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सूरज के मरने पर पृथ्वी का क्या होगा?

जब हमारा सूरज अपने मरने की प्रक्रिया की शुरुआत में अपना आकार बढ़ाना शुरू करेगा और आसपास के ग्रहों को निगल जाएगा.

सूरज के मरने पर पृथ्वी का क्या होगा?
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

जब हमारा सूरज अपने मरने की प्रक्रिया की शुरुआत में अपना आकार बढ़ाना शुरू करेगा और आसपास के ग्रहों को निगल जाएगा. तब पृथ्वी का क्या होगा?अब से लगभग पांच अरब साल के बाद सूरज के मरने की इस प्रक्रिया के बाद इसके बाहरी सिरे इससे अलग होना शुरू कर देंगे और फिर एक व्हाइट ड्वार्फ यानी सफेद बौना तारा बचा रह जाएगा. हालांकि इस प्रक्रिया में हमारे सौरमंडल के बाहरी ग्रह शायद इस खगोलीय प्रक्रिया की आपदा से बच कर उसके बाद भी जिंदा रहेंगे, और पृथ्वी? इसका जवाब पाने से पहले आइए तारों की मौत और उसके बाद की प्रक्रिया को एक एक्सोप्लेनेट की मदद से समझते हैं.

तारे की मौत के बाद बचा एक्सोप्लेनेट

रिसर्चरों ने बृहस्पति जैसे एक एक्सोप्लेनेट का विस्तृत अवलोकन पूरा कर लिया है. हमारे सौरमंडल से बाहर के ग्रहों को एक्सोप्लेनेट (बाहरी ग्रह) कहा जाता है. यह एक्सोप्लेनेट सूरज जैसे अपने तारे की मौत के बाद भी अरबों साल तक जीवित रहा. यह पृथ्वी से करीब 81 प्रकाश वर्ष दूर ड्राको नक्षत्र में मौजूद है. एक प्रकाश वर्ष वह दूरी है जो प्रकाश की किरणें एक साल में तय करती हैं यानी लगभग 9.5 खरब किलोमीटर. इसे डब्ल्यूडी 1856 बी नाम दिया गया है.

रिसर्चरों ने बताया है कि इस गैसीय ग्रह का भार बृहस्पति के भार से करीब आठ गुना ज्यादा है. इसके वातावरण का तापमान करीब 127 डिग्री सेल्सियस है और यह अप्रत्याशित रूप से काफी गर्म है.

इसकी कक्षा व्हाइ़ट ड्वार्फ से काफी करीब है और समय गुजरने के साथ यह और करीब जा रही है. सूर्य से पृथ्वी की करीबी की तुलना में यह अपने सफेद बौने तारे से 50 गुना ज्यादा करीब है. इसे अपनी परिक्रमा पूरी करने में महज 1.4 दिन का समय लगता है.

डब्ल्यूडी 1856 यह दिखाता है कि तारे की मौत के बाद भी कुछ ग्रह कैसे बचे रह सकते हैं, यानी की हमारे सूरज की मौत के बाद भी कुछ ग्रह कैसे बचे रहेंगे. हालांकि यह ग्रह जिन परिस्थितियों का अनुभव कर रहा है, वे सूरज की मौत के बाद जो ग्रह बचेंगे उनकी परिस्थितियों से काफी अलग हो सकती हैं.

डब्ल्यूडी 1856 बी सफेद बौने तारे के करीब पहुंचा

यह ग्रह एक बेहद असाधारण गुरुत्वीय वातावरण का सामना कर रहा है क्योंकि यह सफेद बौना तारा एक तीन तारे वाले मंडल का हिस्सा है. इसमें एक सफेद बौना तारा के अलावा दो लाल बौने तारे भी हैं. इनमें से हरेक का भार हमारे सूरज की तुलना में करीब 30 फीसदी है. वास्तव में जब हमारे सूरज जैसे किसी मध्यम आकार के तारे का ईंधन (हाईड्रोजन) खत्म हो जाता है तो वह पहले लाल दानव तारा बनता है और उसके बाद उसकी बाहरी परतें अंतरिक्ष में फैल जाती हैं और फिर उनका अत्यंत संघनित गर्म केंद्र सफेद बौना तारा के रूप में बच जाता है. रिसर्चर यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि डब्ल्यूडी1856 आखिर सफेद बौने तारे के इतना करीब क्यों है?

