PM Modi Facebook Post Row: पीएम मोदी की पोस्ट पर बैन से भड़की केंद्र सरकार; Meta के उच्चाधिकारियों को तलब कर मांगा जवाब
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फेसबुक पोस्ट पर अस्थायी रोक लगाए जाने के मामले में केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. आईटी मंत्रालय ने मेटा के शीर्ष अधिकारियों को तलब कर 7 से 10 दिनों के भीतर तकनीकी व नीतिगत स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है.
PM Modi Facebook Post Row: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की फेसबुक पोस्ट को अस्थायी रूप से ब्लॉक किए जाने के मामले में केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया दिग्गज प्लेटफॉर्म 'मेटा' (Meta) के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology) (MeitY) ने मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों को आगामी 7 से 10 दिनों के भीतर सरकार के सामने पेश होकर लिखित और मौखिक स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं.
आईटी सचिव एस. कृष्णन ने गुरुवार (30 जुलाई 2026) को बताया कि सरकार इस पूरी घटना का नीतिगत (Policy-level) और तकनीकी (Technical) विश्लेषण चाहती है, ताकि भविष्य में इस तरह की चूक दोबारा न हो. यह भी पढ़ें: NEET Row: ‘पीएम मोदी पद छोड़कर इन्फ्लुएंसर बन जाएं’; नीट विरोध प्रदर्शन के बीच CJP संस्थापक अभिजीत दिपके का बड़ा बयान
क्या था विवादित मामला?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई को देश के युवाओं को संबोधित करते हुए एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक रोके जाने और नए कानूनों के तहत की जा रही सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया था.
मेटा के ऑटोमेटेड कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम (AI Filters) ने इस पोस्ट पर 'क्षेत्रीय प्रतिबंध' (Regional Restriction) लागू कर दिया, जिससे यूज़र्स को यह संदेश दिखने लगा कि पोस्ट उपलब्ध नहीं है. यद्यपि मेटा ने कुछ ही समय बाद इसे बहाल कर दिया और गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी, लेकिन केंद्र सरकार ने मेटा के शुरुआती स्पष्टीकरण को नाकाफी और असंतोषजनक करार दिया.
आईटी सचिव का बयान और मेटा की सफाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए आईटी सचिव एस. कृष्णन ने स्पष्ट किया कि सरकार केवल माफी से संतुष्ट नहीं है और मेटा के वैश्विक अधिकारियों को उच्च स्तर पर जवाब देना होगा.
"मेटा ने इस घटना पर खेद व्यक्त किया है और अपनी गलती मानी है. उन्होंने प्रारंभिक कारणों की जानकारी भी दी है. हालांकि, भारत सरकार इस मामले की तह तक जाना चाहती है. हमने उनके शीर्ष नेतृत्व को 7 से 10 दिनों में आकर यह समझाने को कहा है कि यह तकनीकी खामी कैसे हुई और इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं."
मेटा ने सरकार को सूचित किया है कि उसने 28 जुलाई से एक नया प्रोटोकॉल लागू किया है, जिसके तहत वीआईपी, संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों और उच्च-स्तरीय प्रोफाइल अकाउंट्स (High-Profile Accounts) की सुरक्षा के लिए विशेष निगरानी (Ringfencing) प्रणाली बनाई गई है.
संसद सत्र के बीच बढ़ा तकनीकी और राजनीतिक घमासान
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब संसद के भीतर पेपर लीक रोके जाने संबंधी कानून और छात्र विरोध प्रदर्शनों को लेकर तीखी बहस चल रही है.
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यदि एआई और ऑटोमेटेड फिल्टर के कारण ऐसी गलती हुई है, तो मेटा जैसी बड़ी वैश्विक टेक कंपनी को अपने टूल्स और मॉडरेशन सिस्टम में तत्काल सुधार करना होगा. सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भारतीय संवैधानिक संस्थाओं और शीर्ष नेतृत्व के आधिकारिक संदेशों पर किसी भी प्रकार का अनधिकृत हस्तक्षेप न हो.