कश्मीर में एलओसी पर बीएसएफ को स्टील से बने 100 से अधिक आवास मिलेंगे
सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को जल्द ही जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर स्टील से बने 100 से अधिक मिश्रित आवास मिलेंगे. बीएसएफ अधिकारियों ने शुक्रवार को आईएएनएस को यह जानकारी दी.
नई दिल्ली, 29 जनवरी : सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को जल्द ही जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर स्टील से बने 100 से अधिक मिश्रित आवास मिलेंगे. बीएसएफ अधिकारियों ने शुक्रवार को आईएएनएस को यह जानकारी दी. अधिकारियों के मुताबिक, बीएसएफ अपने जवानों को खराब मौसम से बचाने के लिए एलओसी के पास उच्च ऊंचाई वाले फॉरवर्ड डिफेंस लोकेलिटीज (एफडीएल) में 100 से अधिक स्टील फैब्रिकेटेड कंटेनर स्थापित करने की प्रक्रिया में है, जिसमें रसोई और शौचालय अटैच होंगे. उन्होंने कहा कि इनकी कुल लागत लगभग 35 करोड़ रुपये होगी. बीएसएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, इन स्टील आवासों को अंदर से इन्सुलेट किया जाएगा, चारपाई की सुविधा होगी और इनमें सौर और जनरेटर उत्पादित बिजली की आपूर्ति होगी. ये एफडीएल स्थान 8,000 फीट से 15,500 फीट तक होंगे.
इन यूनिट्स के लिए प्रस्ताव गृह मंत्रालय को भेजा गया है, जिसने इसे सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी है. वित्तीय स्वीकृति के लिए आगे की प्रक्रिया चल रही है. बीएसएफ के अधिकारियों ने इन एफडीएल के लिए सौर ऊर्जा परियोजनाओं को मंजूरी दिलाने के लिए दिल्ली में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किया है, जिसे मंजूरी भी मिल चुकी है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में इन स्थानों पर खाना पकाने और दैनिक स्नान सहित सभी गतिविधियां मिट्टी के तेल और डीजल से प्राप्त बिजली का उपयोग करके की जाती हैं. इन आगामी आवासों में एक समय में कम से कम 12 सैनिकों को समायोजित किया जाएगा और अटैच रसोई में सबसे खराब और कठोर परिस्थितियों में भी ताजा पका हुआ भोजन परोसने की सभी सुविधाएं होंगी. रसोई और शौचालय मुख्य लीविंग हट्स से जुड़े होंगे. यह भी पढ़ें : UP Election 2022: अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जेब से निकाली लाल पोटली, कहा- यह ‘अन्न’ संकल्प भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकेगी
अब तक, इन बफीर्ले स्थानों पर 8,000 फीट से16,000 फीट की ऊंचाई पर सैनिक अपने राशन और हथियारों के साथ नालीदार जस्ती लोहे की चादर से बनी हट्स में रहते हैं, जिससे उन्हें शून्य से नीचे तापमान में परेशानी होती है. मौसम के कारण, क्षेत्र साल में औसतन पांच से सात महीने बर्फ से ढके रहते हैं. बीएसएफ ने इन स्टील से बनी हट्स के डिजाइन को पहले ही अंतिम रूप दे दिया है, जिसमें मनोरंजन प्रणाली (एंटरटेनमेंट सिस्टम) भी प्रदान की जाएगी. अधिकारियों ने बताया कि सरकार से अंतिम मंजूरी मिलते ही इन हट्स का निर्माण सबसे पहले ऊंचाई वाले इलाकों में शुरू होगा. उन्हें उम्मीद है कि मई-जून से निर्माण कार्य शुरू हो सकता है.
अधिकारी ने कहा कि डिजाइन को अंतिम रूप देने से पहले, उन्होंने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की समग्र सीमा चौकियों (बीओपी) और उच्च ऊंचाई पर तैनात सेना का मूल्यांकन किया है, ताकि उन्हें आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा सके. बीएसएफ का यह कदम पिछले साल नवंबर में महानिदेशक पंकज कुमार सिंह के इन स्थानों के दौरे के बाद आया है और अनुमोदन के लिए एमएचए को एक प्रस्ताव भेजा गया था और एमएचए ने इसे मंजूरी दे दी है. नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा स्थापित किए जाने वाले सौर ऊर्जा पैनल, खाना पकाने और अन्य जरूरतों के लिए सैनिकों द्वारा डीजल और मिट्टी के तेल के भारी उपयोग के कारण उत्पन्न कार्बन फुटप्रिंट्स और प्रदूषण को कम करने में मदद करेंगे.
जम्मू-कश्मीर सुरक्षा ग्रिड में तैनात केंद्रीय सुरक्षा बलों के एक अधिकारी ने कहा, मौजूदा परिस्थितियों में पांच से सात महीने से अधिक समय तक जीवित रहना और सीमाओं की रक्षा करना वास्तव में बहुत कठिन है, क्योंकि मौसम अपने आप में एक मजबूत दुश्मन है. उन्होंने कहा कि एक बार इन ऊंचाई पर स्टील के आवास स्थापित हो जाने के बाद, सैनिक बेहतर तरीके से और अधिक सतर्कता के साथ सीमाओं की रक्षा कर सकेंगे. एलओसी के अलावा, बीएसएफ को जम्मू से पंजाब, राजस्थान और देश के पश्चिमी हिस्से में गुजरात तक, भारत-पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा के लगभग 2289 किलोमीटर की रक्षा करने का काम सौंपा गया है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jan 29, 2022 10:13 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

