देश की खबरें | पंजाब सरकार ने बिजली खरीद समझौतों पर अब तक फिर से बातचीत क्यों नहीं की: बाजवा
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चंडीगढ़, पांच जुलाई कांग्रेस सांसद प्रताप सिंह बाजवा ने मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने नेतृत्व वाली पंजाब सरकार से पूछा कि उसने बिजली खरीद समझौतों पर फिर से बातचीत करने के लिए अब तक कदम क्यों नहीं उठाए।
पंजाब में कांग्रेस सरकार ने शनिवार को कहा था कि वह शिरोमणि अकाल दल (शिअद)-भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासन के दौरान ‘गलत तरीके से किए गए’ बिजली खरीद समझौतों (पीपीए) से निपटने के लिए जल्द ही एक कानूनी रणनीति की घोषणा करेगी।
बाजवा ने कहा कि केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी) ने दिल्ली में एक बिजली वितरण कंपनी बीएसईएस को एक जुलाई, 2021 को एनटीपीसी-दादरी बिजली संयंत्र के साथ अपने पीपीए पर फिर से बातचीत करने की अनुमति दी। उन्होंने कहा कि इसी तरह, उत्तर प्रदेश सरकार ने भी अतीत में हस्ताक्षर किये गये पीपीए पर सफलतापूर्वक फिर से बातचीत की है।
उन्होंने पूछा, ‘‘ऐसा क्यों है कि पंजाब में ऐसा करने के लिए आज तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं?’’ मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के एक कटु आलोचक बाजवा ने कहा, ‘‘राज्य के शासन के चार साल बाद भी, शिअद-भाजपा सरकार द्वारा हस्ताक्षरित पीपीए अब भी लागू हैं। इन समझौतों से राज्य पर एक अपूरणीय वित्तीय बोझ पड़ा है।’’
उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार की ओर से इन ‘‘पंजाब विरोधी’’ पीपीए पर बातचीत करने वाले वही अधिकारी वर्तमान सरकार में भी महत्वपूर्ण पदों पर हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने मार्च 2020 में विधानसभा में पीपीए पर एक श्वेत पत्र का मसौदा तैयार किया था और सदन में घोषणा की थी कि दस्तावेज तैयार है लेकिन थोड़ा और काम करने की जरूरत है।
कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘‘तथ्य यह है कि 16 महीने बाद भी पूरी स्थिति को उजागर अरने वाला कोई श्वेत पत्र जारी नहीं किया गया है।’’
बाजवा ने रविवार को शिअद-भाजपा शासन के दौरान किये गये पीपीए पर मुख्यमंत्री की घोषणा को ‘‘बेहद देरी से लेकिन बहुत जरूरी’’ बताया था।
मुख्यमंत्री ने शनिवार को कहा था कि शिअद-भाजपा सरकार के दौरान हस्ताक्षरित 139 पीपीए में से 17 राज्य की बिजली की पूरी मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त हैं।
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