देश की खबरें | मेरे परिवार को केंद्रीय एजेंसियों से नोटिस मिला तो कानूनी रूप से लड़ेंगे: ममता

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कोलकाता, 31 अगस्त पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को कहा कि यदि उनके परिवार के सदस्यों को केंद्र सरकार की किसी भी जांच एजेंसी से नोटिस मिलता है तो वह इससे कानूनी रूप से लड़ेंगी।

बनर्जी की यह टिप्पणी ऐसे समय आयी है, जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोयला तस्करी घोटाले में चल रही अपनी जांच के सिलसिले में उनके भतीजे एवं तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी को शुक्रवार को केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों के समक्ष पेश होने के लिए एक नया समन जारी किया।

तृणमूल प्रमुख ने कहा कि अगर उन्हें पहले पता होता कि राजनीति का मतलब एक दिन केवल कीचड़ उछालना और अफवाह फैलाना होगा, तो वह इसे बहुत पहले छोड़ देतीं। उन्होंने इस बारे में विस्तार से कुछ नहीं कहा।

मुख्यमंत्री ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘यदि मेरे परिवार को (केंद्रीय एजेंसियों से) नोटिस मिलता है, मैं बिल्कुल भी भयभीत नहीं हूं। इससे कानूनी रूप से लड़ूंगी, हालांकि इन दिनों यह भाजपा के हस्तक्षेप के चलते कठिन हो गया है। मुझे न्यायपालिका पर भरोसा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वे (भाजपा) आरोप लगाते हैं कि कोयला घोटाले से अर्जित आय कालीघाट जा रही है, लेकिन उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया। क्या रुपये मां काली के पास जा रहे हैं?’’

बनर्जी कोलकाता के कालीघाट इलाके में रहती हैं। यह इलाका अपने काली मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से तस्करी को रोकना गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, ‘‘कोयला और मवेशी गृह मंत्री के तहत आता है। यह उनकी जिम्मेदारी है।’’

पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ पार्टी में नंबर दो माने जाने वाले अभिषेक बनर्जी को ईडी द्वारा कोयला घोटाले की जांच के सिलसिले में तलब किया गया, टीएमसी के एक अन्य वरिष्ठ नेता अनुब्रत मंडल को सीबीआई ने मवेशी घोटाले की जांच में सहयोग नहीं करने के लिए गिरफ्तार किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘मवेशी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली और असम से आते हैं। मैंने मवेशियों की आवाजाही की अनुमति देना बंद कर दिया था। यहां तक कि कोविड के दौरान भी, उन्होंने (केंद्र ने) हमसे कहा था कि (वाहन ले जाने वाले) मवेशियों की आवाजाही को न रोकें।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने अवैध रूप से संपत्ति हासिल करने में किसी की मदद नहीं की। उन्होंने कहा, ‘‘यदि यह साबित हो जाता है कि मैंने किसी संपत्ति का अतिक्रमण किया है या ऐसा करने में किसी (परिवार में) की मदद की है, तो उसे ध्वस्त किया जा सकता है। उसे ध्वस्त कर दीजिये, आपको किसी की अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।’’

बनर्जी ने मुख्य सचिव और भूमि एवं राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव को उनके नाम वाली संपत्तियों की जांच करने का निर्देश दिया।

हाल के वर्षों में बनर्जी के रिश्तेदारों की संपत्ति कई गुना बढ़ने का आरोप लगाते हुए सोमवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर करके इसकी जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराने का अनुरोध किया गया।

बनर्जी ने कहा, ‘‘मैं मुख्यमंत्री के तौर पर वेतन नहीं लेती। हालांकि मैं सात बार की सांसद हूं, लेकिन मैं पेंशन नहीं लेती हूं। मेरा खर्च किताबों और पेंटिंग्स की बिक्री से मिलने वाले पैसे से पूरा हो जाता है।’’

उन्होंने सामग्री को सत्यापित किए बिना इस संबंध में समाचार कथित रूप से प्रसारित करने के लिए मीडिया को भी आड़े हाथ लिया। बनर्जी ने कहा, ‘‘आप (मीडिया) किसी पर बिना सोचे चोर होने का ठप्पा लगा रहे हैं। आप बिना सबूत के दूसरों को बदनाम कर रहे हैं। आप (मीडिया) सवाल क्यों कर रहे हैं कि किसी के पास कितने मकान हैं या उसकी संपत्ति का मूल्य क्या है?’’

तृणमूल कांग्रेस पदाधिकारियों की संपत्तियों के बारे में मीडिया के एक वर्ग में समाचार दिख रहे हैं, खासकर मंडल और अब निलंबित नेता पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी के बाद से।

बनर्जी ने कहा, ‘‘तृणमूल कांग्रेस परिवार को बदनाम करने की कोशिश न करें..।

उन्होंने कहा कि उन्हें राजनीति का मौजूदा चलन पसंद नहीं है। उन्होंने कहा,‘‘मैं लोगों की सेवा करने के लिए राजनीति में आयी हूं। अगर यह गंदी राजनीति (पहले) मेरे सामने आती, तो मैं बहुत पहले (राजनीति) छोड़ देती ....।’’

बनर्जी ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में जानबूझकर कुछ भी गलत नहीं किया है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे मच्छर मारने में भी डर लगता है। मैं रक्तपात नहीं देखना चाहती। मैं अपनों और प्रियजनों के शव नहीं देखने जाती।’’

मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को भी खारिज कर दिया कि वह इस महीने की शुरुआत में भाजपा के साथ समझौता करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने गई थीं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं ‘सेटिंग’ के लिए किसी के पास नहीं जाती। सब मेरे पास ‘सेटिंग’ के लिए आते हैं। लेकिन असल में मैं इसके लिए उपयुक्त नहीं हूं।’’

मुख्यमंत्री बनर्जी ने कहा कि वह राज्य के लिए धनराशि की मांग करने के लिए मोदी से मिलीं। उन्होंने कहा,‘‘मैं भिक्षा मांगने नहीं गई थी, मैं अपना बकाया मांगने गई थी। राज्य का बकाया मांगने में क्या ‘सेटिंग’ है?’’

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