चीन-पाक-बांग्लादेश का गठजोड़ खतरनाक! बदल रहे युद्ध के तरीके, भारत के लिए CDS चौहान का अलर्ट
CDS जनरल अनिल चौहान ने चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के संभावित गठजोड़ को भारत की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया है. उन्होंने कहा कि भारत बाहरी और भीतरी दोनों मोर्चों पर दबाव में है, और भविष्य के युद्ध साइबर व ड्रोन जैसे नए तरीकों से लड़े जाएंगे, जिनके लिए भारत को हर स्तर पर तैयारी बढ़ानी होगी.
भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने हाल ही में देश की सुरक्षा को लेकर कुछ बड़ी चिंताएं जाहिर की हैं. उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच कोई भी संभावित गठजोड़ भारत की स्थिरता और सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है. जनरल चौहान का मानना है कि भारत इस समय बाहरी और भीतरी, दोनों मोर्चों पर काफी दबाव में है.
क्या है CDS की चिंता का मुख्य कारण?
8 जुलाई को एक थिंक-टैंक कार्यक्रम में बोलते हुए, CDS अनिल चौहान ने बताया कि अगर इन तीनों देशों के बीच किसी भी तरह का रणनीतिक सहयोग होता है, तो उसका सीधा असर भारत की सुरक्षा पर पड़ेगा. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन तीनों देशों के साझा हित भारत के लिए एक रणनीतिक खतरा बन सकते हैं, खासकर तब जब बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति अस्थिर है और वहां की प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में शरण ले चुकी हैं. यह स्थिति भारत के लिए और भी संवेदनशील हो जाती है.
'ऑपरेशन सिंदूर' और भारत की परमाणु नीति
CDS जनरल अनिल चौहान ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को दुनिया के सामने एक बड़ा उदाहरण बताया. उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों के आने के बाद दुनिया में सैकड़ों छोटे-बड़े संघर्ष हुए हैं, लेकिन यह पहली बार था जब दो परमाणु हथियार संपन्न देश सीधे संघर्ष में शामिल थे. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अपने आप में अनोखा है और यह न केवल इस उपमहाद्वीप के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक सबक साबित हो सकता है.
उन्होंने भारत की "पहले इस्तेमाल न करने" (No First Use) की परमाणु नीति को एक बड़ी ताकत बताया. जनरल चौहान के अनुसार, इसी नीति के कारण भारत पाकिस्तान के परमाणु ब्लैकमेलिंग से निपटने में सफल रहा.
उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने अपनी रोकथाम नीति के तहत आतंकवादी हमलों के जवाब में आतंकवादी शिविरों को नष्ट किया. इसे बदला कहा जा सकता है, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य भविष्य में होने वाले हमलों को रोकना था. उन्होंने आगे बताया कि पाकिस्तान ने इस संघर्ष को पूरी तरह से पारंपरिक युद्ध के दायरे में ही रखा, जिससे उनके परमाणु संघर्ष बढ़ाने के विकल्प सीमित हो गए.
आने वाली चुनौतियां और तैयारी
CDS जनरल अनिल चौहान ने भविष्य की चुनौतियों पर भी बात की. उन्होंने कहा कि अब युद्ध के तरीके बदल चुके हैं. युद्ध अब केवल सीमा पर नहीं लड़े जाते, बल्कि साइबर हमले, इलेक्ट्रॉनिक हथियार, ड्रोन, मिसाइल और हाइपरसोनिक हथियार के जरिए भी लड़े जा रहे हैं. उन्होंने चिंता जताई कि इन सभी मोर्चों पर अभी तक दुनिया के पास कोई फुल-प्रूफ डिफेंस सिस्टम नहीं है. इसलिए, भारत को हर स्तर पर अपनी तैयारी और मजबूत करनी होगी.
कुल मिलाकर, CDS जनरल अनिल चौहान का यह बयान भारत की सुरक्षा चुनौतियों को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत है. यह बताता है कि हमें केवल पारंपरिक युद्ध के लिए ही नहीं, बल्कि भविष्य की हाई-टेक चुनौतियों और बदलती भू-राजनीतिक स्थितियों के लिए भी तैयार रहना होगा.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 09, 2025 01:42 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

