न चूकते हुए अक्सर भाजपा और कांग्रेस पर आप सरकार को गिराने के लिए मिलकर काम करने का आरोप लगा रहे हैं. वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता पर सवार भाजपा 2024 के लोकसभा चुनावों में अपनी संभावनाओं को लेकर उत्साहित है. कांग्रेस के लिए अभी भी अपनी परछाई से उबरना बाकी है, पहले सत्तारूढ़ आप को चुनौती देनी है और फिर भगवा ब्रिगेड का मुकाबला करना है, जो अपना आधार मजबूत करने के लिए मुख्य रूप से जाट सिखों पर भरोसा कर रही है. इसके अलावा, राज्य का एक प्रमुख क्षेत्रीय संगठन एसएडी, जिसने 2021 में अपनी स्थापना के सौ साल पूरे किए, "संरचनात्मक, संगठनात्मक और यहां तक कि वैचारिक नेतृत्व के मामले में" अपने सबसे खराब संकट का सामना कर रहा है.
बड़े पैमाने पर नेताओं का पलायन हो रहा है, यहां तक कि सफेद दाढ़ी वाले शिरोमणि अकाली दल के दिग्गज भी अब अपने "पंथिक" (सिख धार्मिक) एजेंडे पर लौट रहा है, ताकि 2015 में बेअदबी की घटनाओं की प्रतिक्रिया और (अब निरस्त हो चुके) केंद्रीय कृषि कानून के शुरुआती समर्थन के बाद सिखों के अपने मूल आधार को वापस हासिल किया जा सके, खासकर ग्रामीण इलाकों में. पूर्व मुख्यमंत्री चन्नी के अलावा विजिलेंस ब्यूरो ने पूर्व उपमुख्यमंत्री ओ.पी. सोनी, पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु, साधु सिंह धर्मसोत, विजय इंदर सिंगला, ब्रह्म मोहिंदरा, संगत सिंह गिलजियां, बलबीर सिंह सिद्धू, गुरप्रीत सिंह कांगड़ और शाम सुंदर अरोड़ा सहित कई कांग्रेस नेताओं के खिलाफ जांच शुरू की है. "राजनीतिक प्रतिशोध" के आरोपों को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री मान कहते रहे हैं कि सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया है और भ्रष्टाचार में लिप्त आप के अपने लोगों सहित कई नेताओं को सलाखों के पीछे डाल दिया गया है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jan 06, 2024 04:43 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

