Delhi Building Collapse: दिल्ली हादसे में मलबे में दबे क्षितिज प्रताप के लिए वरदान बना एक फोन कॉल, ऐसे बची जान

दिल्ली के सादुलाजाब इलाके में शनिवार को हुए दर्दनाक इमारत हादसे में मलबे के नीचे दबे 25 वर्षीय क्षितिज प्रताप की जान एक फोन कॉल और उनकी कलाई पर बंधी घड़ी की वजह से बच गई. इस हादसे में 6 लोगों की मौत हुई है.

(Photo Credits Pixabay)

Delhi Building Collapse: दिल्ली के सादुलाजाब (Saidulajab) इलाके में शनिवार, 31 मई को हुए बहुमंजिला इमारत हादसे में कई जिंदगियां तबाह हो गईं. इस दर्दनाक हादसे में जहां 6 लोगों की मौत हो गई और 10 अन्य घायल हो गए, वहीं मलबे के बीच से चमत्कारिक रूप से बच निकले 25 वर्षीय क्षितिज प्रताप की आपबीती रोंगटे खड़े कर देने वाली है. मलबे के नीचे बुरी तरह दबे होने के बावजूद क्षितिज ने सूझबूझ दिखाई और अपने मोबाइल से दोस्त को फोन कर लोकेशन बताई. इसके बाद उनकी कलाई की घड़ी को देखकर दोस्तों ने उन्हें समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया.

कैंटीन पर गिर गई थी निर्माणाधीन इमारत

एम्स (AIIMS) ट्रॉमा सेंटर के अस्पताल के बिस्तर से आपबीती सुनाते हुए क्षितिज प्रताप ने बताया कि शनिवार शाम करीब 7:25 बजे वह साकेत मेट्रो स्टेशन के पास एक कैंटीन में रात का खाना खा रहे थे. इसी दौरान पास की एक चार मंजिला इमारत अचानक ढह गई, जिस पर दो अतिरिक्त मंजिलों का अवैध निर्माण चल रहा था. पूरी इमारत का मलबा उस कैंटीन पर आ गिरा जहां छात्र खाना खा रहे थे.

मलबे में दबे हाथ और एक फोन कॉल ने बचाई जान

क्षितिज के अनुसार, मलबे की भारी चपेट में आने से उनका पैर एक भारी वस्तु के नीचे दब गया था और वह हिलने-डुलने में असमर्थ थे. भाग्यवश, एक टिन शेड के कारण वहां एक छोटा सा एयर पॉकेट बन गया, जिससे उन्हें सांस लेने में मदद मिली. उनका एक हाथ मलबे से थोड़ा बाहर था.

क्षितिज ने बताया, "मुझे अहसास हो गया था कि स्थिति बहुत गंभीर है. मैंने पूरी ताकत लगाकर मलबे से अपना फोन निकाला और अपने एक दोस्त को कॉल किया. मैंने उसे बताया कि मैं जिंदा हूं और इस जगह पर दबा हुआ हूं."

सूचना मिलते ही क्षितिज के दोस्त और स्थानीय निवासी तुरंत मौके पर पहुंचे और मलबे में उनकी तलाश शुरू की. मलबे से बाहर निकले क्षितिज के हाथ और उसमें बंधी कलाई घड़ी को देखकर दोस्तों ने उन्हें पहचान लिया. इसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से आधे घंटे से भी कम समय में उन्हें बाहर निकाल लिया गया. समय पर मिले इस रेस्क्यू के कारण उनकी जान बच गई, हालांकि उनके पैर में गंभीर चोटें आई हैं.

हादसे में 6 होनहार युवाओं की मौत

इस हादसे ने कई परिवारों को कभी न भूलने वाला गम दिया है. मलबे को हटाने के दौरान प्रशासन ने अब तक 70 से अधिक ट्रक मलबा हटा दिया है. इस हादसे में जान गंवाने वाले 6 लोगों की पहचान हो चुकी है:

इसके अलावा, एक अन्य जीवित बचे 24 वर्षीय आदित्य शर्मा के पैर में फ्रैक्चर आया है, जबकि उनके कई दोस्त अभी भी आईसीयू (ICU) में जीवन और मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं.

बगल की इमारत झुकने से संकट में 150 छात्रों का भविष्य

इस हादसे का असर पड़ोस की उस इमारत पर भी पड़ा है जहां एक बड़ी लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर संचालित हो रहा था. पुलिस के अनुसार, मुख्य इमारत गिरने के प्रभाव से बगल की इमारत भी एक तरफ झुक गई है और वह कभी भी गिर सकती है. सुरक्षा कारणों से उस इमारत को सील कर दिया गया है.

इस फैसले से वहां पढ़ने वाले 150 से अधिक छात्रों का भविष्य संकट में पड़ गया है. असम की रहने वाली अटलांटा, जो 28 जून को होने वाली फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) की तैयारी कर रही हैं, ने बताया कि भगदड़ के दौरान उनका लैपटॉप, मोबाइल, किताबें और सभी जरूरी नोट्स उसी लाइब्रेरी में छूट गए. अगर उन्हें ये दस्तावेज जल्दी नहीं मिले, तो उनकी सालों की पढ़ाई खराब हो जाएगी.

फिलहाल, पुलिस ने मलबे की सफाई के दौरान 23 लैपटॉप बरामद किए हैं, जिन्हें सुरक्षित थाने में रखा गया है. एनडीआरएफ (NDRF) और स्थानीय प्रशासन की टीमें मलबे को पूरी तरह साफ करने और क्षेत्र को सुरक्षित घोषित करने तक अपना खोजी अभियान जारी रखेंगी.

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