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Delhi High Court: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को दस साल की जेल

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2010 में स्कूल से घर लौट रही नाबालिग के साथ एक सार्वजनिक शौचालय में दुष्कर्म करने के आरोपी व्यक्ति को बरी करने के निचली अदालत के फैसले को शुक्रवार को पलट दिया। उच्च न्यायालय ने संबंधित व्यक्ति को दोषी करार देते हुए उसे दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

Delhi High Court: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को दस साल की जेल
Representational Image (Photo Credit : PTI)

नौ सितंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2010 में स्कूल से घर लौट रही नाबालिग के साथ एक सार्वजनिक शौचालय में दुष्कर्म करने के आरोपी व्यक्ति को बरी करने के निचली अदालत के फैसले को शुक्रवार को पलट दिया. उच्च न्यायालय ने संबंधित व्यक्ति को दोषी करार देते हुए उसे दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई. न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता और न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्ण की पीठ ने दोषी को पीड़िता को 50,000 रुपये का मुआवजा देने का निर्देश भी दिया. यह भी पढ़ें: संतकबीरनगर में बड़ा हादसा, पूजा सामग्री विसर्जित करने गए 4 बच्चों की नदी में डूबने से मौत

पीठ ने कहा कि निचली अदालत का आदेश ‘बरकरार रखने योग्य नहीं’ था, क्योंकि अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ अपने मामले को उचित संदेह से परे स्थापित किया है. उच्च न्यायालय ने कहा, “निचली अदालत ने ‘मुख्य रूप से पीड़िता के बयान में विरोधाभास’ के आधार पर अपना फैसला सुनाया। उसने पीड़िता को एक प्रशिक्षित गवाह करार देकर गंभीर त्रुटि की है.”

पीठ ने कहा कि पीड़िता का बयान ‘विश्वसनीय एवं भरोसेमंद’ था और उसके तथा कुछ अन्य गवाहों के बयानों के बीच मामूली विरोधाभास के आधार पर इसे खारिज करने का कोई कारण नहीं था. उच्च न्यायालय ने कहा, “सबूतों और रिकॉर्ड पर मौजूद अन्य दस्तावेजों पर विचार करने पर हम पाते हैं कि पीड़िता का बयान सीधा, स्पष्ट और स्वाभाविक है. पीड़िता के बयान ने अभियोजन पक्ष के मामले का पूरा समर्थन किया है। गवाहों के बयान में विरोधाभास आम प्रकृति के हैं, जिनसे अभियोजन पक्ष के मामले पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता,”

पीठ ने कहा, “हम सत्र न्यायालय के निर्णय को कानून की दृष्टि से बरकरार रखने योग्य नहीं मानते हैं. सत्र न्यायालय द्वारा अभियुक्त को बरी करने का निर्णय खारिज किया जाता है। नतीजतन, प्रतिवादी को दोषी ठहराया जाता है और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा-376 के तहत दंडनीय अपराध के लिए दोषी ठहराया जाता है.”

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(The above story first appeared on LatestLY on Sep 09, 2022 09:18 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).