'वेलकम टू द जंगल' मूवी रिव्यू: अक्षय कुमार-सुनील शेट्टी के एक्शन और कॉमेडी से सजी ये फिल्म करती है लोटपोट
यदि आप सिनेमाघर में एक ऐसी फिल्म की तलाश में जा रहे हैं जिसके लिए तेज दिमाग की नहीं, बल्कि हंसते-हंसते पेट मजबूत करने की जरूरत हो, तो 'वेलकम टू द जंगल' आपके लिए ही बनी है. अहमद खान के निर्देशन में बनी यह फिल्म अपने विशाल कलाकारों के साथ पूरा न्याय करती है और दोस्तों व परिवार के साथ देखने के लिए एक परफेक्ट वीकेंड टॉनिक साबित होती है.
'Welcome to the Jungle' Movie Review: करीब 2 घंटे 45 मिनट की समय अवधि वाली ‘वेलकम टू द जंगल’ (Welcome to the Jungle) का निर्माण फिरोज नाडियाडवाला और बेस इंडस्ट्रीज ग्रुप के बैनर तले किया गया है, जबकि इसके निर्देशन की कमान मशहूर निर्देशक अहमद खान ने संभाली है. इस फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी इसकी विशाल और दिग्गज स्टारकास्ट है, जिसमें खिलाड़ी अक्षय कुमार की कप्तानी के साथ सुनील शेट्टी, परेश रावल, अरशद वारसी, दिशा पाटनी, जैकलिन फर्नांडीस, रवीना टंडन, लारा दत्ता, जॉनी लीवर, श्रेयस तलपड़े, राजपाल यादव और फरीदा जलाल जैसे फिल्म जगत के कई बेहतरीन कलाकार मुख्य भूमिकाओं में अपनी कॉमिक टाइमिंग का जलवा बिखेरते नजर आ रहे हैं. इस फिल्म को हम 3.5 स्टार्स दे रहे हैं
यदि आप सिनेमाघर में एक ऐसी फिल्म की तलाश में जा रहे हैं जिसके लिए तेज दिमाग की नहीं, बल्कि हंसते-हंसते पेट मजबूत करने की जरूरत हो, तो 'वेलकम टू द जंगल' आपके लिए ही बनी है. हाल के दिनों की सबसे बड़ी कॉमिक स्टारकास्ट से सजी यह फिल्म एक ऐसी बेधड़क, अतरंगी और बेमिसाल एंटरटेनर है, जो अपनी ही धुन में दर्शकों को लोटपोट करती है. अहमद खान के निर्देशन में बनी यह फिल्म अपने विशाल कलाकारों के साथ पूरा न्याय करती है और दोस्तों व परिवार के साथ देखने के लिए एक परफेक्ट वीकेंड टॉनिक साबित होती है. यह भी पढ़ें: Mirzapur The Movie New Poster: 'मिर्जापुर द मूवी' का नया पोस्टर जारी, 'गद्दी है तो हम हैं' के नारे के साथ टीज़र रिलीज
कहानी: फिल्म का ताना-बाना पूरी तरह से अनोखे और हास्यास्पद ट्विस्ट्स पर आधारित है. कहानी एक बेहद रईस शख्स के इर्द-गिर्द घूमती है, जो इनकम टैक्स के पचड़ों से बचने के लिए एक अजीबोगरीब सलाह मानता है. वह अपने ₹2,000 करोड़ के काले धन को एक ऐसी फिल्म में निवेश करता है जिसका फ्लॉप होना पहले से तय हो. उसकी बेटी इस प्रोजेक्ट की प्रोड्यूसर बनती है और खुद को ही हेरोइन कास्ट कर लेती है. फिल्म को महा-फ्लॉप बनाने के लिए वे जानबूझकर फ्लॉप डायरेक्टर्स, एक आउटडेटेड सुपरस्टार, उसकी पुरानी गर्लफ्रेंड्स और दो अंडरवर्ल्ड डॉन्स को सपोर्टिंग रोल्स में साइन कर लेते हैं.
चूंकि यह फिल्म सेना (आर्मी) पर आधारित होती है, इसलिए इन सबको ट्रेनिंग देने के लिए एक बेहद सख्त और कड़क महिला ट्रेनर को लाया जाता है. असली रायता तब फैलता है जब यह पूरी नौसिखिया टीम शूटिंग के लिए एक घने जंगल और गांव की लोकेशन पर पहुंचती है. वहां शूटिंग की जगह उनका सामना असली आतंकवादियों से हो जाता है, जिन्होंने उस पूरे इलाके पर कब्जा कर रखा है. आतंकवादी इस फिल्मी क्रू को असली भारतीय सेना समझकर उन पर हमला कर देते हैं. इसके बाद शुरू होता है इन कलाकारों का 'सरवाइवल ड्रामा', जो फिल्म के आखिरी एक घंटे में पागलपन के चरम स्तर पर पहुंच जाता है.
