जहां जन्मा था हिटलर, वहां बना पुलिस स्टेशन

ऑस्ट्रिया के ब्राउनाउ में हिटलर के जन्मस्थान को नया रूप देकर पुलिस स्टेशन में बदल दिया गया है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

ऑस्ट्रिया के ब्राउनाउ में हिटलर के जन्मस्थान को नया रूप देकर पुलिस स्टेशन में बदल दिया गया है. लेकिन इस इमारत के भविष्य को लेकर विवाद अब भी जारी है.22 जुलाई 2026 से ऑस्ट्रिया के 'ब्राउनाउ आम इन' में पुलिस का नया पता होगा "साल्जबुर्गर फोरश्टाट 15".

यह एक आम सी सरकारी खबर होती, अगर यह वही इमारत न होती जहां अप्रैल 1889 में अडॉल्फ हिटलर का जन्म हुआ था. द्वितीय विश्व युद्ध की तबाही और लाखों लोगों की मौत के पीछे हिटलर की केंद्रीय भूमिका रही. साथ ही, हिटलर को होलोकॉस्ट का भी प्रमुख जिम्मेदार माना जाता है, जो यहूदियों के सामूहिक नरसंहार का एक काला अध्याय है.

इसी पते पर हिटलर के माता-पिता किराए पर रहते थे. हालांकि, हिटलर के जन्म के कुछ महीनों बाद ही उन्होंने यह मकान छोड़ दिया. इसके बाद यह इमारत बदलते समय और इतिहास के अनेक अध्यायों की गवाह बन गई और समय के साथ कई रूपों में सामने आई. साल 1938 में ऑस्ट्रिया के नाजी जर्मनी में शामिल होने के बाद नाजी पार्टी एनएसडीएपी ने हिटलर के इस जन्मस्थान को खरीद कर इसे हिटलर के स्मृति स्थल में बदल दिया. युद्ध समाप्त होने पर यह संपत्ति पुराने मालिकों के पास लौट आई और फिर इसे ऑस्ट्रिया सरकार ने किराए पर ले लिया. इसके बाद यहां कभी पुस्तकालय तो कभी स्कूल संचालित किये गए, जबकि हाल के वर्षों में यह इमारत दिव्यांग लोगों के लिए कार्यशाला के रूप में इस्तेमाल की जाती रही.

साल 2011 के बाद से यह इमारत खाली पड़ी थी. 2016 में ऑस्ट्रिया सरकार ने इसे अपने नियंत्रण में ले लिया, ताकि नियो-नाजी समूह इसे अपनी पहचान का केंद्र न बना सकें. सरकार का उद्देश्य था, इस इमारत को नियो-नाजी समर्थकों का तीर्थस्थल बनने से रोकना.

पुनर्निर्माण में आया लगभग 200 करोड़ रुपये का खर्च

हिटलर के जन्मस्थान के भविष्य को लेकर ऑस्ट्रिया के गृह मंत्रालय ने एक समिति बनाई. इस समिति को इतिहास के साथ जिम्मेदारीपूर्ण व्यवहार और इमारत के भविष्य के उपयोग पर सुझाव देने का काम सौंपा गया. विशेषज्ञ समिति ने कहा कि इसका सबसे अच्छा उपयोग सामाजिक कल्याण से जुड़े कार्यों या सरकारी दफ्तर के रूप में किया जाए.

विएना की यहूदी कम्युनिटी के अध्यक्ष और समिति के सदस्य ऑस्कर डॉयच ने डीडब्ल्यू को 2023 में बताया, "सबसे अहम बात यह थी कि यह इमारत नाजियों के लिए तीर्थस्थल न बने." उनके अनुसार, इमारत का कोई और उपयोग भी हो सकता था, लेकिन पुलिस स्टेशन के रूप में इसका उपयोग इतिहास से निपटने का एक व्यावहारिक और स्पष्ट तरीका है.

वहीं, इतिहासकार और समिति के सदस्य ओलिवर राथकोल्ब कहते हैं, "शुरुआत में हमने सर्वसम्मति से सुझाव दिया था कि यहां किसी कल्याणकारी संस्था जैसे 'फोक्सहिल्फे' को जगह दी जाए, लेकिन इस सुझाव को ठुकरा दिया गया." हालांकि, उनका मानना है कि पुलिस स्टेशन की मौजूदगी हिटलर समर्थकों को यहां जुटने और इमारत के साथ सेल्फी लेने से भी रोकेगी.

हिटलर के इस जन्मस्थान को नव-नाजी गतिविधियों का केंद्र बनने से रोकने के लिए सरकार ने इस परियोजना पर कम से कम 20 मिलियन यूरो यानी लगभग 200 करोड़ रुपयों का निवेश किया. यहां तक कि इसकी बाहरी बनावट भी जानबूझकर बेहद साधारण रखी गई, ताकि यह किसी तरह का आकर्षण केंद्र न बन सके. हालांकि, ब्राउनाउ के लोग इस नतीजे को मिली जुली भावनाओं के साथ देखते हैं.

स्थानीय नागरिक पहल "डिस्कुर्स हिटलरहाउस" की प्रवक्ता और ब्राउनाउ की निवासी एवेलिने डोल ने डीडब्ल्यू को बताया, "मानव इतिहास के सबसे बड़े जनहत्यारे के जन्मस्थान का इस्तेमाल अधिक जिम्मेदारी और इतिहास के प्रति संवेदनशील तरीके से किया जा सकता था. इस ऐतिहासिक अवसर को गंवा दिया गया है." डोल के अनुसार, "बेशक, इसके लिए शहर जिम्मेदार नहीं है, लेकिन दुनिया भर में ब्राउनाउ की पहचान उस जगह के रूप में की जाती है जहां हिटलर का जन्म हुआ था, और यह बात शायद हमेशा जुड़ी रहेगी."

