बद्रीनाथ मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: सीएम धामी बोले- 'गोहत्या और माता-पिता की हत्या जैसा महापाप, बख्शे नहीं जाएंगे दोषी'
पुष्कर सिंह धामी (Photo Credits: IANS)

हरिद्वार: उत्तराखंड (Uttarakhand) के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Chief Minister Pushkar Singh Dhami) ने प्रसिद्ध श्री बद्रीनाथ मंदिर (Badrinath Temple) में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे और दान की रकम में हुई कथित हेराफेरी के मामले में बेहद कड़ा रुख अपनाया है. बुधवार, 8 जुलाई 2026 को हरिद्वार में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने इस कृत्य की घोर निंदा की. उन्होंने स्पष्ट और कड़े शब्दों में कहा कि आस्था के केंद्र में चोरी करना "गोहत्या और अपने माता-पिता की हत्या करने" जैसा महापाप है, जिसे किसी भी कीमत पर क्षमा नहीं किया जा सकता. सीएम धामी ने जनता और श्रद्धालुओं को आश्वस्त किया कि इस मामले की गहन जांच की जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, कानून उसके खिलाफ पूरी सख्ती से काम करेगा. यह भी पढ़ें: Badrinath Yatra 2026 Travel Guide: कपाट खुलने के साथ ही बद्रीनाथ धाम में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब; सड़क, रेल और हवाई मार्ग की पूरी जानकारी

"यह गोहत्या और माता-पिता के वध जैसा अक्षम्य अपराध है"

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हरिद्वार में प्रसिद्ध कथावाचक मोरारी बापू की 'श्री राम कथा' के समापन समारोह में शामिल होने पहुंचे थे. वहां मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, "मंदिर के चढ़ावे में किसी भी तरह की गड़बड़ी करने वाले को बख्शा नहीं जाएगा. इसके लिए एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर दी गई है और पुलिस ने अपनी प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है."

भावुक और सख्त लहजे में सीएम ने आगे कहा, "यह गोहत्या के समान पाप है. यह अपने ही माता-पिता की हत्या करने जैसा एक बहुत बड़ा पाप है. इस तरह के अपराध को कभी माफ नहीं किया जा सकता. कानून अपना काम करेगा और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा भुगतनी होगी." जब उनसे पूछा गया कि क्या भविष्य में ऐसी चोरियों को रोकने के लिए मंदिरों के लिए कोई नया कड़ा कानून या प्रावधान लाया जाएगा, तो उन्होंने कहा कि गठित की गई समिति मंदिर के चढ़ावे के उचित प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर कदम उठाए जाएंगे.

बीकेटीसी (BKTC) अध्यक्ष के निजी सहायक पर केस दर्ज

इस बीच, श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) की लिखित शिकायत के बाद चमोली जिले के बद्रीनाथ पुलिस स्टेशन में मंदिर के चढ़ावे के गबन को लेकर एक आधिकारिक आपराधिक मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. इस मामले में सबसे बड़ी गाज बीकेटीसी (BKTC) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के कार्यालय में तैनात निजी सहायक (Personal Assistant) प्रमोद नौटियाल पर गिरी है. विभागीय जांच और सस्पेंशन (निलंबन) के बाद अब पुलिस ने उनके खिलाफ नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है.

बद्रीनाथ पुलिस स्टेशन में बीकेटीसी के मंदिर अधिकारी युद्धवीर पुष्पवान द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर एफआईआर नंबर 0006 दर्ज की गई है. पुलिस ने आरोपी प्रमोद नौटियाल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 306 (लोक सेवक या क्लर्क द्वारा चोरी) और धारा 316(5) (आपराधिक विश्वासघात का गंभीर मामला) के तहत मुकदमा दर्ज कर अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है.

केवल 30 मिनट के भीतर गायब की गई थी दान की रकम

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब 2 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया पर बद्रीनाथ मंदिर के दान कूपन और थाली भेंट (चढ़ावा) की गिनती के दौरान वित्तीय अनियमितताओं के आरोप और वीडियो वायरल होने लगे. इसके तुरंत बाद मंदिर समिति ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए चार सदस्यीय आंतरिक जांच समिति का गठन किया था.

समिति की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में सामने आया कि 2 जुलाई को जब मंदिर के चढ़ावे की गिनती चल रही थी, तब आरोपी प्रमोद नौटियाल ने सुबह 9:00 बजे से 9:30 बजे के बीच (महज 30 मिनट की अवधि में) दान केंद्र से अवैध और अनधिकृत रूप से मंदिर के फंड (नकदी) को अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए निकाल लिया था.

15 दिनों के भीतर सरकार को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

जांच में सबूत मिलने के बाद बीकेटीसी ने 7 जुलाई को ही नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था, ताकि वह अपने पद का दुरुपयोग करके जांच और सीसीटीवी (CCTV) फुटेज जैसे सबूतों के साथ कोई छेड़छाड़ न कर सके. निलंबन अवधि के दौरान उसे जोशीमठ कार्यालय से संबद्ध किया गया है.

इस बीच, मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड शासन के पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल के आदेश पर राज्य सरकार ने भी तीन सदस्यीय एक अलग उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच समिति का गठन कर दिया है. गढ़वाल कमिश्नर आनंद स्वरूप की अध्यक्षता वाली यह समिति इस समय मंदिर के पिछले 40 दिनों के सीसीटीवी फुटेज और वित्तीय रिकॉर्ड्स की जांच कर रही है. समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट और मंदिर की पारदर्शिता बढ़ाने के सुझाव सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है.