इलिनॉय की नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के एस्ट्रोफिजिस्ट क्रिस्टोफर ओ' कोनर का कहना है, "आज डब्ल्यूडी 1856 को हम जिस करीबी कक्षा में देख रहे हैं उसकी वजह को लेकर दो विचार हैं जो एक दूसरे से बिल्कुल अलग हैं." नेचर जर्नल में छपी रिपोर्ट के लेखकों में ओ' कोनर भी शामिल हैं.

पहली बार मिली सौर मंडल के जन्म की झलक

एक विचार के मुताबिक यह ग्रह अपने तारे के मौत की प्रक्रिया के दौरान उसकी चपेट में आ गया हालांकि यह तारे के विस्तार के दौरान उसके बाहरी हिस्से में ही रहा और जब वह लाल दानव से सफेद बौना तारे में बदला तो वह उससे बचने में सफल रहा. दूसरा विचार कहता है कि यह ग्रह अपने तारा से पर्याप्त दूरी पर था और उसकी मौत के दौरान निगले जाने से बच गया. हालांकि बाद में आसपास की दूसरी चीजों मसलन दो लाल दानवों के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण खिंच कर मौजूदा कक्षा में पहुंच गया.

तारे की मौत के बाद भी ग्रह के बचने का सबूत

डब्ल्यूडी1856बी की खोज के बारे में जानकारी 2020 में दी गई थी. यह पहला ऐसा ठोस सबूत है जो बताता है कि सूरज जैसे तारे की मौत के बाद भी ग्रह बचे रह सकते हैं. नई रिसर्च ने इस ग्रह के घटकों और उसकी जीवन यात्रा के बारे में अहम जानकारियां दी हैं.

रिसर्चरों ने जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप की मदद से इसका अध्ययन किया है. यह बृहस्पति की तरह ही मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम से बना है हालांकि इसमें मीथेन गैस की भारी मात्रा भी मौजूद है जो असामान्य है. रिसर्चरों ने इस ग्रह की गर्मी का कारण सफेद बौने तारे से इसके संपर्क को माना है जो मजबूत गुरुत्वीय बल के कारण इसे और पास ला रहा है.

नई खोज ने दिखाया पृथ्वी का भविष्य

आमतौर पर तारे अपने ग्रहों की तुलना में बहुत बड़ होते हैं. सूरज का आकार बृहस्पति की तुलना में करीब 1,000 गुना ज्यादा बड़ा है. यह ग्रह सफेद बौने तारे की तुलना में करीब 500 गुना ज्यादा बड़ा है. सफेद बौना तारा आकार में पृथ्वी से थोड़ा सा बड़ा है. हालांकि यह बहुत ज्यादा भारी है. सफेद बौना तारा जिस तारे से बना होगा उसका आकार हमारे सूरज की तुलना में करीब दोगुना ज्यादा होगा. यह तारा करीब 5 अरब वर्ष पहले मरा था.

हमारे सौरमंडल का भविष्य

जब हमारा सूरज अपने लाल दानव वाले उम्र में पहुंचेगा तो यह वर्तमान आकार के करीब 200 गुना ज्यादा बड़ा हो जाएगा. निश्चित रूप से यह तब सबसे करीब के बुध और शुक्र ग्रहों को निगल जाएगा. ओ' कोनर का कहना है, "पृथ्वी से बाद के बाकी ग्रह सूरज के अधिकतम आकार की सीमा से बाहर रहेंगे तो इस बात के प्रबल आसार हैं कि वे सूरज के पीछे छूटे सफेद बौने तारे की परिक्रमा करते रहेंगे."

ओ' कोनर के मुताबिक, "सूरज सफेद बौना तारा बनने पर अपना लगभग आधा भार खो देगा तो हम उम्मीद कर रहे हैं कि बचने वाले ग्रह धीरे धीरे उससे अलग होते रहेंगे, जब तक कि वे अपने मौजूदा कक्षा की दूरी से दुगुनी दूरी तक ना पहुंच जाएं."

ऐसे में पृथ्वी का भविष्य अनिश्चित है. ओ' कोनर ने कहा, "हम पृथ्वी की भविष्य की कक्षा की अनुमान नहीं लगा सकते कि जब सूरज अपने उम्र के आखिरी पड़ाव पर पहुंचेगा तो यह डेंजर जोन के बाहर होगी या भीतर. सौभाग्य से इस समस्या के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए हमारे पास अरबों साल हैं."

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 10, 2026 05:40 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).