Yamuna Idol Immersion Ban: दिल्ली में यमुना और प्राकृतिक जलस्रोतों में मूर्ति विसर्जन पर पूर्ण रोक; नियम तोड़ा तो लगेगा ₹50,000 का जुर्माना

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने राजधानी में गणेशोत्सव और आगामी दुर्गा पूजा उत्सवों के मद्देनजर यमुना नदी सहित सभी प्राकृतिक जलाशयों, झीलों और तालाबों में मूर्तियों के विसर्जन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 33A के तहत जारी आदेश के अनुसार, मूर्ति विसर्जन की अनुमति केवल स्थानीय निकायों द्वारा चिन्हित कृत्रिम तालाबों और निर्धारित स्थलों पर ही होगी.

Delhi Bans Idol Immersion in Yamuna (Photo Credits: PTI)

नई दिल्ली: गणेशोत्सव और आगामी शारदीय दुर्गा पूजा के दौरान राजधानी में पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने कड़ा रुख अपनाया है.  डीपीसीसी ने एक वैधानिक आदेश जारी करते हुए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में यमुना नदी और अन्य सभी प्राकृतिक जलस्रोतों में प्रतिमा विसर्जन पर पूर्ण रोक लगा दी है.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह निर्देश 'जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974' की धारा 33A के तहत जारी किया गया है. निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति, समिति या संगठन यमुना या अन्य जलस्रोतों में अनाधिकृत रूप से मूर्ति विसर्जित करता पाया गया, तो उस पर ₹50,000 का पर्यावरण जुर्माना (Environmental Compensation) लगाया जाएगा और अधिनियम की धारा 41 के तहत दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है. यह भी पढ़ें: Ganeshotsav 2026: मुंबई में डेढ़ दिन के बप्पा का विसर्जन शुरू; पहले दिन दोपहर तक शांतिपूर्ण ढंग से 79 मूर्तियों का हुआ विसर्जन

चिन्हित कृत्रिम तालाबों में ही होगा विसर्जन

Hindustan Times की रिपोर्ट के मुताबिक, त्योहारों की धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए नागरिक निकायों को वैकल्पिक व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं:

प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) और जहरीले रंगों पर रोक

पर्यावरण निगरानी संस्था ने मूर्ति निर्माताओं और विक्रेताओं के लिए भी सख्त मानक निर्धारित किए हैं:

दिल्ली पुलिस और नगर निगम करेंगे निगरानी, सीमाओं पर चेकिंग

आदेशों का कड़ाई से अनुपालन कराने के लिए प्रशासनिक एजेंसियों को सक्रिय किया गया है:

CPCB की 2020 की गाइडलाइंस पर आधारित है फैसला

यह प्रतिबंध केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा मई 2020 में जारी संशोधित दिशा-निर्देशों और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के ऐतिहासिक आदेशों के अनुरूप लागू किया गया है.

डीपीसीसी ने स्पष्ट किया है कि विसर्जन अवधि के दौरान जल गुणवत्ता की निगरानी के लिए तीन चरणों—विसर्जन से पहले, विसर्जन के दौरान और विसर्जन के बाद—में यमुना और चिन्हित कुंडों के पानी के नमूने लेकर बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD), चालकता और भारी धातुओं के संकेंद्रण की वैज्ञानिक जांच की जाएगी. इस पहल का उद्देश्य आस्था के उत्सवों का सम्मान करते हुए यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाए रखना है.

Share Now