BSP Political Turmoil: मायावती की 'संन्यास' वाली सलाह के बाद अशोक सिद्धार्थ ने छोड़ी राजनीति; कहा- 'आकाश आनंद को कभी नहीं बहकाया, बहनजी का आदेश सर्वोपरि'

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती द्वारा राजनीति से संन्यास लेने की सार्वजनिक सलाह दिए जाने के ठीक एक दिन बाद, पार्टी से निष्कासित पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ ने सक्रिय राजनीति और सार्वजनिक जीवन से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है. बुधवार को मायावती ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा था कि यदि सिद्धार्थ अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं त्यागकर राजनीति से पूरी तरह अलग हो जाते हैं, तभी उनके दामाद और मायावती के भतीजे आकाश आनंद के लिए पार्टी में वापसी और स्वतंत्र रूप से कार्य करने के रास्ते खुल सकते हैं.

Ashok Siddharth and BSP chief Mayawati (Photo Credits:ANI/Facebook)

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के भीतर चल रहे संगठनात्मक और पारिवारिक विवाद के बीच पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक सिद्धार्थ ने गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को सक्रिय राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास (Retirement) लेने का औपचारिक ऐलान कर दिया.

यह घोषणा बसपा प्रमुख मायावती के उस बयान के 24 घंटे के भीतर आई है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट शर्त रखी थी कि अशोक सिद्धार्थ के राजनीति छोड़ने पर ही उनके दामाद और मायावती के भतीजे आकाश आनंद को पार्टी में जिम्मेदारियां लौटाने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा. यह भी पढ़ें: छात्र आंदोलनों को हाईजैक करने की साजिश: मायावती ने Gen Z और युवाओं को BJP-कांग्रेस से सतर्क रहने की दी चेतावनी

'बहनजी का आदेश सर्वोपरि, उनके लिए जान भी दे सकता हूं': अशोक सिद्धार्थ

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पत्र साझा करते हुए अशोक सिद्धार्थ ने मायावती को अपनी "राजनीतिक मार्गदर्शक और बड़ी बहन" बताया:

आकाश आनंद को गुमराह करने और नियंत्रण के आरोपों पर सफाई

सिद्धार्थ पर पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा आरोप लगाए गए थे कि वे संगठन पर प्रभाव जमाने की कोशिश कर रहे थे और आकाश आनंद को गुमराह कर रहे थे। इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए सिद्धार्थ ने स्पष्टीकरण दिया:

बीएसपी से निकाले गए नेता अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति छोड़ी

मायावती ने रखी थी संन्यास की सख्त शर्त

इससे पहले बुधवार, 9 सितंबर को बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया पर कड़ा संदेश जारी करते हुए अशोक सिद्धार्थ को निशाने पर लिया था:

बसपा में पारिवारिक व संगठनात्मक खींचतान की पृष्ठभूमि

यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब कुछ ही दिन पहले, 3 सितंबर को लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय बैठक के दौरान मायावती ने आकाश आनंद को 'अपरिपक्व' बताते हुए नेशनल कोऑर्डिनेटर के पद से हटा दिया था. इससे पहले 2 अगस्त को पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप में अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निष्कासित किया गया था.

अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति से किनारा कर लिए जाने के बाद अब उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या बसपा प्रमुख मायावती आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए आकाश आनंद को दोबारा मुख्यधारा की राजनीति में वापस लाकर कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपती हैं या नहीं.

Share Now