देश की खबरें | डब्ल्यूएचओ तपेदिक उन्मूलन के प्रयासों को बढ़ावा के लिए प्रतिबद्ध, गांधीनगर घोषणा पत्र को अपनाया गया

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गांधीनगर, 17 अगस्त विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र ने 2030 तक तपेदिक (टीबी) के उन्मूलन के प्रयासों में और तेजी लाने के लिए प्रतिबद्धता जताई और इसके सदस्य देशों ने गांधीनगर घोषणा पत्र को अपनाया है।

डब्ल्यूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में वैश्विक टीबी के करीब आधे मामले आते हैं और मौतें होती हैं।

डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल सिंह ने ‘‘दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में तपेदिक के उन्मूलन के लिए सतत, तेज और नवाचार’’ विषय पर मंत्रिस्तरीय बैठक को संबोधित किया। उन्होंने कहा, ‘‘आज तपेदिक से मुक्त क्षेत्र के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पहले से कहीं अधिक कदम उठाने की आवश्यकता है, जो लाखों लोगों को बीमारी और मृत्यु, गरीबी और निराशा के कगार पर पहुंचा रहा है।’’

इस क्षेत्र की एक प्रमुख प्राथमिकता तपेदिक उन्मूलन की दिशा में प्रगति और 22 सितंबर को न्यूयॉर्क में तपेदिक पर संयुक्त राष्ट्र की उच्च स्तरीय बैठक से पहले दो दिवसीय कार्यक्रम के अंत में गांधीनगर घोषणा पत्र को अपनाया गया।

घोषणा में विभिन्न हितधारकों के बीच प्रयासों के तालमेल पर जोर दिया गया है। तपेदिक और अन्य प्राथमिकता वाली बीमारियों को समाप्त करने की दिशा में प्रगति की निगरानी के संबंध में प्रत्येक देश में उच्चतम राजनीतिक स्तर पर रिपोर्ट करने वाले उच्च स्तरीय बहुक्षेत्रीय आयोग की स्थापना का भी आह्वान किया गया है।

डब्ल्यूएचओ की क्षेत्रीय निदेशक ने कहा, ‘‘तपेदिक पर ये उच्च स्तरीय बहुक्षेत्रीय आयोग उत्तरदायी स्वास्थ्य प्रणालियों के निर्माण और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज तथा स्वास्थ्य सुरक्षा को आगे बढ़ाने में भी मदद कर सकता है।’’

उन्होंने यह भी कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान संक्रमण के निदान और रोकथाम के लिए तपेदिक से जुड़े बुनियादी ढांचे को तेजी से तैनात किया गया था।

सिंह ने कहा कि घोषणा पत्र में एक समान और मानवाधिकार आधारित टीबी सेवाओं के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी को उचित रूप से अपनाने और उपयोग सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया है, जो एकीकृत, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल दृष्टिकोण के माध्यम से किसी भी सामाजिक, सांस्कृतिक या जनसांख्यिकीय विभाजन के बावजूद सभी के लिए सुलभ हो।

डब्ल्यूएचओ की क्षेत्रीय निदेशक ने कहा, ‘‘2022 में, क्षेत्र में तपेदिक को लेकर आवंटन 1.4 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें से 60 प्रतिशत घरेलू स्रोतों से था। हालांकि, मिशन की सफलता के लिए, हमें सालाना कम से कम तीन अरब अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता है, जो पोषण संबंधी सहायता जैसे प्रमुख सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को बनाए रखने में भी मदद करेगा।’’

घोषणा पत्र में डब्ल्यूएचओ से आने वाले वर्षों में तपेदिक को प्रमुख प्राथमिकता कार्यक्रम के रूप में बनाए रखने और अनुसंधान और नवाचार द्वारा समर्थित निरंतर और त्वरित दृष्टिकोण के लिए देशों को नेतृत्व और तकनीकी सहायता प्रदान करने का आह्वान किया गया है।

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