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Digital Arrest Scam: लखनऊ कोर्ट ने महिला डॉक्टर से 85 लाख रुपये की जबरन वसूली करने वाले साइबर फ्रॉड को 7 साल जेल की सजा सुनाई

लखनऊ की एक अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसले में एक साइबर जालसाज़ को सीबीआई अधिकारी बनकर एक महिला डॉक्टर से 85 लाख रुपये की जबरन वसूली करने और उसे 10 दिनों से ज़्यादा समय तक "डिजिटल अरेस्ट" में रखने के जुर्म में सात साल की सज़ा सुनाई है. अधिकारियों ने पुष्टि की है कि उत्तर प्रदेश में डिजिटल गिरफ़्तारी घोटाले में यह अपनी तरह का पहला मामला है...

Digital Arrest Scam: लखनऊ कोर्ट ने महिला डॉक्टर से 85 लाख रुपये की जबरन वसूली करने वाले साइबर फ्रॉड को 7 साल जेल की सजा सुनाई

लखनऊ, 18 जुलाई: लखनऊ की एक अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसले में एक साइबर जालसाज़ को सीबीआई अधिकारी बनकर एक महिला डॉक्टर से 85 लाख रुपये की जबरन वसूली करने और उसे 10 दिनों से ज़्यादा समय तक "डिजिटल अरेस्ट" में रखने के जुर्म में सात साल की सज़ा सुनाई है. अधिकारियों ने पुष्टि की है कि उत्तर प्रदेश में डिजिटल गिरफ़्तारी घोटाले में यह अपनी तरह का पहला मामला है. यह फ़ैसला विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीमा शुल्क) आलोक कुमार की अदालत ने सुनाया, जिसमें अभियुक्त देबाशीष राय को धोखाधड़ी और जालसाज़ी से जुड़ी भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी के तहत दोषी पाया गया. यह भी पढ़ें: ‘Mele Babu Ne Khana Khaya?’ फर्जी नग्न तस्वीरों का इस्तेमाल कर करता था साइबर फ्रॉड, महिला की आवाज में बात करते जालसाज का वीडियो आया सामने

अदालत ने प्रत्येक अपराध के लिए अलग-अलग सज़ाएं सुनाईं, जिनमें सबसे लंबी अवधि सात साल की थी, और कुल 68,000 रुपये का जुर्माना लगाया. डीसीपी (क्राइम) कमलेश दीक्षित के अनुसार, यह मामला पिछले साल 1 मई को शुरू हुआ जब डॉ. सौम्या गुप्ता को कस्टम अधिकारी बनकर किसी व्यक्ति ने फ़ोन किया. उन्हें झूठा बताया गया कि उनके नाम से एक पार्सल में फ़र्ज़ी दस्तावेज़, एटीएम कार्ड और प्रतिबंधित दवाइयां हैं. फिर यह कॉल सीबीआई अधिकारी बनकर एक और धोखेबाज़ को ट्रांसफर कर दी गई, जिसने उन्हें गिरफ़्तार करने की धमकी दी और 10 दिनों से ज़्यादा समय तक वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर किया. यह एक सुनियोजित चाल थी. जिसे "डिजिटल अरेस्ट" कहा जाता है. इस दौरान, आरोपी ने उनसे 85 लाख रुपये अपने बैंक खातों में जमा करवा लिए.

पुलिस ने तकनीकी निगरानी के ज़रिए राय का पता लगाया और चार दिनों के भीतर उसे गिरफ्तार कर लिया. उसने जाली दस्तावेज़ों का इस्तेमाल करके बैंक खाते खुलवाए और फर्जी पहचान के तहत सिम कार्ड हासिल किए. डीसीपी दीक्षित ने नागरिकों को सतर्क रहने, ऐसे कॉल आने पर फोन काटने तथा किसी भी खतरे की सूचना आधिकारिक साइबर अपराध हेल्पलाइन पर देने की चेतावनी दी.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 18, 2025 07:14 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).