Haiwaan Movie Review: नॉस्टैल्जिया से आगे बढ़कर फिल्म में अक्षय कुमार-सैफ अली खान ने पेश किया अपना बिल्कुल अलग अवतार
18 साल बाद अक्षय कुमार और सैफ अली खान को एक साथ पर्दे पर देखना जितना एक्साइटिंग है, उतना ही दिलचस्प है दोनों को ऐसे किरदारों में देखना, जो उनकी अब तक की फिल्मों से काफी अलग नजर आते हैं. ‘हैवान’ में अक्षय कुमार न तो अपने आम हीरो वाले अंदाज में हैं और न ही सैफ अली खान का किरदार उनकी पिछली फिल्मों की तरह है.
Haiwaan Movie Review: 18 साल बाद अक्षय कुमार (Akshay Kumar) और सैफ अली खान (Saif Ali Khan) को एक साथ पर्दे पर देखना जितना एक्साइटिंग है, उतना ही दिलचस्प है दोनों को ऐसे किरदारों में देखना, जो उनकी अब तक की फिल्मों से काफी अलग नजर आते हैं. ‘हैवान’ (Haiwaan) में अक्षय कुमार न तो अपने आम हीरो वाले अंदाज में हैं और न ही सैफ अली खान का किरदार उनकी पिछली फिल्मों की तरह है. प्रियदर्शन की ये फिल्म दोनों स्टार्स की पॉपुलर इमेज से हटकर उन्हें एक डार्क और साइकोलॉजिकल थ्रिलर के बीच लेकर आती है, जहां लड़ाई सिर्फ ताकत की नहीं बल्कि दिमाग, इंस्टिंक्ट्स और सर्वाइवल की है. अक्षय का परशुराम अपनी खामोशी और रहस्यमयी अंदाज से डर पैदा करता है, वहीं सैफ का श्याम आंखों की रोशनी न होने के बावजूद अपनी समझ और इंस्टिंक्ट्स के दम पर उसका सामना करता है. यही फ्रेशनेस ‘हैवान’ को दोनों एक्टर्स की बाकी फिल्मों से अलग बनाती है.
डायरेक्टर– प्रियदर्शन
कास्ट– सैफ अली खान, अक्षय कुमार, बोमन ईरानी, श्रिया पिलगांवकर, सैयामी खेर, मोहनलाल, असरानी, शारिब हाशमी
निर्माता- केवीएन प्रोडक्शंस और थेस्पियन फिल्म्स
ड्यूरेशन– 2h44m
रेटिंग– 3.5
कहानी में सिर्फ एक्शन नहीं, दिमाग का भी खेल है
‘हैवान’ की कहानी परशुराम और श्याम के बीच की उस जंग को दिखाती है, जिसमें दोनों एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश करते हैं. परशुराम के पास ताकत, चालाकी और अपने अगले कदम को छिपाकर रखने की काबिलियत है, जबकि श्याम अपनी सुनने-समझने की क्षमता, तेज दिमाग और मजबूत इंस्टिंक्ट्स के सहारे उसका सामना करता है. यही वजह है कि दोनों की लड़ाई सिर्फ फिजिकल कॉन्फ्रंटेशन नहीं बनती. हर बार जब लगता है कि एक किरदार दूसरे पर भारी पड़ गया है, कहानी एक नया मोड़ ले लेती है. श्याम की अपनी और अपने करीबियों की सुरक्षा की कोशिश कहानी को इमोशनल स्टेक्स भी देती है.
अक्षय कुमार ने दिखाया डार्क अवतार
अक्षय कुमार फिल्म की सबसे बड़ी ताकतों में से एक हैं. परशुराम को उन्होंने एक ऐसे विलेन की तरह पेश किया है, जिसे हर वक्त चिल्लाने या गुस्सा दिखाने की जरूरत नहीं पड़ती. उनकी शांत चाल, चेहरे के एक्सप्रेशंस और अचानक बदलता व्यवहार किरदार को ज्यादा खतरनाक बनाता है. अक्षय की बॉडी लैंग्वेज में एक अजीब सा कंट्रोल है, जो परशुराम की अनप्रेडिक्टेबिलिटी को और उभारता है. खासकर सैफ के साथ उनके सीन्स में उनका ये अंदाज साफ नजर आता है.
सैफ अली खान ने निभाया श्याम का किरदार
सैफ अली खान ने श्याम के किरदार को बहुत ज्यादा ड्रामैटिक बनाने के बजाय काफी कंट्रोल्ड रखा है. नेत्रहीन किरदार की बॉडी लैंग्वेज और उसके आसपास की चीजों को महसूस करने का तरीका उनके परफॉर्मेंस में नेचुरल लगता है. श्याम की कमजोरी को सैफ ने उसकी ताकत में बदल दिया है और उनकी आंखों की जगह दूसरे सैंस के जरिए सिचुएशन को समझने वाली एक्टिंग कहानी को काफी असरदार बनाती है. अक्षय के आक्रामक और डरावने परशुराम के सामने सैफ का शांत और चौकस अंदाज दोनों किरदारों के बीच का कॉन्ट्रास्ट और मजबूत करता है.
