Bank of Baroda Breach: बैंक ऑफ बड़ौदा में ईमेल हैकिंग के बाद उठे सुरक्षा पर सवाल; विशेषज्ञों ने बताए साइबर हमलों से बचाव के तरीके

बैंक ऑफ बड़ौदा में कर्मचारी का ईमेल हैक होने के बाद बैंकिंग सुरक्षा पर विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है. साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, कमजोर पासवर्ड और रियल-टाइम मॉनिटरिंग की कमी के कारण यह घटना हुई. जानें कैसे ईमेल-आधारित साइबर हमलों से बचाव किया जा सकता है.

बैंक ऑफ बड़ौदा (Photo Credits: ANI)

नई दिल्ली: सार्वजनिक क्षेत्र के 'बैंक ऑफ बड़ौदा' (Bank of Baroda) (BoB) में एक कर्मचारी का ईमेल अकाउंट हैक होने और डेटा में अनधिकृत पहुंच की घटना के बाद बैंकिंग सेक्टर की साइबर सुरक्षा पर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है. हालांकि बैंक ने स्पष्ट किया है कि उसका कोर बैंकिंग सिस्टम (CBS) पूरी तरह सुरक्षित है और स्थिति पर काबू पा लिया गया है, लेकिन साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना दर्शाती है कि कैसे केवल एक असुरक्षित ईमेल खाता पूरी प्रणाली को जोखिम में डाल सकता है.

बैंक प्रशासन ने मामले की विस्तृत फोरेंसिक जांच शुरू कर दी है. इस बीच साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को ईमेल-आधारित साइबर हमलों से बचने के लिए सख्त कदम उठाने की सलाह दी है. यह भी पढ़ें: Bank of Baroda Security Incident: बैंक ऑफ बड़ौदा में कर्मचारी का ईमेल हैक; बैंक ने कहा- कोर सिस्टम सुरक्षित, जानें पासवर्ड और ATM पिन बदलने का तरीका

कैसे हुआ हमला और कहां हुई चूक?

साइबर सुरक्षा फर्म 'eScan' के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और प्रबंध निदेशक गोविंद राममूर्ति के अनुसार, यह हमला किसी अत्यधिक जटिल हैकिंग तकनीक पर आधारित नहीं था, बल्कि सुरक्षा की बुनियादी कमियों का परिणाम था.

विशेषज्ञों के अनुसार:

राममूर्ति ने कहा कि अधिकतर संस्थान फायरवॉल और बाहरी घुसपैठ रोकने पर ध्यान केंद्रित करते हैं, लेकिन सिस्टम के भीतर डेटा के आवागमन और असामान्य गतिविधियों की निरंतर निगरानी पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते.

ईमेल अकाउंट क्यों हैं बड़ा जोखिम?

वित्तीय संस्थान साइबर अपराधियों के मुख्य निशाने पर होते हैं क्योंकि वे भारी मात्रा में संवेदनशील ग्राहक और वित्तीय डेटा संभालते हैं.

'सेक्युरोनिक्स' (Securonix) के भारत और सार्क क्षेत्र के कंट्री डायरेक्टर दीपेश कौरा के अनुसार, केवल मुख्य प्रणालियों की रक्षा करना ही पर्याप्त नहीं है. उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर वित्तीय डेटा संभालने वाले संगठनों को ईमेल-आधारित खतरों का पता लगाने और उन्हें रोकने के लिए एआई-संचालित (AI-powered) और क्लाउड-नेटिव प्लेटफॉर्म का उपयोग करना चाहिए.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर खतरों के बदलते स्वरूप को देखते हुए बैंकों को उन्नत तकनीक अपनानी होगी:

भविष्य में ऐसे हमलों से कैसे बचें?

साइबर विशेषज्ञों ने वित्तीय संस्थानों को साइबर लचीलापन (Cyber Resilience) मजबूत करने के लिए निम्नलिखित उपाय करने की सलाह दी है:

  1. मजबूत पासवर्ड नीति: सभी कर्मचारियों के लिए जटिल पासवर्ड और बहु-स्तरीय प्रमाणीकरण (Multi-Factor Authentication / MFA) अनिवार्य किया जाए.
  2. एंडपॉइंट और डेटा मॉनिटरिंग: सिस्टम से बाहर जाने वाले डेटा की मात्रा और प्रकार पर लगातार नजर रखी जाए.
  3. कर्मचारी जागरूकता: फ़िशिंग ईमेल और सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों की पहचान के लिए कर्मचारियों को नियमित रूप से प्रशिक्षित किया जाए.

बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा शुरू की गई फोरेंसिक जांच की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद डेटा जोखिम के सटीक दायरे और सुरक्षा सुधारों की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी.

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