निर्देशक निखिल आडवाणी का बयान, कहा- 'बाटला हाउस' साबित करती है कि बॉलीवुड में एनकाउंटर फिल्मों का चलन रहेगा जारी
निखिल आडवाणी की 'बाटला हाउस' से 12 साल पहले, मई 2007 में 'शूटआउट एट लोखंडवाला' रिलीज हुई, जो एक बार फिर पुलिस मुठभेड़ के विषय पर आधारित है. निखिल आडवाणी की 'बाटला हाउस' से 12 साल पहले, मई 2007 में 'शूटआउट एट लोखंडवाला' रिलीज हुई, जो एक बार फिर पुलिस मुठभेड़ के विषय पर आधारित है.
नई दिल्ली : कब और किसने पकड़ने का नहीं बल्कि मारने का फैसला किया? दिमाग में इस सवाल के साथ, पटकथा लेखक व फिल्म निर्माता संजय गुप्ता ने सालों पहले मुठभेड़ आधारित फिल्मों 'शूटआउट एट लोखंडवाला' और 'शूटआउट एट वडाला' पर काम करना शुरू किया. 'शूटआउट' सीरीज के तीसरे भाग पर काम हो रहा है, लेकिन इससे पहले कि उनके पास एक गैंगस्टर ड्रामा है, जिसमें फिर से पुलिस मुठभेड़ का पुट है, एक ऐसी शैली जो इस समय बॉलीवुड में सबसे लोकप्रिय ट्रेंड में से एक है.
निखिल आडवाणी की 'बाटला हाउस' से 12 साल पहले, मई 2007 में 'शूटआउट एट लोखंडवाला' रिलीज हुई, जो एक बार फिर पुलिस मुठभेड़ के विषय पर आधारित है. यह इस साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर रिलीज हो रही है. गुप्ता की फिल्म की तरह, आडवाणी की नई फिल्म भी एक वास्तविक जीवन की घटना पर आधारित है.
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बॉलीवुड में एनकाउंटर (मुठभेड़ आधारित) फिल्मों के उभार के बारे में पूछे जाने पर, 'बाटला हाउस' के निर्देशक आडवाणी ने आईएएनएस को बताया, "यह बदल गया है, बल्कि विकसित हुआ है. जिस तरह से सिनेमा विकसित हुआ है, पुलिस अब अधिक यथार्थवादी है और यह बाध्य ऐसा होने के लिए बाध्य है क्योंकि सभी पुलिस मुठभेड़ झूठे नहीं हैं, जैसा कि वे एक बार फिल्मों में प्रोजेक्ट किए गए थे. इन दिनों, पटकथा लिखने से पहले, हम अपना रिसर्च करते हैं ताकि हम अपनी कहानी में वास्तविक बातों को ला सकें."
उन्होंने कहा, "हम पुलिस मुठभेड़ पर कहानी लिखने से पहले एनकाउंटर विशेषज्ञों के साथ बातचीत करते हैं, हालांकि हम काल्पनिक चीजें करते हैं, लेकिन वे वास्तविकता से प्रेरित होते हैं. हां, समय के साथ यह बदल गया है लेकिन यह अच्छे के लिए है."
2007 में, जब गुप्ता ने 'शूटआउट एट लोखंडवाला' में एक पटकथा लेखक के रूप में योगदान दिया था, जो गैंगस्टर्स और मुंबई पुलिस के बीच 1991 में लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स शूटआउट पर आधारित थी, पुलिस द्वारा गैंगस्टर्स को पकड़ना नहीं बल्कि उन्हें मारने का विचार लोगों के लिए चौंकाने वाला था.
गुप्ता ने आईएएनएस को बताया कि वह वास्तव में इस बात से प्रभावित थे कि कब और किसने तय किया था कि 'चलो पकड़ना नहीं है, चलो मार देते हैं.' किसने उन्हें (पुलिस) जज , जूरी और जल्लाद बनाया. आजकल मुठभेड़ सुनते ही यह संदिग्ध मालूम पड़ने लगता है.
उन्होंने कहा, "मैं इस तथ्य से अधिक रोमांचित था कि 385 से अधिक पुलिसकर्मियों ने बच्चों, परिवारों से भरे पड़े एक इमारत को घेर लिया और (पुलिस) ने गोलीबारी कर दी और लोगों को मार डाला." फिल्म की सफलता के बाद, गुप्ता एक निर्देशक के रूप में 'शूटआउट' सीरीज से जुड़े. वह स्पष्ट रूप से इस विधा से ऊबे नहीं हैं क्योंकि उसके पास एक और गैंगस्टर ड्रामा है.
गुप्ता ने कहा, "यह मुंबई के पूरे इतिहास को छूता है. मुठभेड़ें उसका हिस्सा है. मुंबई में अधिकांश मुठभेड़ हुई हैं, इसलिए निश्चित रूप से 1980 और 1990 के दशक पर आधारित गैंगस्टर्स के बारे में एक फिल्म बनाना.. मुठभेड़ को इसका अभिन्न अंग बाने देता है." उन्होंने 'शूटआउट' सीरीज का तीसरा भाग लाने का वादा किया.
इस बीच इतने सालों में, विधा में कई अन्य प्रयास हुए हैं. गुप्ता की फिल्म से पहले भी कई बनाई गई थीं - जैसे 2002 में नसीरुद्दीन शाह अभिनीत 'एनकाउंटर: द किलिंग.' यह 2004 की नाना पाटेकर अभिनीत 'अब तक छप्पन' थी जिसने इस विधा में एक मानदंड स्थापित किया था.
दिल्ली में 2008 के कथित पुलिस एनकाउंटर ऑपरेशन से प्रेरित 'बाटला हाउस' पहले ही अपने विवादास्पद विषय के साथ दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ा चुकी है. आनंद पंडित, जिन्होंने 'बाटला हाउस' के लिए भारत भर में थिएट्रिकल राइट्स खरीदे हैं, उनका मानना है कि वास्तविकता से काल्पनिक एक आयाम है जो दर्शकों थिएटरों के लिए और भी अधिक आकर्षित करता है.
फिल्म व व्यापार विशेषज्ञ गिरीश जौहर का कहना है कि एनकाउंटर फिल्में एक्शन शैली के तहत आती हैं, जो भारत में काफी सफल है. उन्होंने कहा, "लोग यह जानना चाहते हैं कि वास्तविक मुठभेड़ों में क्या हुआ था, और इसमें सच्चाई का एक तत्व हमेशा होता है. लोग फिल्मकार के नजरिए को समझना चाहते हैं कि वास्तव में उस समय क्या हुआ था. यह इसे देखने के लिए रोमांचकारी बनाता है, जो मुख्य कारणों में से एक है कि दर्शक इस तरह के सिनेमा को स्वीकार करते हैं."
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 11, 2019 03:52 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