सपोर्टिंग कास्ट ने भी छोड़ी छाप
पहल चौधरी फिल्म में एक सरप्राइज पैकेज की तरह सामने आती हैं. उनके किरदार में मासूमियत और इमोशन है, लेकिन वह सिर्फ कहानी को आगे बढ़ाने तक सीमित नहीं रहतीं. सैयामी खेर, श्रिया पिलगांवकर और बोमन ईरानी ने भी अपने हिस्से के किरदारों को अच्छी तरह संभाला है. शारिब हाशमी पुलिस ऑफिसर के रोल में काफी सहज लगते हैं और फिल्म के इन्वेस्टिगेशन वाले हिस्से को सपोर्ट करते हैं. वहीं असरानी की मौजूदगी खास है और उनका परफॉर्मेंस कहानी के तनाव के बीच एक इमोशनल कनेक्शन बनाता है.
प्रियदर्शन ने संभाली कहानी की कमान
प्रियदर्शन का डायरेक्शन फिल्म को सिर्फ एक्शन सीक्वेंस की सीरीज बनने से रोकता है. उन्होंने कहानी के साइकोलॉजिकल पहलू को भी जगह दी है, जिसकी वजह से परशुराम और श्याम की भिड़ंत में सिर्फ मारधाड़ नहीं, बल्कि रणनीति भी नजर आती है। फिल्म का 2 घंटे 44 मिनट का रनटाइम जरूर लंबा है, लेकिन प्रियदर्शन ज्यादातर हिस्सों में कहानी की पकड़ बनाए रखते हैं. खासकर दोनों लीड किरदारों के बीच टेंशन को लगातार बनाए रखना उनकी बड़ी उपलब्धि है. फिल्म में इमोशन, सस्पेंस और एक्शन को कमर्शियल ट्रीटमेंट के साथ जोड़ा गया है.
म्यूजिक कहानी के मूड के साथ चलता है
प्रीतम का म्यूजिक फिल्म की कहानी पर हावी होने के बजाय उसके माहौल को मजबूत करता है. बैकग्राउंड स्कोर खासतौर पर सस्पेंस और कन्फर्टेशन वाले सीन्स में टेंशन बढ़ाने का काम करता है. परशुराम और श्याम के बीच जैसे-जैसे खेल आगे बढ़ता है, म्यूजिक भी उस बेचैनी को बढ़ाता है. ‘मेरे हीरो हैं’ फिल्म के इमोशनल हिस्सों को सपोर्ट करता है, जबकि ‘रंगियारा’ ट्रैवल सीक्वेंस में कहानी को थोड़ा हल्का और फ्रेश मूड देता है. कुल मिलाकर, गाने और BGM कहानी से जुड़े हुए महसूस होते हैं.
‘ओप्पम’ से अलग क्या है ‘हैवान’
‘हैवान’ प्रियदर्शन की मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ का हिंदी रूपांतरण है, लेकिन हिंदी वर्जन को सिर्फ उसी कहानी की दोबारा पैकेजिंग नहीं कहा जा सकता. फिल्म की प्रस्तुति, भावनात्मक हिस्सों और कमर्शियल अंदाज को हिंदी दर्शकों के हिसाब से ढाला गया है. असल कहानी का रोमांच और टकराव बरकरार रखते हुए अक्षय कुमार और सैफ अली खान की पर्दे पर मौजूदगी के हिसाब से इसका ट्रीटमेंट तैयार किया गया है. मोहनलाल की खास मौजूदगी भी ‘ओप्पम’ से इस फिल्म के कनेक्शन को और खास बनाती है.
क्यों देखें ‘हैवान’?
‘हैवान’ की सबसे बड़ी यूएसपी अक्षय कुमार और सैफ अली खान की जोड़ी और उनके बीच की टक्कर है. एक तरफ अक्षय का डरावना और अनप्रेडिक्टेबल परशुराम है, तो दूसरी तरफ सैफ का शांत, समझदार और दृढ़ निश्चय वाला श्याम. दोनों की अलग-अलग एक्टिंग स्टाइल फिल्म के कॉन्फ्लिक्ट को और दिलचस्प बनाती है. इसके साथ पहल चौधरी का सरप्राइज, प्रियदर्शन का सस्पेंस से भरा डायरेक्शन, असरदार BGM और थिएटर में प्रभाव छोड़ने वाले एक्शन सींस इसे एक एंटरटेनिंग पैकेज बनाते हैं. अगर आपको ऐसी थ्रिलर पसंद हैं जहां विलेन और हीरो के बीच सिर्फ ताकत नहीं बल्कि दिमाग की भी लड़ाई हो, तो ‘हैवान’ थिएटर में देखने लायक है.
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 11, 2026 10:21 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

