द्रमुक सांसद कनिमोझी ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि प्रतीकों की राजनीति (टोकनिज्म) बंद होनी चाहिए। कनिमोझी ने कहा कि सरकार ने इस प्रस्तावित कानून को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ कहा है, लेकिन महिलाओं को वंदन, पूजा की जरूरत नहीं है, उन्हें सम्मान की, समानता की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि ने 2018 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि 2017 में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और द्रमुक नेता स्टालिन ने भी मोदी को पत्र लिखकर यह अनुरोध किया था।
कनिमोझी ने कहा कि वह स्वयं भी इस विषय को कई बार संसद में उठा चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि संसद में पूछे गये उनके प्रश्नों के उत्तर में सरकार की ओर से लगभग यही जवाब मिला कि इस पर विभिन्न हितधारकों से विचार किया जा रहा है और आम-सहमति बनाकर इसे लाया जाएगा।
कनिमोझी ने कहा, ‘‘सरकार ने कौन सी सहमति बनाई, बल्कि यह विधेयक तो गोपनीयता के साथ लाया गया। सर्वदलीय बैठक में भी इसके बारे में विपक्षी दलों को कुछ नहीं बताया गया और अचानक से सदस्यों के सामने कम्प्यूटर स्क्रीन पर विधेयक आया।’’
द्रमुक सदस्य ने कहा कि जब तक विधेयक में से ‘परिसीमन के बाद’ शब्द नहीं हटाया जाएगा, तब तक इसे लटकाया जाता रहेगा और इंतजार 10 साल, 20 साल और 30 साल तक भी चल सकता है।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सदस्य डॉ. काकोली घोष दस्तीदार ने विधेयक को सरकार का राजनीतिक छलावा करार देते हुए इसके क्रियान्वयन को लेकर सत्ता पक्ष की मंशा पर सवाल खड़े किये।
उन्होंने कहा कि इस विधेयक को जनगणना और परिसीमन के बाद लागू किये जाने का सरकार का निर्णय उसकी ‘‘कुटिल चाल’’ है।
दस्तीदार ने देश के लिए पदक जीतने वाली महिला पहलवानों के साथ हुए कथित यौन उत्पीड़न का हवाला देते हुए कहा कि महिला पहलवान लंबे समय तक जंतर मंतर पर प्रदर्शन करती रहीं, लेकिन आरोपी सदस्य ब्रजभूषण शरण सिंह को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है।
उन्होंने महिलाओं के सशक्तीकरण को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संसद के दोनों सदनों में टीएमसी की महिला सदस्यों की संख्या पहले से ही 40 प्रतिशत है और यदि सरकार महिलाओं को सशक्त करने के प्रति सच्चा प्रयास करना चाहती है तो वह 33 प्रतिशत के बजाय 40 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करे।
समाजवादी पार्टी की सदस्य डिंपल यादव ने सरकार से आग्रह किया कि महिलाओं के लिए आरक्षण के प्रावधान वाले ‘नारीशक्ति वंदन विधेयक’ में अनुसूचित जाति और अनुसूसित जनजाति (एससी/एसटी) के साथ ही अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) तथा अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं के लिए अलग कोटा निर्धारित किया जाए।
चर्चा में भाग लेते हुए सपा सांसद ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘तीन तलाक’ की बात की और ऐसे में उनसे उम्मीद की जाती है कि आरक्षण विधेयक में अल्पसंख्यक महिलाओं को भी शामिल किया जाएगा।
उन्होंने सवाल किया, ‘‘क्या आरक्षण अगले लोकसभा चुनाव और आगामी विधानसभा चुनाव में लागू हो पाएगा या नहीं?
डिंपल यादव ने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि जाति जनगणना कब होगी और परिसीमन कब होगा।
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की गीता विश्वनाथ वांगा ने भी विधेयक का समर्थन करते हुए कहा, ‘‘मोदी जी महिला विधेयक लेकर आये, इसके लिए उन्हें साधुवाद।’’
जनता दल (यूनाइटेड) के राजीव रंजन सिंह ने विधेयक का समर्थन तो किया, लेकिन इसे विपक्ष के गठबंधन ‘इंडिया’ का ‘पैनिक रिएक्शन’ (भयभीत होकर उठाया गया कदम) बताया। उन्होंने सरकार के इस विधेयक को सरकार का 2024 का चुनावी जुमला भी करार दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘उनकी पार्टी विधेयक का समर्थन करती है, क्योंकि हम महिला सशक्तीकरण में विश्वास रखते हैं। लेकिन यह सरकार का चुनावी जुमला है।’’
सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार ने 2014 में लाखों बेरोजगारों को रोजगार देने का वादा करके छला, 15 लाख रुपये प्रत्येक व्यक्ति के खाते में डालने का वायदा करके गरीबों को छला था।
उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना नहीं कराना इस सरकार की मंशा का स्पष्ट संकेतक है।
सिंह ने कहा कि महिला आरक्षण 2024 के चुनाव में मोदी सरकार को बचाने की कवायद मात्र है।
बीजू जनता दल (बीजद) की राजश्री मल्लिक ने भी विधेयक का समर्थन किया और कहा कि महिला सशक्त होंगी तो राज्य और देश विकसित होगा।
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की संगीता आजाद ने कहा कि बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर ने एक वोट का अधिकार दिलाया था, वहीं कांशीराम ने एक वोट की कीमत बताई थी।
उन्होंने कहा, ‘‘आंबेडकर और कांशीराम की ही देन है, जिससे वंचित समाज की महिलाओं को लोकसभा और राज्यसभा तक पहुंचने का मौका मिला। इस विधेयक से देश की महिलाओं को सशक्त होने का बल मिलेगा।’’
उन्होंने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार ओबीसी महिलाओं को भी आरक्षण प्रदान करे तथा ऐसी व्यवस्था करे कि प्रस्तावित कानून 2024 के चुनाव में ही लागू हो सके।
भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के नामा नागरेश्वर राव ने भी विधेयक का समर्थन किया।
चर्चा में भाग लेते हुए शिवसेना की भावना गवली ने कहा कि ‘‘यह बिल महिलाओं का दिल है’’।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महिलाओं की किस्मत का ताला खोला है।
गवली ने आग्रह किया कि सिर्फ सदन में ही नहीं, मंत्रिमंडल में भी 33 प्रतिशत आरक्षण होना चाहिए।
भाजपा की सुनीता दुग्गल ने कहा कि देश की महिलाएं आश्वस्त थीं कि यह काम सिर्फ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ही कर सकते हैं।
उनका यह भी कहना था कि सभी दलों को इस विधेयक का समर्थन करना चाहिए।
राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी की वीणा देवी ने कहा कि यह विधेयक महिलाओं को शक्ति देगा।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सुप्रिया सुले ने कहा कि यह संदेश दिया जाना चाहिए कि सभी दल एससी, एसटी और ओबीसी के प्रति प्रतिबद्ध हैं, लेकिन अगर भाजपा का कोई अलग रुख है तो उसे बताना चाहिए।
भाजपा की जसकौर मीणा ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को संविधान ने जो सुरक्षा दी है, उसे बरकरार रखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस विधेयक के पारित होने के बाद महिलाएं और सक्षम होंगी।
कांग्रेस की ज्योतिमणि ने भी चर्चा में भाग लिया।
जारी सुरेश हक वैभव सुरेश वैभव
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY