8th Pay Commission: ₹72,000 तक न्यूनतम बेसिक पे और 6% सालाना इंक्रीमेंट की मांग; NC-JCM और BPMS ने 8वें वेतन आयोग को सौंपा नया फॉर्मूला
8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन के बाद देश भर के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हितधारकों के साथ परामर्श का दौर तेज हो गया है. इस बीच केंद्रीय कर्मचारियों के दो प्रमुख संगठनों—नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी और भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ ने आयोग को विस्तृत ज्ञापन सौंपकर न्यूनतम मूल वेतन को ₹69,000 से लेकर ₹72,000 प्रति माह करने और फिटमेंट फैक्टर को 3.833 से 4.0 तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है.
नई दिल्ली: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और पेंशन ढांचे की समीक्षा के लिए गठित 8वें वेतन आयोग की परामर्श प्रक्रिया जोर पकड़ रही है. नवंबर 2025 में आयोग के गठन के बाद से ही विभिन्न कर्मचारी महासंघों, श्रमिक संगठनों और पेंशनर्स एसोसिएशनों के साथ लगातार संवाद सत्र आयोजित किए जा रहे हैं.
आगामी बैठकों से पहले कर्मचारियों के शीर्ष संगठनों ने बढ़ती महंगाई, राष्ट्रीय प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि और पोषण संबंधी जरूरतों का हवाला देते हुए वेतन में बड़े संशोधन की औपचारिक मांग रखी है. यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission News: 8वें वेतन आयोग से केंद्र ही नहीं, राज्यों के बजट पर भी पड़ेगा असर; जानिए वित्तीय प्रभाव का पूरा पहलू
परामर्श बैठकों का दौर: बेंगलुरु और मुंबई में अगली सुनवाई
आयोग विभिन्न राज्यों में क्षेत्रीय स्तर पर जाकर कर्मचारी संगठनों और प्रशासनिक अधिकारियों के विचार दर्ज कर रहा है:
- हालिया बैठकें: आयोग ने 7-8 सितंबर को चेन्नई, 9 सितंबर को पुडुचेरी और 16 से 18 सितंबर तक चंडीगढ़ में कर्मचारी प्रतिनिधियों के साथ गहन विचार-विमर्श किया.
- अक्टूबर का कार्यक्रम: परामर्श प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए आयोग की अगली बैठकें 7-8 अक्टूबर को बेंगलुरु में और 22-23 अक्टूबर 2026 को मुंबई में निर्धारित हैं.
- इन बैठकों का उद्देश्य सेवारत कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों की वास्तविक जमीनी समस्याओं, चिकित्सा खर्चों और जीवन-यापन की लागत का आकलन करना है.
NC-JCM और BPMS की प्रमुख मांगें: तुलनात्मक विश्लेषण
कर्मचारी महासंघों ने न्यूनतम वेतन निर्धारण के लिए अलग-अलग वैज्ञानिक और आर्थिक फॉर्मूलों का आधार लिया है:
| कर्मचारी संगठन | प्रस्तावित न्यूनतम बेसिक पे | प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर | प्रस्तावित वार्षिक वेतन वृद्धि | गणना का मुख्य आधार व प्रस्ताव |
| NC-JCM (नेशनल काउंसिल) | ₹69,000 | 3.833 | 6 प्रतिशत (वर्तमान में 3%) | आईसीएमआर (ICMR) के 3,490 कैलोरी पोषण फॉर्मूले पर आधारित मजदूरी; लेवल 13 तक एकीकृत पे-मैट्रिक्स। |
| BPMS (भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ) | ₹72,000 | 4.0 | 6 प्रतिशत (वर्तमान में 3%) | प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय में वृद्धि (2016-17 से 2024-25 के बीच 86.76% की बढ़ोतरी) और 5-सदस्यीय परिवार इकाई। |
कैलोरी मानदंड और राष्ट्रीय आय वृद्धि का दिया हवाला
दोनों संगठनों ने अपनी मांगों के पक्ष में ठोस आर्थिक तथ्य प्रस्तुत किए हैं:
- एनसी-जेसीएम का पोषण मॉडल: जेसीएम ने भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के शारीरिक श्रम के लिए आवश्यक 3,490 कैलोरी के मानक को आधार बनाया है. संगठन का कहना है कि संतुलित आहार, बच्चों की उच्च शिक्षा, आवास किराया और वस्त्रों के वास्तविक बाजार भाव को देखते हुए ₹69,000 से कम का न्यूनतम वेतन वर्तमान दौर में अपर्याप्त है.
- बीपीएमएस का 5-यूनिट और जीडीपी मॉडल: बीपीएमएस ने तर्क दिया है कि 2016-17 से 2024-25 के दौरान देश की प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय में 76 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि हुई है, जिसका लाभ सरकारी कर्मचारियों को भी मिलना चाहिए. इसके अलावा, आश्रित माता-पिता को शामिल करते हुए परिवार की न्यूनतम उपभोग इकाई को 3 से बढ़ाकर 5 करने की सिफारिश की गई है.
- 6% सालाना इंक्रीमेंट: दोनों यूनियनों का एकमत मानना है कि 3% की मौजूदा वार्षिक वेतन वृद्धि मुद्रास्फीति की दर को मात देने में असमर्थ है, इसलिए इसे बढ़ाकर अनिवार्य रूप से 6% किया जाना चाहिए.
सिफारिशों की वर्तमान स्थिति: अंतिम फैसला सरकार का
प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारी संगठनों द्वारा प्रस्तुत किए गए ये आंकड़े शुरुआती ज्ञापन (Memorandums) और प्रस्ताव हैं, अंतिम निर्णय नहीं:
- ₹69,000 या ₹72,000 का न्यूनतम वेतन और 833 से 4.0 का फिटमेंट फैक्टर यूनियनों की अपेक्षाओं को दर्शाता है.
- 8वां वेतन आयोग सभी राज्यों, केंद्रीय मंत्रालयों, वित्तीय सलाहकारों और राजकोषीय स्थिति (Fiscal Outlay) का समग्र अध्ययन करने के बाद अपनी सिफारिशें तैयार करेगा.
- आयोग की अंतिम रिपोर्ट वित्त मंत्रालय को सौंपी जाएगी, जिसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल (Cabinet) की मंजूरी मिलने पर ही नए वेतनमान लागू होंगे.