कोलकाता, 16 फरवरी पश्चिम बंगाल की मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के शासन में स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र को सबसे नुकसान हुआ है। पार्टी ने दावा किया कि वित्तवर्ष 2023-24 के राज्य बजट प्रस्ताव में भी इन क्षेत्रों पर ध्यान नहीं दिया गया है।
भाजपा विधायक और अर्थशास्त्री अशोक लाहिड़ी ने बुधवार को विधानसभा में पेश बजट प्रस्ताव पर सदन में चर्चा के दौरान कहा कि मनरेगा योजना के लाभार्थियों के मामले में राज्य की अग्रिम स्थिति रोजगार बाजार की अच्छी तस्वीर पेश नहीं करती।
उन्होंने सवाल किया कि अगर राज्य में बेहतरीन दिहाड़ी पर काम उपलब्ध है तो क्यों लोग 213 रुपये दिहाड़ी का काम मांग रहे हैं?
बेलूरघाट से विधायक लाहिड़ी ने कहा कि बजट प्रस्ताव में दीर्घकालीन विकास जरूरतों पर ध्यान नहीं दिया गया है। तृणमूल शासन में शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र का बुरा हाल होने का दावा करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ)के दिशानिर्देशों के तहत प्रत्येक एक हजार आबादी पर एक डॉक्टर होना चाहिए लेकिन पश्चिम बंगाल में यह अनुपात प्रत्येक 1300 आबादी पर एक डॉक्टर का है।
उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में इलाज महंगा है और रोजाना मरीज बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई इलाज के लिए जा रहे हैं।
केंद्र सरकार के पूर्व मुख्य वित्त सलाहकार लाहिड़ी ने कहा कि उन्होंने कोलकाता के सरकारी संस्थानों में पढ़ाई की है लेकिन अब लोग अपने बच्चों को बंगाल के सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ाना चाहते हैं।
लाहिड़ी ने दावा किया कि शिक्षकों की भर्ती में धांधली के आरोपों ने सरकार प्रायोजित और सहायता प्राप्त स्कूलों की शिक्षा प्रणाली पर नकारात्मक असर डाला है।
बजट प्रस्तावों का समर्थन करते हुए तृणमूल कांग्रेस विधायक देबब्रत मजूमदार ने कहा कि राज्य में उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश के मुकाबले कम बेरोजगारी दर है। उन्होंने दावा किया कि तृणमूल शासित पश्चिम बंगाल के स्कूलों में छात्रों का पंजीकरण दर देश के भाजपा शासित राज्यों से अधिक है।
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