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विदेश की खबरें | रूस-यूक्रेन में क्यों बढ़ा है तनाव ?

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. हालांकि, रूस ने कहा कि उसका ऐसा कोई इरादा नहीं है और उसने यूक्रेन और उसके पश्चिमी समर्थक देशों पर अपने कथित आक्रामक मंसूबे को छिपाते हुए बेबुनियाद दावा करने का आरोप लगाया है। यह स्पष्ट नहीं है कि रूसी सेना के जमावड़े से हमले की शुरुआत होगी या नहीं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन में नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) के विस्तार को रोकने के लिए पश्चिमी देशों द्वारा गारंटी दिए जाने पर भी जोर दिया है।

विदेश की खबरें | रूस-यूक्रेन में क्यों बढ़ा है तनाव ?

हालांकि, रूस ने कहा कि उसका ऐसा कोई इरादा नहीं है और उसने यूक्रेन और उसके पश्चिमी समर्थक देशों पर अपने कथित आक्रामक मंसूबे को छिपाते हुए बेबुनियाद दावा करने का आरोप लगाया है। यह स्पष्ट नहीं है कि रूसी सेना के जमावड़े से हमले की शुरुआत होगी या नहीं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन में नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) के विस्तार को रोकने के लिए पश्चिमी देशों द्वारा गारंटी दिए जाने पर भी जोर दिया है।

मौजूदा तनाव की क्या वजह है? यूक्रेन के रूस समर्थक राष्ट्रपति ने जन विरोधों को नजरअंदाज किया जिसके बाद रूस ने 2014 में यूक्रेन के क्रीमिया पर चढाई कर दी थी। यूक्रेन और पश्चिमी देशों ने रूस पर विद्रोहियों को समर्थन देने के लिए अपने सैनिक और हथियार भेजने का आरोप लगाया। मॉस्को ने इससे इनकार किया और आरोप लगाया कि अलगाववादियों से जुड़ने वाले रूसी कार्यकर्ता थे। यूक्रेन के पूर्वी औद्योगिक क्षेत्र डोनबासी को तबाह करने वाली लड़ाई में 14,000 से अधिक लोग मारे गए।

फ्रांस और जर्मनी की मध्यस्थता से 2015 के शांति समझौते ने बड़े पैमाने पर लड़ाई को समाप्त करने में मदद की लेकिन एक राजनीतिक समझौते तक पहुंचने का प्रयास विफल रहा और छिटपुट झड़पें लगातार होती रही हैं। इस साल की शुरुआत में, पूर्व में संघर्ष विराम समझौते के उल्लंघन में वृद्धि और यूक्रेन के पास रूसी सेना के जमावड़े ने युद्ध की आशंकाओं को हवा दी, लेकिन अप्रैल में युद्धाभ्यास के बाद मॉस्को द्वारा अपने बल के बड़े हिस्से को वापस बुला लेने पर तनाव कम हो गया।

अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने पिछले हफ्ते कहा था कि रूस अनुमानित रूप से 1,75,000 सैनिकों को तैनात करने की योजना बना रहा है और उनमें से लगभग आधे पहले से ही संभावित आक्रमण की तैयारी के लिए यूक्रेन की सीमा के पास विभिन्न जगहों पर तैनात हैं। आशंका जताई गई कि 2022 की शुरुआत में जंग शुरू हो सकती है। यूक्रेन का यह भी कहना है कि पश्चिमी देशों की चेतावनी के बाद रूस ने 90,000 से अधिक सैनिकों को दोनों देशों की सीमा से कुछ ही दूरी पर जमावड़ा कर रखा है। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि रूस की सेना की 41वीं इकाई यूक्रेनी सीमा से लगभग 260 किलोमीटर (160 मील) उत्तर में येलन्या के पास तैनात है।

क्या करना चाहता है रूस ? रूस का आरोप है कि यूक्रेन ने 2015 के शांति समझौते का सम्मान नहीं किया और क्षेत्र में जटिलता बढ़ाने के लिए पश्चिमी देशों की आलोचना की। आरोप-प्रत्यारोप के बीच, रूस ने यूक्रेन, फ्रांस और जर्मनी के साथ चारपक्षीय बैठक को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यूक्रेन के 2015 के समझौते का पालन करने से इनकार करने के मद्देनजर यह बेकार है। इस साल की शुरुआत में, पुतिन ने कहा था कि यूक्रेन द्वारा पूर्वी हिस्से को पुनः प्राप्त करने के लिए एक सैन्य प्रयास ‘‘यूक्रेनी राज्य के लिए गंभीर परिणाम होगा।’’

क्या रूसी आक्रमण का खतरा वास्तविक है? रूस ने पश्चिमी देशों अभियान के रूप में एक आक्रमण की साजिश की बात को खारिज कर दिया और आरोप लगाया कि दावे पूर्व में हमले के लिए एक यूक्रेन के छिपे हुए इरादे को प्रदर्शित करता है। यूक्रेन ऐसी योजनाओं से इनकार करता है। कुछ पर्यवेक्षक सैन्य जमावड़े को पुतिन द्वारा ताकत का प्रदर्शन के तौर पर देखते हैं। ऐसा कर रूस नाटो को मॉस्को की सीमा का सम्मान करने और यूक्रेन को सेना और हथियार भेजने से रोकने के लिए सबकुछ दांव लगाने के लिए तैयार है। पिछले महीने, पुतिन ने कहा था कि मॉस्को की चेतावनियों का अंतत: कुछ असर हुआ है और इससे पश्चिमी देश ‘‘निश्चित रूप से तनाव’’ में है। अमेरिकी अधिकारियों ने माना कि मॉस्को के इरादे स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन उन्होंने रूस के पिछले व्यवहार को चिंता का विषय बताया।

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(The above story first appeared on LatestLY on Dec 07, 2021 06:18 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).