इसी बीच, 2023 में हुए एक सर्वेक्षण से पता चला कि केवल छह प्रतिशत लोग ही इस इमारत में पुलिस स्टेशन स्थापित किए जाने के पक्ष में थे, जिससे इस मुद्दे पर स्थानीय लोगों की बंटी हुई राय भी सामने आई.

नाजी दौर की पुलिस: इतिहास का एक काला पन्ना

एवेलिने डोल कहती हैं, "पिछले 25 वर्षों में इस भवन को शांति, स्वतंत्रता, लोकतंत्र और सहिष्णुता जैसे मूल्यों के केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए कई सुझाव सामने आए. ये ऐसे संदेश हैं, जिनकी आज और भविष्य, दोनों में बेहद जरूरत है." वह कहती हैं, "दुर्भाग्य से उन सुझावों पर अमल नहीं हुआ और अब यहां पुलिस स्टेशन बन गया, जो आलोचना का विषय बना हुआ है."

पुलिस स्टेशन को लेकर उठ रही आपत्तियां नाजी दौर की पुलिस के इतिहास से भी जुड़ी हैं. हिटलर द्वारा 1936 में हाइनरिष हिमलर को जर्मन पुलिस की कमान सौंपे जाने के बाद पुलिस और एसएस, जो की हिटलर का अर्धसैनिक बल था, उनके बीच घनिष्ठ संबंध बन गए. विशेष रूप से गेस्टापो के साथ यह संबंध बने, जो नाजी दौर की गुप्त राज्य पुलिस थी. उन्होंने नाजी शासन के राजनीतिक विरोधियों के साथ-साथ नाजी अत्याचारों के शिकार लोगों के उत्पीड़न में केन्द्रीय भूमिका निभाई.

ब्राउनाउ के एसोसिएशन फॉर कंटेम्पररी हिस्ट्री के अध्यक्ष फ्लोरियन कोटांको इस मामले में पुलिस की तुलना नाजी दौर से करने के पक्ष में नहीं हैं. उनका कहना है, "हम एक लोकतांत्रिक कानून-आधारित राज्य में रहते हैं और पुलिस उसकी संस्थाओं में से एक है. जब तक पुलिस को उनकी गलतियों पर जवाबदेह ठहराया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ अदालत में कार्रवाई हो सकती है, तब तक पुलिस पर अविश्वास की कोई वजह नहीं है." जहां तक हिटलर के जन्मस्थान के नए उपयोग का सवाल है, वह डीडब्ल्यू को बताते हैं, "ऑस्ट्रिया सरकार ने इस इमारत के लिए यही फैसला किया है और फिलहाल यही वास्तविकता है."

नाजी दौर की विरासत से निपटना ऑस्ट्रिया के लिए आज भी चुनौती बना हुआ है. साल 1938 में हिटलर ने ऑस्ट्रिया को नाजी शासित जर्मनी में शामिल कर लिया था. उस समय कई ऑस्ट्रियाई लोगों ने इस कदम का स्वागत किया था. नाजी शासन के दौरान करीब 65,000 ऑस्ट्रियाई यहूदियों की हत्या कर दी गई, जबकि लगभग 1,30,000 लोगों को देश छोड़कर निर्वासन में जाना पड़ा. आलोचकों का आरोप है कि ऑस्ट्रिया ने लंबे समय तक होलोकॉस्ट में अपनी भूमिका को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया. वहीं, ऑस्ट्रिया में पूर्व नाजियों द्वारा 1956 में स्थापित दक्षिणपंथी एफपीओ पार्टी 2024 के संसदीय चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन सरकार बनाने में सफल नहीं हो सकी.

2025 में पत्रिका स्मृति-चिह्नप्रैगमैटिकस के लिए कराए गए एक ऑनलाइन सर्वे में 39 फीसदी ऑस्ट्रियाई प्रतिभागियों ने इस राय से सहमति जताई कि नाजी दौर पर बार-बार होने वाली चर्चा को अब खत्म कर देना चाहिए.

स्मृति-चिह्न को नहीं हटाया जाएगा

इमारत के नवीनीकरण के बाद भी इस पर इतिहास से जुड़ी कोई जानकारी प्रदर्शित नहीं की जाएगी. विशेषज्ञ समिति ने यह भी सुझाव दिया था कि घर के सामने रखे उस स्मृति-चिन्ह को किसी दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया जाए, जिसे ऑस्ट्रिया के सबसे बड़े यातना शिविर माउथाउजेन से लाया गया था. हालांकि, ब्राउनाउ प्रशासन ने उसे हटाने के बजाय वहीं बनाए रखने का निर्णय लिया. उस स्मृति-चिह्न पर पीड़ितों की याद में संदेश अंकित हैं.

दिलचस्प बात यह है कि जर्मनी में हिटलर के आखिरी आधिकारिक पते पर भी आज पुलिस का ही ठिकाना है. म्यूनिख के बोगेनहाउजेन इलाके में स्थित 'प्रिंसरेगेंटेनप्लाट्स 16' कभी हिटलर का निवास हुआ करता था. युद्ध के बाद यह इमारत सरकारी नियंत्रण में आ गई और बाद में यहां पुलिस स्टेशन स्थापित किया गया. अब समय-समय पर यहां विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य यह दिखाना है कि यह जगह अब लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व करती है, न कि अपने अतीत का.

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