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Prem Keetanu Movie Review: वीर पहाड़िया-आफिया सैयद की केमिस्ट्री और अपारशक्ति के मजेदार अंदाज से सजी है यह फिल्म

निर्देशक अपूर्व सिंह कार्की के निर्देशन में बनी फिल्म 'प्रेम कीटाणु' (Prem Keetanu) युवाओं के दिल के तार छेड़ने के लिए सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. लगभग 2 घंटे 18 मिनट की इस रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म में वीर पहाड़िया, आफिया सईद, अपारशक्ति खुराना, राकेश बेदी और निखिल विजय जैसे कलाकारों ने अहम भूमिका निभाई है.

Prem Keetanu Movie Review: वीर पहाड़िया-आफिया सैयद की केमिस्ट्री और अपारशक्ति के मजेदार अंदाज से सजी है यह फिल्म
प्रेम कीटाणु मूवी रिव्यू (Photo Credits: File Image)

Prem Keetanu Movie Review: निर्देशक अपूर्व सिंह कार्की के निर्देशन में बनी फिल्म 'प्रेम कीटाणु' (Prem Keetanu) युवाओं के दिल के तार छेड़ने के लिए सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. लगभग 2 घंटे 18 मिनट की इस रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म में वीर पहाड़िया, आफिया सईद, अपारशक्ति खुराना, राकेश बेदी और निखिल विजय जैसे कलाकारों ने अहम भूमिका निभाई है. लेटेस्टली हिंदी इस यूथफुल एंटरटेनर फिल्म को 3.5 स्टार्स की रेटिंग देता है. अगर आप जानना चाहते हैं कि इस फिल्म में क्या खास है और यह 3.5 स्टार रेटिंग क्यों डिजर्व करती है, तो पढ़िए यह विस्तृत रिव्यू.

अपूर्व सिंह कार्की ने ‘प्रेम कीटाणु’ में ऐसी कहानी पेश की है, जिसके किरदार आपको अपने आसपास के लोगों जैसे लगते हैं. फिल्म की दुनिया में प्यार, दोस्ती, परिवार और करियर को लेकर वही छोटी-बड़ी परेशानियां हैं, जिनसे आज की युवा पीढ़ी गुजरती है. शुरुआत में यह एक सीधी-सादी प्रेम कहानी लगती है, जहां विशाल और सुहानी की मुलाकात से रिश्ता आगे बढ़ता है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे जाती है, इसके दूसरे पहलू सामने आने लगते हैं. हंसी-मजाक और रोमांस के बीच फिल्म बड़े होने, माता-पिता को समझने और अपने फैसलों की जिम्मेदारी लेने की बात भी करती है. वीर पहाड़िया, आफिया सैयद और अपारशक्ति खुराना अपने-अपने किरदारों में कहानी को मजेदार बनाते हैं, लेकिन फिल्म की असली खूबी यह है कि इसके हल्के-फुल्के पलों के पीछे एक ऐसी बात छिपी है, जो शायद आपको अपनी ही जिंदगी के किसी दौर की याद दिला दे.

विशाल (वीर पहाड़िया) के लिए प्यार कोई नई बात नहीं है, लेकिन हर बार उसकी कहानी अधूरी ही रह गई. फिर उसकी मुलाकात सुहानी (आफिया सैयद) से होती है और इस बार उसे लगता है कि शायद उसे अपना सच्चा प्यार मिल गया है. दोनों के बीच अच्छी दोस्ती होती है और विशाल धीरे-धीरे सुहानी को लेकर सीरियस होने लगता है. लेकिन सुहानी ने अपने जीवनसाथी को लेकर कुछ उम्मीदें तय कर रखी हैं और विशाल उनमें पूरी तरह फिट नहीं बैठता. इसी बीच रंजीत (अपारशक्ति खुराना) की एंट्री कहानी को और उलझा देती है. हालांकि फिल्म यहीं नहीं रुकती, बल्कि विशाल के परिवार और खासकर उसके माता-पिता के साथ उसके रिश्ते को भी कहानी में जगह देती है. अपनी जिंदगी, पुराने फैसलों और आने वाली जिम्मेदारियों को समझते हुए विशाल को पहली बार एहसास होता है कि बड़े होने का मतलब सिर्फ अपनी पसंद के हिसाब से जिंदगी जीना नहीं, बल्कि अपने फैसलों की जिम्मेदारी लेना भी है. ऐसे में सुहानी का प्यार और उसका अपना भविष्य, दोनों उसके सामने एक साथ खड़े हैं.