हॉलीवुड क्लासिक 'ट्रॉपिक थंडर' और देसी कॉमेडी का जबरदस्त तड़का
स्वर्गीय नीरज वोरा की मूल कहानी पर आधारित यह फिल्म 'ट्रॉपिक थंडर', 'ढूंढते रह जाओगे' और 'तीस मार खान' जैसी फिल्मों का एक बेहद मजेदार और नया रीमिक्स लगती है. निर्देशक अहमद खान ने किसी तरह की भावुकता या गहराई दिखाने की कोशिश नहीं की है; उनका एकमात्र फोकस हर सीन को लाउड, फनी और एंटरटेनिंग बनाना था, जिसमें वे पूरी तरह सफल रहे हैं.
अभिनय: अक्षय कुमार का डबल ब्लास्ट और कॉमेडी किंग्ज़ का जलवा
खिलाड़ी अक्षय कुमार पूरी फिल्म को अपने कंधों पर बेहद आत्मविश्वास के साथ खींचते हैं. वे स्क्रीन पर बेहद एनर्जेटिक और मजेदार नजर आए हैं, वहीं फिल्म में उनका दूसरा रोल एक ऐसा सरप्राइज ट्विस्ट है जो दर्शकों को हैरान कर देगा. अरशद वारसी अपने सहज और कूल अंदाज में महफिल लूटते हैं, जबकि 'येड़ा अन्ना' के रूप में सुनील शेट्टी पुरानी यादों को ताजा कर देते हैं. दिशा पाटनी और जैकलिन फर्नांडीस ने फिल्म में ग्लैमर का तड़का लगाया है, तो रवीना टंडन अपनी दमदार और रौबीली स्क्रीन प्रेजेंस से प्रभावित करती हैं. इनके अलावा परेश रावल, जॉनी लीवर और राजपाल यादव की सदाबहार तिकड़ी जब भी फ्रेम में आती है, थिएटर में हंसी के फव्वारे छूट पड़ते हैं.
वर्डिक्ट: 2 घंटे 45 मिनट के लंबे रनटाइम के बावजूद यह फिल्म कहीं भी सुस्त या बोरिंग नहीं होती. फिल्म का पहला हाफ तेज रफ्तार से गुजरता है और इसका इंटरवल ब्लॉक बेहद अनोखा है. हालांकि सेकेंड हाफ की शुरुआत में गति थोड़ी धीमी होती है, लेकिन आखिरी के 30 मिनट स्क्रीन पर जो तबाही और कॉमेडी का बवंडर लाते हैं, वह देखने लायक है. तकनीकी रूप से फिल्म को बेहद भव्य और आलीशान पैमाने पर तैयार किया गया है.
फिल्म के संवाद काफी तीखे हैं और इसमें आज के दौर के सोशल मीडिया मीम्स, पॉप-कल्चर और कई बड़ी फिल्मों के पैरोडी सीन्स का बहुत ही चतुराई से इस्तेमाल किया गया है. कबीर लाल की सिनेमैटोग्राफी और प्रोडक्शन डिजाइन फिल्म के लाउड मिजाज से पूरी तरह मेल खाते हैं. हालांकि, कुछ दृश्यों में वीएफएक्स थोड़ा और बेहतर हो सकता था, लेकिन फिल्म की गति इतनी तेज है कि इन छोटी कमियों पर ध्यान नहीं जाता.
पूरी फिल्म में 'मिशन इम्पॉसिबल', 'शोले', 'जवान', 'बजरंगी भाईजान', 'देवदास' और 'टाइटैनिक' जैसी कल्ट फिल्मों के अनगिनत संदर्भ दिए गए हैं, जो आज की पीढ़ी को खूब पसंद आएंगे. यह पूरी तरह से एक 'नो-लॉजिक' पॉपकॉर्न एंटरटेनर फिल्म है, जो अपनी मूर्खतापूर्ण और क्रेजी विजन को पूरी ईमानदारी से पर्दे पर जीती है। अगर आप इस हफ्ते अपने परिवार या दोस्तों के साथ सिनेमाघरों में खुलकर हंसना और तनाव दूर करना चाहते हैं, तो 'वेलकम 3' आपके लिए एक परफेक्ट पैसा-वसूल चॉइस है.