देश की खबरें | झारखंड सरकार मुख्यमंत्री के मामले को क्यों खींचना चाह रही है:उच्च न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. मुख्यमंत्री के नाम से खदान आवंटन और उनके करीबियों के फर्जी कंपनी चलाने और उनके माध्यम से करोड़ों रुपये का धनशोधन करने के आरोपों वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए बार-बार तारीख मांगने पर शुक्रवार को आखिरकार झारखंड उच्च न्यायालय ने सीधे तौर पर पूछा कि राज्य सरकार इस मामले को क्यों खींचना चाहती है?

रांची, 17 जून मुख्यमंत्री के नाम से खदान आवंटन और उनके करीबियों के फर्जी कंपनी चलाने और उनके माध्यम से करोड़ों रुपये का धनशोधन करने के आरोपों वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए बार-बार तारीख मांगने पर शुक्रवार को आखिरकार झारखंड उच्च न्यायालय ने सीधे तौर पर पूछा कि राज्य सरकार इस मामले को क्यों खींचना चाहती है?

मुख्य न्यायाधीश डा. रविरंजन एवं सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के बार-बार तारीख लेकर सुनवाई से बचने के प्रयास पर पूछा कि आखिर जब आज ही सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले में राज्य सरकार के वकील पेश हो सकते हैं तो वह उच्च न्यायालय में वह इस मामले में बहस के लिए क्यों नहीं पेश हुए?

न्यायमूर्ति रविरंजन ने राज्य सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता आशुतोष आनंद से अदालत ने पूछा, ‘‘जब सरकार सर्वोच्च न्यायालय में आज बहस कर सकती है तो यहां वह बहस से क्यों बच रही है?’’

अदालत ने स्पष्ट कहा कि इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दिया गया हलफनामा बहुत महत्वपूर्ण है और मामले की सुनवाई और जांच में विलंब होने पर अनेक महत्वपूर्ण साक्ष्यों के नष्ट होने की आशंका है जो अदालत नहीं होने देगी।

इससे पूर्व शुक्रवार को आनंद ने अदालत को बताया कि मुकदमे में राज्य सरकार का पक्ष रखने वाले वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और राज्य सरकार के महाधिवक्ता राजीव रंजन कोरोना संक्रमित हो गए हैं। इस कारण दोनों पक्ष रखने में असमर्थ हैं। इसके बाद सरकार ने एक बार फिर अदालत से इस मामले की ऑनलाइन सुनवाई करने का आग्रह भी किया। इस पर अदालत ने राज्य सरकार के दोनों आग्रह स्वीकार कर लिये लेकिन उसने सरकार से कई तीखे सवाल भी किए।

खंडपीठ ने अपर महाधिवक्ता से पूछा कि आखिर शीर्ष न्यायालय में सरकार का पक्ष कौन रख रहा है? अपर महाधिवक्ता ने कहा कि इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। तब उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की कि क्या ऐसा हो सकता है कि राज्य सरकार को यह नहीं मालूम हो कि शीर्ष अदालत में उसका पक्ष कौन रख रहा है?

अदालत की इस टिप्पणी के बाद झेपते हुए अपर महाधिवक्ता ने कहा कि वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी सर्वोच्च न्यायालय में राज्य सरकार का पक्ष रख रहे हैं। तब अदालत ने कहा, ‘‘जब सर्वोच्च न्यायालय में आप सुनवाई के लिए व्यवस्था कर सकते हैं तो उच्च न्यायालय के लिए क्यों नहीं?’’

अदालत ने कहा, ‘‘राज्य सरकार हर बार इस मामले को खींचना चाह रही है। सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका की वैधता तय करने के बाद सुनवाई शुरू करने का निर्देश दिया था। इसी आलोक में उच्च न्यायालय इस मामले की सुनवाई कर रहा है।’’

उच्च न्यायायल ने तल्ख होते हुए कहा, ‘‘सरकार सिर्फ एक ही अधिवक्ता को लेकर क्यों बैठी है, जबकि उसके पास वकीलों की कतार है?’’

अदालत ने सरकार से पूछा कि आज उच्तम न्यायालय में क्या आदेश आया है? इस पर राज्य सरकार ने तो कुछ स्पष्ट नहीं कहा लेकिन जनहित याचिकाकर्ता के अधिवक्ता राजीव कुमार ने अदालत को बताया कि बताया कि शीर्ष अदालत ने इस मामले की जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया है।

बाद में उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका पर आगे की सुनवाई 23 जून को निर्धारित कर दी और मामले की अब ऑनलाइन सुनवाई करने के निर्देश दिये।

इससे पूर्व प्रार्थी शिवशंकर शर्मा के वकील राजीव कुमार और राज्य सरकार के लिए मामले में पेश हुए मुकुल रोहतगी एवं कपिल सिब्बल की बहस सुनने के बाद अदालत ने तीन जून को हेमंत सोरेन सरकार को बड़ा झटका देते हुए मुख्यमंत्री के करीबी लोगों के फर्जी कंपनियों के माध्यम से धन शोधन करने के मामले और मुख्यमंत्री को मंत्री रहते खनन पट्टा आवंटित करने के मामले में दायर इस जनहित याचिका को सुनवाईयोग्य माना था।

उच्च न्यायालय ने मामले के महत्व को देखते हुए दोनों पक्षों को तीन जून से ही बहस प्रारंभ करने को कहा था लेकिन राज्य सरकार के महाधिवक्ता न्यायालय से अधिक समय देने की मांग करने लगे और कहा था कि अभी सरकार इस मामले में बहस के लिए तैयार नहीं है।

बाद में उच्च ने राज्य सरकार के महाधिवक्ता के अनुरोध को मानते हुए जनहित याचिका की सुनवाई दस जून को निर्धारित की लेकिन एक बार फिर महाधिवक्ता ने मामले में राज्य सरकार की पैरवी कर रहे अधिवकता कपिल सिब्बल की उपलब्धता न होने की बात कहते हुए दूसरी तारीख की मांग की जिस पर पीठ ने मामले की सुनवाई 17 जून को तय कर दी।

हालांकि याचिकाकर्ता के वकील राजीव कुमार ने इसका जमकर विरोध किया और कहा कि इस मामले में जितना विलंब किया जायेगा उतना ही महत्वपूर्ण साक्ष्यों के नष्ट होने की आशंका है।

ज्ञातव्य है कि इस मामले में मुख्यमंत्री और राज्य सरकार मामले को खारिज कराने के लिए 24 मई को सर्वाच्च न्यायालय पहुंचे थे जहां से उन्हें सिर्फ इस राहत के साथ वापस उच्च न्यायालय भेज दिया गया था कि उच्च न्यायालय इस मामले की पोषणीयता पर पहले फैसला करेगी।

प्रवर्तन निदेशालयरूईडीः की ओर से पक्ष रखते हुए केन्द्र सरकार के सोलिसिटर जनरलः तुषार मेहता ने तर्क दिया था कि मनरेगा घोटाले की जांच के दौरान जांच में कई तथ्य चौंकाने वाले मिले हैं और प्रथम दृष्ट्या धनशोधन करने का अपराध भी हुआ है।

मेहता ने साफ किया था कि खनन केंद्र का विषय है इसलिए ईडी इसकी जांच कर सकती है।

, इन्दु

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