वीर पहाड़िया ने विशाल के किरदार को काफी नेचुरल रखा है. उनकी मस्ती और भावुकता दोनों आसानी से पर्दे पर नजर आती हैं. आफिया सैयद पहली फिल्म में सुहानी के किरदार में अच्छी लगती हैं और वीर के साथ उनकी जोड़ी में बनावटीपन नहीं दिखता. अपारशक्ति खुराना रंजीत के रूप में कहानी में हंसी का तड़का लगाते हैं. उनका किरदार सिर्फ प्यार के बीच आने वाले तीसरे शख्स तक सीमित नहीं रहता और यही बात उसे दिलचस्प बनाती है.

राकेश बेदी और बाकी कलाकार फिल्म के पारिवारिक हिस्से को मजबूती देते हैं. खासकर विशाल और उसके माता-पिता के बीच का रिश्ता कहानी को एक भावुक आधार देता है. फिल्म यह दिखाती है कि घर से दूर जाने और अपनी जिंदगी के फैसले लेने के साथ माता-पिता के साथ रिश्ते भी बदलने लगते हैं. यही पहलू इसे सिर्फ यांग लव स्टोरी से थोड़ा आगे ले जाता है.

‘कहो तो’, ‘तू मेरा रइयो’ और ‘इश्क का गुलाम’ फिल्म के युवा माहौल को बनाए रखते हैं. गाने कहानी के बीच सहज तरीके से आते हैं और खूबसूरत सीन्स और कोरियोग्राफी के जरिए दिल जीतते हैं. इस तरह से म्यूजिक यहां सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि कहानी के मूड को बनाने में भी काम आता है.

अपूर्व सिंह कार्की का शानदार डायरेक्शन फिल्म को जरूरत से ज्यादा गंभीर नहीं होने देता. हंसी-मजाक के बीच भावुक पलों को भी जगह मिलती है. दीपक किंगरानी की पटकथा में कहानी आगे बढ़ने के लिए सिर्फ प्यार वाले सींस पर ही निर्भरता नहीं है, बल्कि दोस्ती और परिवार के हिस्से भी साथ चलते हैं.

फिल्म उस उम्र की कहानी दिखाती है, जब हर किसी को अपनी जिंदगी अपने हिसाब से जीनी होती है, लेकिन सही फैसला लेना आसान नहीं होता. विशाल (वीर पहाड़िया) के जरिए प्यार, परिवार, करियर और खुद को समझने की कोशिश दिखाई गई है. फिल्म इन बातों को किसी सीख की तरह नहीं बताती, बल्कि कहानी के साथ आसानी से सामने लाती है.

‘प्रेम कीटाणु’ उन लोगों को पसंद आ सकती है, जिन्हें हल्की-फुल्की लव स्टोरीज पसंद हैं, लेकिन वे सिर्फ रोमांस नहीं, बल्कि दोस्ती और परिवार के रिश्तों को भी कहानी में देखना चाहते हैं. वीर पहाड़िया और आफिया सैयद की खूबसूरत केमिस्ट्री, अपारशक्ति खुराना का मजेदार अंदाज और कहानी में आने वाले भावुक पल फिल्म को दिलचस्प बनाते हैं. फिल्म यंग उम्र की उलझनों को आसान तरीके से दिखाती है और बिना ज्यादा गंभीर हुए बड़े होने, रिश्तों को समझने और अपने फैसलों की जिम्मेदारी लेने की बात भी करती है. यही वह बातें हैं जो इस फिल्म को देखने लायक बनाती हैं.

(The above story first appeared on LatestLY on Oct 02, 2026 10:00 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).